समय से पहले जन्मे बच्चों को होने वाली परेशानियां

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24th June, 2017

Kya hota hai yadi samay se pehle ho jaye bachche ka janam | क्या होता है यदि समय से पहले हो जाए बच्चे का जन्म? | What happens when a child is born premature?भले ही आज आधुनकि तकनिकी के चलते, समय से पूर्व जन्मे बच्चों की जीवित दर बढ़ गई हो, लेकिन यह बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं होता। जहाँ एक और ऐसे बच्चों के शारीरिक और मानसिक तौर पर कमजोर होने की आशंका ज्यादा रहती है, वहीं दूसरी और इनमें गंभीर मानसिक और शारीरिक बिमारियां होने की आशंका भी ज्यादा रहती हैं।

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समय से पूर्व जन्में बच्चों को अनेकों शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, उनके फेंफड़ों का विकास ठीक तरह से नही हो पाता, इसकी वजह से उन्हें सांस लेने में परेशानी हो सकती है। इन बच्चों को हृदय रोग, मानसिक रोग और अन्य कई तरह की परेशानियां बेहद आसानी से हो सकती हैं। चलिए जानते हैं समय से पूर्व जन्में बच्चों में क्या-क्या जटिलताएं होने की आशंका रहती है।

प्री-मैच्योर बच्चे को जन्म के बाद हो सकती हैं निम्न परेशानियां-

  • सांस लेने में परेशानी- समय से पूर्व जन्में बच्चों में सांस लेने में परेशानी होती है, ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी श्वसन प्रणाली पूरी तरह से विकसित नहीं हुई होती। इसके कारण कभी-कभी बच्चों में श्वसन तंत्र की गंभीर समस्या (ब्रोंको पल्मोनरी डिस्प्लासिया) भी पनप सकती है।
  • हृदय रोग-  प्री-मैच्योर बच्चों में, पेटेंट डक्टस धमनी (पीडीए) और लो ब्लड प्रैशर (हैपिटेशन) सबसे आम समस्या होती है। PDA, एक ऐसी समस्या है, जिसमें हृदय से निकलने वाली दो महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाएं जिन्हें बन्द हो जाना चाहिए वह खुली रह जाती हैं। हालाँकि इस समस्या को बिना उपचार के छोड़ दिया जाता है, क्योंकि यह समस्या जन्म के बाद खुद-ब-खुद ठीक हो जाती है। लेकिन कभी-कभी यह बच्चों में हार्टअटैक का कारण भी बन जाती है। वहीं रक्त चाप में, कमी को दूर करने के लिए बच्चों के रक्त में तरल छोड़े जाते हैं और रक्त भी चढ़ाया जा सकता है।
  • मस्तिष्क से जुडी समस्याएं- बच्चे का जन्म जितनी जल्दी हो जाता है, उसमें मस्तिष्क में रक्तस्त्राव की आशंकाएं उतनी ही ज्यादा रहती हैं। इसे इंट्रावेंट्रीक्युलर हेमरेज कहा जाता है। बच्चे का जन्म समय से जितना पहले होता है, उसमें मस्तिष्क में रक्तस्त्राव होने की आशंका भी उतनी ही ज्यादा होती है। यहाँ तक कि कभी-कभी तो कुछ बच्चों में हेमोरेज को रोकने के लिए ऑपरेशन भी करना पड़ता है।
  • तापमान से जुड़ी समस्याएं- समय से पहले जन्में बच्चों में तापमान बेहद तेजी से गिरने का ख़तरा होता है। इन बच्चों के शरीर पर समय से जन्में बच्चों की तरह वसा का जमाव नहीं होता और इसलिए यह बच्चे शरीर में गर्मी को इकठ्ठा नहीं कर पाते। यदि इन बच्चों का तापमान सामान्य से ज्यादा गिर जाए तो उन्हें हाइपोथिमिया की समस्या हो सकती है।
  • हाइपोथिमिया की वजह से बच्चे में सांस लेने में समस्या और रक्त शर्करा के स्तर में कमी आ सकती है। क्योंकि इस तरह की स्थिति में बच्चे का शरीर सिर्फ गर्मी उत्पन्न करने के लिए ही आहार से मिली पूरी एनर्जी को खत्म कर देता है। इससे बच्चे का शरीर अच्छे से विकास नहीं कर पाता। इसलिए समय से पहले जन्में बच्चों को अतिरिक्त गर्मी देने की आवश्यक्ता होती है। जब तक वह सामान्य स्थिति में नहीं आ जाते उन्हें खास तौर पर गर्म रखा जाना चाहिए। .
  • जठरांत्र संबंधी समस्याएं- समय से पहले जन्में बच्चे, जठरांत्र सम्बन्धी समस्याओं के शिकार भी बेहद आसानी से हो जाते हैं। क्योंकि उनके शरीर के यह हिस्सा भी बेहद कमजोर होता है। इन बच्चों में, नेक्रोटाइज़िंग आंत्रशोथ (एनईसी) होने की आशंका होती है। यह एक बेहद गंभीर स्थिति होती है जिसमें, कोशिकाओं का अस्तर क्षतिग्रस्त हो जाता है। यह समस्या बच्चों में तब आ सकती है, जब वह ऊपरी आहार लेना शुरू करते हैं। जो बच्चे अपनी माओं का दूध पीते हैं उनमें इस समस्या के होने की आशंका कम होती है।
  • रक्त से जुड़े विकार- समय से पहले जन्में बच्चों में, पीलिया और रक्त की कमी होने की आशंका भी बहुत ज्यादा होती है। ऐसे बच्चों में ख़ास तौर पर, रक्त की कमी बेहद आम होती है। वहीं एक और बात कि बच्चे के जन्म के बाद, पहले महीने में रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कम होने की आशंका ज्यादातर बच्चों में होती है, लेकिन समय से पहले जन्में बच्चों में इसकी आशंका बहुत ज्यादा होती है। खास तौर पर, यदि बच्चे की जाँच के लिए उसके शरीर से रक्त भी बार-बार लिया जा रहा हो।
  • चयापचय से जुड़ी समस्याएं- प्री-मैच्योर बच्चों में चयापचय की समस्या भी बेहद आम होती है। क्योंकि इनका लिवर बेहद कमजोर होता है। एक और बात कि एक और तो इन बच्चों में, पहले से ही ग्लूलकोगन की कम मात्रा एकत्रित होती है, वहीं दूसरी और उसे इनका कमजोर लिवर ग्लूकोज के रूप में परिवर्तित नहीं कर पाता। 
  • रोग प्रति रोधक क्षमता से जुड़ी समस्याएं- समय से पूर्व जन्में बच्चों की रोगों से लड़ने की क्षमता भी बेहद कम होती है और इन्हें बाहरी वातावरण में सामंजस्य बैठाने में बहुत संघर्ष करना पड़ता है। इससे इन बच्चों को संक्रमण होने का खतरा भी बहुत ज्यादा होता है।



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