स्व-प्रतिरक्षित विकार के कारण पनपने वाली बीमारियां

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15th March, 2018

जैसा कि हम अपने पुराने लेखों में बता चुके हैं कि स्व-प्रतिरक्षित विकार या ऑटोइम्यून डिसऑर्डर एक ऐसी समस्या होती है, जिसमें व्यक्ति की रोगों से लड़ने वाली क्षमता, हानिकारक तत्वों और शारीरिक कोशिकाओं में फर्क नहीं कर पाती और उन्हें भी हानिकारक तत्व समझ कर उन पर आक्रमण करना शुरू कर देती है। इसके कारण शरीर में जो विकार उतपन्न होता है, उसे ही ऑटोइम्यून डिसऑर्डर कहा जाता है, और इसके कारण जितनी भी बीमारियां उतपन्न होती हैं, उन्हें ऑटोइम्यून डिजीज कहा जाता है।

ऐसी बीमारियां, जो शरीर की सुरक्षा में गड़बड़ी के चलते पनपती हैं, उनकी सूची बेहद लंबी है और लगभग 80 से 150 के करीब ऐसी बीमारियां हैं, जो शरीर के इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी के चलते पैदा होती हैं। हम यहाँ कुछ ऐसी बीमारियों को शामिल कर रहें हैं, जो बेहद आम है।

इम्यून सिस्टम में गड़बड़ी से पैदा होने वाली कुछ बीमारियां-

  • संधिशोथ या रूमटॉइड आर्थ्राइटिस (Rheumatoid arthritis)- इसमें एंटीबॉडीज़ का हमला जोड़ों की परत पर होता है। इससे सूजन और दर्द पैदा होता है। यदि इस समस्या को समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो समय के साथ यह समस्या जोड़ों को एक दम खराब कर देती है। कुछ दवाओं और इंजेक्शन के द्वारा इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोस (ल्यूपस)- यह समस्या तब पनपती है, जब एंटीबॉडीज़ के द्वारा पूरे शरीर की कोशिकाओं पर धावा बोल दिया जाता है। इसमें, जोड़, फेफड़े, रक्त कोशिकाएं, तंत्रिका तंत्र और गुर्दों समेत पूरे शरीर पर एंटीबॉडीज नकारात्मक असर डालती है।
  • सूजन आंत्र रोग (आईबीडी)- जब एंटीबॉडीज़ का हमला, आँतों की परत पर होता है, तो इसके कारण, उलटी, दस्त, मलाशय से रक्तस्राव, पेट में दर्द, कमज़ोरी, वजन कम होना और बुखार जैसी समस्याएं आए दिन होने लगती हैं।
  • टाइप 1 डायबिटीज मेलेटस- जब एंटीबॉडीज़, इन्सुलिन का निर्माण करने वाले पेन्क्रियाज यानी अग्नाशय की कोशिकाओं पर आक्रमण कर उन्हें नुकसान पहुँचा देती हैं, तो अग्नाशय इन्सुलिन नहीं बना पाता और इसके कारण टाइप 1 डायबिटीज की समस्या उत्पन्न होती है।
  • सोरायसिस- यह भी एक ऑटोइम्यून डिज़ीज़ है। इसमें इम्यून सिस्ट की अतिसक्रियता के चलते किसी एक स्थान की त्वचा का निर्माण उससे कहीं ज़्यादा तेजी से होता है, जितना कि नई त्वचा बनने में आम तौर पर लगना चाहिए। इससे त्वचा, फ़टी हुई, खुरदरी हो जाती है।
  • ग्रेव रोग (Graves’ disease)- जब ऑटोएंटीबॉडीज़ थाइरोइड ग्रंथि पर आक्रमण करती है, तो वह भी अतिसक्रिय हो जाती है और ज़रूरत से ज़्यादा मात्रा में हार्मोन का निर्माण करने लगती है। इसके बाद आंखों में उभार, अचानक से वजन कम होने लग जाना, घबराहट, चिड़चिड़ापन, दिल की धड़कन अचानक बढ़ जाना, कमजोरी और बालों का अत्यधिक रूखापन जैसे लक्षण नज़र आते हैं।

इनके अलावा, हाशिमोटो थायरायराइटिस, मियासथीनिया ग्रेविस, वाहिकाशोथ (Vasculitis) भी ऐसी ही बीमारियां हैं, जो ऑटोइम्यून डिज़ीज़ की सूची में शामिल हैं। इनके अलावा, भी इन बीमारियों की एक लंबी सूची है, जिसे एक लेख में शामिल नहीं किया जा सकता।

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