व्यस्कों में बेडवेटिंग की जांच

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23rd June, 2016

Vyaskon mein bedwetting ki janch ke prakar | वयस्कों में बेडवेटिंग के प्रकार | Diagnosis types for bedwetting in adultsव्यस्कों द्वारा सोते हुए बिस्तर पर पेशाब करना (मूत्र असंयम) या नॉक्टरल न्यूरेसिस एक गंभीर समस्या है। 4-5 वर्ष की उम्र तक बच्चों में मूत्राशय पर नियंत्रण बढ़ जाता है, जो 10 वर्ष की उम्र तक 95 प्रतिशत बच्चों में हो जाता है। हालांकि, कुछ प्रतिशत किशोरों और 1 से कम प्रतिशत वयस्कों में बेडवेटिंग की समस्या हो जाती है। बड़ो में यह समस्या शर्म और एकांकीपन का कारण बन सकती है। नॉक्टरल न्यूरेसिस की सही जांच से समस्या के कारण का पता लगाकर प्रभावी इलाज किया जा सकता है।

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डॉक्टर को समस्या को बेहतर तरीके से समझाने के लिए और बेडवेटिंग के कारण समझने में मदद करने के लिए पीड़ित को कुछ बातों का रिकॉर्ड रखना चाहिए। उदाहरण के तौर पर; व्यक्ति दिन और रात में कब-कब सबसे ज़्यादा बेडवेटिंग करता है। एक बार में लगभग कितना यूरिन निकलता है और क्या यूरिन की मात्रा दिन और रात में बदलती है। दिन में व्यक्ति कितना पानी पीता है और औसतन अन्य तरल पदार्थो को कितनी मात्रा में लेता है। किस प्रकार के तरल पदार्थों का सेवन किया जाता और क्या उनमे कैफीन, अल्कोहोल की कितनी मात्रा है। बेडवेटिंग की फ्रीक्वेंसी कितनी है और कहीं व्यक्ति को मूत्राशय में संक्रमण तो नहीं। टॉयलेट जाने पर यूरिन स्ट्रीम तेज़, मध्यम या मंद कैसी है। क्या आप किसी तरह के अवसाद, मानसिक तनाव या बेचैनी के शिकार तो नहीं आदि। इन बातों को जानने के बाद डॉक्टर के लिए बेडवेटिंग की समस्या के लिए टेस्ट बताना आसान हो जाता है।

वयस्कों में बेडवेटिंग की जांच के लिए किये जाने वाले मुख्य टेस्ट निम्न हैं-

फिजिकल एग्जाम – शारीरिक जाँच, में व्यक्ति के बाहरी अवलोकन से उसके आंतरिक विकारों को समझने की कोशिश की जाती है। यह बेडवेटिंग की समस्या से पीड़ित व्यक्ति या बच्चे की शुरुआती जांच होती है। इलाज से पहले पेडियाट्रिक और न्यूरोलॉजिकल एग्जाम होना ज़रूरी है। रक्तचाप की जांच, बाहरी जननांग और रीढ़ की हड्डी की जांच फिजिकल एग्जाम का अहम हिस्सा है।

यूरोडायनामिक टेस्ट – इस टेस्ट में मूत्राशय, मूत्रमार्ग, नलियों की जांच से यह पता किया जाता है कि कितना यूरिन बन रहा है और मूत्राशय की कितनी क्षमता है। इस टेस्ट में सामान्य रीडिंग से लेकर यंत्रो के प्रयोग से पेशाब की मात्रा, निकलने में लगने वाले समय, प्रेशर मॉनिटर की मदद से मूत्राशय का दबाव नापना, इमेजिंग टेस्ट द्वारा आंतरिक अंगो की जांच आदि की जाती है।

किडनी और मूत्राशय अल्ट्रासाउंड – मूत्राशय प्रणाली के 2 अहम अंगो की जांच के लिए उनका अल्ट्रासाउंड किया जाता है। अल्ट्रासाउंड की मदद से अंगो में विकार, संक्रमण और अनियमितता को देखा जाता है। इन परिणामों के हिसाब से पीड़ित का इलाज किया जाता है।

इन टेस्ट के अलावा मूत्र की जांच कर उसमे ग्लूकोज़ की मात्रा, अन्य अशुद्धियां देख कर स्लीप न्यूरेसिस के कारण को पहचाना जा सकता है।



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