शरीर में क्या होनी चाहिए कोलेस्ट्रॉल की सही मात्रा?

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24th June, 2017

Cholesterol ki kitni matra samany hoti hai? | कोलेस्ट्रॉल की कितनी मात्रा सामान्य होती है? | How much Cholestrol is normal?हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल का अपना ही महत्वपूर्ण कार्य होता है और यह हमारे शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण तत्व है। लेकिन साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि इसकी मात्रा उतनी ही होनी चाहिए जितनी की शरीर को जरुरत होती है। क्योंकि इससे ज्यादा मात्रा शरीर और हृदय के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

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दरअसल हमारे शरीर में दो तरह के कोलेस्ट्रॉल होते हैं, एक तो गुड़ कोलेस्ट्रॉल (HDL) और दूसरा बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL)। यह दोनों ही प्रकार के कोलेस्ट्रॉल अलग-अलग तरह के दो प्रोटीन्स हाई डेनसिटी प्रोटीन और लो डेनसिटी प्रोटीन के द्वारा कैरी किये जाते हैं। इनमें से दोनों कोलेस्ट्रॉल की निश्चित मात्रा शरीर के लिए अच्छी होती है। हमारे शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ज्यादा होनी चाहिए और बुरे की कम। यदि इन दोनों में सामंजस्य बिगड़ जाए, यानी बुरे कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ज्यादा और अच्छे की कम हो जाए तो यह स्थिति धमनियों को रोक कर हृदय रोगों को जन्म दे सकती है। चलिए देखते हैं शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कितनी होनी चाहिए।

कितना होना चाहिए कुल कोलेस्ट्रॉल? (गुड और बैड कोलेस्ट्रॉल की मिली-जुली मात्रा)

कुल कोलेस्ट्रॉल स्तर श्रेणी या वर्ग
200 mg/dL या इससे कम नार्मल कोलेस्ट्रॉल
200 से 239 mg/dL के बीच बॉर्डर लाइन कोलेस्ट्रॉल
240mg/dL और इससे ज्यादा हाई कोलेस्ट्रॉल

LDL कोलेस्ट्रॉल की कम और ज्यादा मात्रा

               LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल)                         श्रेणी
100 mg/dL से कम ऑप्टीमल या सबसे अच्छी मात्रा
100 से 129mg/dL के बीच अच्छे से थोड़ी कम
130 से 159 mg/dL के बीच सामान्य से थोड़ी ऊपर (बॉर्डरलाइन)
160  से 189 mg/dL के बीच हाई कोलेस्ट्रॉल
190 mg/dL और इससे ज्यादा बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल

HDL कोलेस्ट्रॉल की कम और ज्यादा मात्रा

HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल) श्रेणी
40 mg/dL और इससे कम हृदय के लिए बेहद आवश्यक मात्रा
40 से 59 mg/dL के बीच जितना ज्यादा उतना अच्छा
60 mg/dL और इससे ऊपर मात्रा हृदय रोगों को रोकने में समर्थ

यदि शरीर में, अच्छे और बुरे कोलेस्ट्रॉल के बीच सामंजस्य बिगड़ता है, तो इसका असर न सिर्फ हमारे पूरे शरीर पर पड़ता है, बल्कि हृदय रोगों के पीछे सबसे बड़े कारणों में से एक है कोलेस्ट्रॉल। और तो और शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण भी नजर नहीं आते और रोगी को पता भी नहीं चल पता कि उसका कोलेस्ट्रॉल बढ़ रहा है। इसकी जानकारी या तो किसी और समस्या की जाँच के वक्त मिलती है या फिर जब इससे रक्त वाहिकाएं और धमनियों में रुकावट आने लगती है तब मिलती है। ऐसे में यह जरुरी है कि 20 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों को कम से कम पांच साल में एक बार और 40 वर्ष और इससे ऊपर के लोगों को साल में एक बार इसकी जाँच जरूर करा लेनी चाहिए। इससे यदि इसके शरीर में पनपने की आशंका भी है तो आप बिना मेडिकल ट्रीटमेंट के इसे रोक सकें।



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