प्रतिरक्षा प्रणाली विकार की रोकथाम

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15th March, 2018

प्रतिरक्षा प्रणाली विकार उस समस्या को कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति के शरीर की रोग प्रति रोधक क्षमता यानी इम्यून सिस्टम बाहरी और हानिकारक तत्वों पर आक्रमण करने के बजाय, शरीर की ही स्वस्थ कोशिकाओं और उत्तकों पर आक्रमण करना शुरू कर देती है। इस स्थिति में, न ही तो शरीर संक्रमण से मुक्त हो पाता है और न ही अपनी स्वस्थ कोशिकाओं और उत्तकों को नष्ट होने से बचा पाता है।

हालाँकि ऑटोइम्यून डिज़ीज़ यानी इस प्रतिरक्षा प्रणाली के विकार के पीछे असल वजह क्या होती है इसकी संपूर्ण और सटीक जानकारी चिकित्सा जगत के पास है और न ही इसका उपचार। उदाहरण के तौर पर, सोरायसिस एक ऐसी ही समस्या है, जो शरीर की एंटीबॉडीज़ की हानिकारक और शरीर की कोशिकाओं में फर्क न कर पाने के कारण पनपती है और इसका कोई उपचार भी डॉक्टर के पास नहीं है।

इस स्थिति में, इस समस्या को होने से रोकने की कोशिश ही सबसे बेहतर उपचार कहा जा सकता है। दरअसल यह बिमारी दो कारकों पर निर्भर करती है: एक तो जन्मजात और दूसरा पर्यावरणीय कारक। वहीं आनुवंशिकता से अधिक योगदान पर्यावरणीय कारकों का ही माना जाता है।

ऑटोइम्यून विकार के पीछे निम्न पर्यावरणीय कारकों का बड़ा योगदान रहता है-

  1. छिद्रयुक्त आंत: यानी आँतों में छेद होना।
  2. दूषित और पोषण-रहित खान-पान।
  3. तनाव
  4. संक्रमण
  5. जहरीले और हानिकारक पदार्थ

रोकथाम और सावधानियां-

  • यदि आपको लगता है कि आपको यह बिमारी होने की आशंका है, या हो गई है या फिर जाँच के बाद डॉक्टर ने बताया है कि आपको प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी समस्या है तो एल्कोहॉल और सिगरेट का सेवन एक दम बंद कर देना चाहिए।
  • पैकेट वाले यानी डब्बाबंद चीजों का सेवन न करें।
  • ताज़ी सब्जियों, फलों का अधिक से अधिक सेवन करें।
  • खूब सारा पानी पियें।

इनके अलावा, ऐसी चीजों और फलों का सेवन अवश्य करें, जो शरीर की रोग प्रति रोधक क्षमता को बनाए रखने में मददगार हो जैसे: विटामिन सी से भरपूर आहार, फल और सब्जियां।

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