प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही- एक अवलोकन

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31st May, 2017

Pregnancy ki Teesri Timahi | प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही | Third Trimester of pregnancy?प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही वह समय होता है, जिसमें बच्चे के अंग पूरी तरह से विकसित हो चुके होते हैं और वह जन्म के लिए लगभग तैयार हो चुका होता है। तीसरे ट्राइमेस्टर में सिर्फ बच्चे का शरीर आकार में बढ़ता है। इस दौरान, बच्चे के वजन के साथ-साथ के महिला पेट के आकार में भी तेजी से बढ़ोत्तरी होती है। यह समय बच्चे के स्वास्थ्य के हिसाब से बहुत महत्वपूर्ण होता है। साथ ही माँ के लिए भी यह समय बहुत चुनौतीपूर्ण  होता है। चलिए जानते हैं, प्रेगेन्सी के तीसरे ट्राइमेस्टर में महिला को किन-किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।

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प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में गर्भवती महिलाओं को होने वाली परेशानियां-

कमर दर्द- इस ट्राइमेस्टर में महिला की टमी आगे की तरफ पूरी तरह निकल चुकी होती है और इससे उसकी कमर पर दबाव पड़ना शुरू हो जाता है। कमर पर दबाव पड़ने से कमर में दर्द रहता है। श्रोणि, स्नायुबंधन और कूल्हे प्रसव के लिए तैयार होना शुरू होते हैं और इससे उन जगहों पर भी दबाव पड़ता है और शरीर के इन हिस्सों में असहजता का अहसास होता है। कुछ बैठने और लेटने की ऐसी मुद्राएं होती हैं, जिनसे इनमें आराम मिलता है। हमेशा सीधे बैठें और ऐसी कुर्सी का प्रयोग करें जो आपकी कमर को सही सहारा दें। इस तरह के दर्द में राहत से आप सिकाई के जरिये राहत पा सकती हैं।

पेट में हल्का दर्द- इस तिमाही में, महिला के गर्भाशय में हल्का संकुचन भी होना  शुरू हो जाता है। जिसे ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन कहा जाता है। यह प्रसव की तैयारी होती है। लेकिन यह बेहद हल्का होता है। यह लेबर पेन (प्रसव पीड़ा) की तरह ज्यादा नहीं होता। लेकिन यदि यह  असहनीय हो रहा हो तो अपने डॉक्टर से बात करें।

ब्रैस्ट के आकार का बढ़ना- प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में ही महिला के शरीर में उस हार्मोन का निर्माण होता है, जिससे महिला के स्तनों में दूध बनता है। इसीलिए इस दौरान, ब्रैस्ट के आकार में बढ़ोत्तरी भी होती है और उनमें दर्द भी होता है। ऐसे में यदि आप सपोर्टिव ब्रा पहनती हैं, तो आपकी परेशानी थोड़ी कम हो सकती है।

स्त्राव (डिस्चार्ज)- इस दौरान, वेजाइना से डिस्चार्ज होना भी आम बात होती है। यदि यह स्त्राव ज्यादा हो रहा हो तो अपने डॉक्टर से बात जरूर करें। प्रसव से पहले यदि इस तरह का डिस्चार्ज होता है तो इसका मतलब है कि श्रोणि (सर्विक्स) में डायलेशन खिंचाव होना शुरू हो गया है और अब प्रसव नजदीक है।

बैचेनी और थकावट- जहाँ प्रेग्नेंसी के दूसरे ट्राइमेस्टर में, महिलाएं बेहद ऊर्जावान महसूस करती हैं, वहीँ दूसरी और तीसरी तिमाही में शरीर का भार ज्यादा होने से महिलाओं को बैचेनी ओर थकावट होने लगती है। इस दौरान, रात को महिलाओं की नींद भी बार-बार खुलती है और उसे बार-बार बाथरूम जाना पड़ता है।

चिंता- तीसरी तिमाही में जहाँ एक ओर महिला का शरीर और उसका पेट पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा भारी हो चुका होता है और इससे उसे बहुत सी तकलीफों का सामना करना पड़ता है, वहीँ दूसरी ओर उसे प्रसव की चिंता भी सताने लगती है। ऐसे में, महिलाओं को भावनात्मक सहारे की बहुत जरूरत होती है। इस दौरान, महिलाओं को प्रेग्नेंसी की ऐसी कहानियां सुननी चाहिए, जो प्रेरणादायक हों। साथ ही नकारात्मक सोच वाले लोगों से दूर रहने की कोशिश करें।

इनके अलावा, जिन परेशानियों का पहली दो तिमाही में जिक्र किया गया है, बहुत सी महिलाओं को वह परेशानियां जैसे, सीने में जलन, बार-बार यूरिन जाना भी इस दौरान, जारी रहती है। जिनके लिए महिलाओं को अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए। डॉक्टर आपकी परेशानी को खत्म तो नहीं कर सकते लेकिन उन्हें कम जरूर कर सकते हैं।



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