गले के कैंसर की जाँच के विकल्प

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11th May, 2017

Gale ke cancer ki janch | गले के कैंसर की जाँच | Diagnosis for Throat Cancerगले के कैंसर का पता लगाने के लिए सबसे पहले डॉक्टर रोगी की शारीरिक जाँच करते हैं। रोगी को क्या-क्या परेशानियां आ रही हैं, कब से आ रहीं हैं। डॉक्टर रोगी  की आदतों और घर में पहले से कैंसर या गले का कैंसर तो नहीं रहा है, जैसी जानकारियाँ भी लेते हैं। इन सभी जवाबों के आधार पर रोगी के कैंसर से होने या न होने का अंदाजा लगाया जाता है और इसके बाद कुछ जाँचें हैं जो की जाती हैं। शारीरिक जाँच और स्वास्थ्य और पारिवारिक इतिहास से जुड़े सवालों के बाद डॉक्टर, मेडिकल जाँच के द्वारा, गले की भीतरी स्थिति का पता लगाते हैं और इसके लिए लैरींजोस्कोप, एंडोस्कोप, इमेजिंग टेस्ट और गले के प्रभावित स्थान से कुछ उत्तकों को निकाल कर कैंसर की जाँच की जाती है।

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गले के कैंसर के लिए की जाने वाली जाँच-

  • एंडोस्कोप- इस प्रक्रिया में एंडोस्कोप के सिरे पर एक कैमरे को लगा कर गले के अंदर प्रवेश कराया जाता है और गले की अंदरूनी जाँच की जाती है। एंडोस्कोप एक स्क्रीन से जुड़ी होती है और इसके सिरे पर लगे कैमरे से स्क्रीन पर गले की भीतरी दीवारों को देखा जाता है।
  • लैरींजोस्कोप- इस जाँच में, एक स्कोप जिसे लैरींजोस्कोप कहा जाता है, सीधे ध्वनि वाले क्षेत्र में प्रवेश कराया जाता है जिसके सिरे पर एक ऐसा लेंस (मैग्निफिआइंग लेंस) लगा होता है और इससे चीजों को विस्तृत रूप में देखा जा सकता है,  के जरिये गले की जाँच की जाती है।
  • गले के उत्तकों द्वारा जाँच- इस जाँच में, डॉक्टर पहली दोनों जांचों यानी एंडोस्कोप और लैरींजोस्कोप के प्रयोग से गले से कुछ उत्तकों को निकालते हैं और उन उत्तकों को जाँच के लिए प्रयोगशाला में भेज दिया जाता है। प्रयोगशाला में जाँच के बाद पता लगाया जाता है कि गले के उत्तकों में कैंसर कोशिकाएं मौजूद हैं या नहीं।
  • इमेजिंग टेस्ट- इमेजिंग टेस्ट में, एक्स-रे, कम्प्यूटरीकृत टोमोग्राफी (सीटी), चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (एमआरआई) और पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी) के द्वारा  जाँच की जाती है यदि कैंसर है तो वह कितना फ़ैल चुका है इस बात की जानकारी की जाती है।

एक बार गले में कैंसर होने या न होने की पुष्टि होने और यह देखने के बाद कि कैंसर और कितने हिस्से में फ़ैल चुका है, डॉक्टर कैंसर की स्टेज का पता लगाते हैं और स्टेज के आधार पर ही रोगी का इलाज निर्भर करता है।



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