वयस्कों में बेडवेटिंग का इलाज

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24th June, 2016

Vyaskon mein bedwetting ko kaise roken? | वयस्कों में बेडवेटिंग को कैसे रोकें | How to stop bedwetting in adultsनींद में बिस्तर पर पेशाब करने को स्लीप न्यूरेसिस या बेडवेटिंग कहा जाता है। 7 साल से कम उम्र के बच्चों में ऐसा होना बढ़ते हुए मूत्राशय का लक्षण होता है। वहीं किसी किशोरों या वयस्कों में स्लीप न्यूरेसिस किसी बीमारी, मानसिक परेशानी या यूरिनरी सिस्टम के किसी विकार की वजह से हो सकता है। डॉक्टर द्वारा लक्षणों की विस्तार से जांच करने के बाद ही व्यक्ति को स्लीप न्यूरेसिस समस्या होने के कारणों का पता चलता है। यह जानने के बाद अपनी शारीरिक स्थिति और मेडिकल हिस्ट्री के अनुसार डॉक्टर से सलाह लेकर ही कोई उपचार शुरू करना चाहिए।

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वयस्कों में स्लीप न्यूरेसिस का इलाज निम्न तरीकों से किया जाता है-

डेस्मोप्रेसिन एसीटेट- डीडीएवीपी (डेस्मोप्रेसिन) टेबलेट्स एंटीडाइयूरेटिक हॉर्मोन (जो यूरिन का बनना कम करता है) का सिंथेटिक विकल्प होती हैं। आमतौर पर डेस्मोप्रेसिन को डीडीएवीपी या डेस्मोप्रेसिन एसीटेट के रूप में लिया जाता है। वह व्यक्ति जो डीडीएवीपी लेते हैं, उनमे प्लेसिबो लेने वाले पीड़ितों से 4.5 गुना बेहतर परिणाम पाये जाते हैं। इस दवा के असर से एक रात के लिए बिना साइड इफेक्ट् के हॉर्मोन की पूर्ती हो जाती है। डेस्मोप्रेसिन नेज़ल स्प्रे के स्वास्थ्य पर कुछ नकारात्मक असर होने की वजह से नेज़ल स्प्रे की जगह टेबलेट के रूप में डीडीएवीपी लेने की सलाह दी जाती है। नॉक्टरल पॉलीयूरिया (व्यक्ति के मूत्राशय की क्षमता से 130 प्रतिशत अधिक मूत्र बनना) की स्थिति में डेस्मोप्रेसिन का प्रयोग फायदेमंद है।

ट्राईसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट- डॉक्टरी प्रेस्क्रिप्शन पर मिलने वाली ट्राईसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट दवाएं जैसे एमीट्रिपटाईलाइन, इमीप्रामाइन और नोर्ट्रिपटायलाइन में एंटी-मस्कारिनिक गुण होते हैं। यह गुण बेडवेटिंग के इलाज में कारगर होते हैं। हालांकि, इनकी ओवरडोज़ के शरीर पर घातक परिणाम हो सकते हैं।

कंटीन्युअस एयरवे प्रेशर थेरेपी- स्लीप एपनिया से पीड़ित कुछ लोगो में न्यूरेसिस की समस्या हो जाती है। उनकी सांस लेने की प्रक्रिया को सामान्य करने के लिए कंटीन्युअस एयरवे प्रेशर थेरेपी का इस्तेमाल कर इन दोनों समस्याओं को कम या ख़त्म किया जा सकता है।

अगर बेडवेटिंग की समस्या कुछ ख़ास कारणों से हुई हो तो इन दवाओं के साथ या अलावा डीटीएच ब्लॉकिंग मेडिसिन (बढ़ी प्रोस्टेट ग्रंथी के लिए), एंटीबायोटिक (मूत्राशय संक्रमण के लिए) और एंटीक्लोनेर्जिक दवाएं (मूत्राशय संबंधी समस्याओं में) इस्तेमाल की जाती हैं। साथ ही एक्यूपंक्चर, मॉइश्चर अलार्म, स्पेशल कपड़ो के इस्तेमाल से दिनचर्या को सामान्य बनाया जा सकता है।

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