CMV जाँच- संभल कर रहें गर्भवती महिलाऐं

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15th March, 2018

सीएमवी (CMV) संक्रमण की पूरी जानकारी हम अपने पहले लेखों में दे चुके हैं, साथ ही इसके लक्षण भी बताए हैं। यदि किसी व्यक्ति में इस संक्रमण के संकेत नज़र आते हैं तो इसके लिए कौन-कौन सी जाँचें हैं, जो की जाती हैं और उनके नतीजे क्या-क्या हो सकते हैं, यह जानकारी हम अपने इस लेख में देने जा रहें हैं।

दरअसल सीएमवी एक ऐसा संक्रमण होता है, जो दुनियाभर में बेहद बड़े पैमाने पर फ़ैला हुआ है। हालाँकि आम तौर पर, यह घातक या जानलेवा नहीं होता, लेकिन कुछ मामलों में, जैसे नवजात शिशुओं और कमज़ोर व्यक्तियों, या जिन्होंने कोई अंग प्रत्यारोपण कराया हो उनके लिए यह वास्तव में घातक हो सकता है। चलिए देखते हैं, सीएमवी की जाँच किन-किन तरीकों से की जाती है।

सीएमवी की जाँच

दरअसल सीएमवी संक्रमण, शरीर के तरल में मौजूद रहता है, फिर चाहे वह लार हो, मूत्र हो, पसीना या रक्त। इसलिए जाँच भी इन्हीं जाँच के नमूनों के आधार पर की जाती है। यदि किसी व्यक्ति को यह संक्रमण है, तो जाँच में उसके शरीर के तरल में इसके वायरस पाए जा सकते हैं।

यदि सीएमवी जाँच में वायरस की पुष्टि हो जाती है, तो इसके एक बार उपचार के बाद भी व्यक्ति को थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद डॉक्टर के पास जाना होता है। ताकि शरीर की इम्युनिटी थोड़ी बहुत ऊपर नीचे होने पर यह शरीर को नुकसान न पहुँचा पाए।

गर्भवती महिलाओं और उसके होने वाले बच्चे के लिए बेहद महत्वपूर्ण है यह जाँच-

यदि कोई महिला गर्भवती है, तो उसकी जाँच इस वायरस के लिए भी की जाती है। यदि महिला के शरीर में यह वायरस गर्भावस्था के पहले से मौजूद हो तो गर्भावस्था के दौरान, जाँच के बाद इसे सक्रीय होने से रोका जाना चाहिए। इससे बच्चे पर वायरस के असर की आशंका कम हो जाती है।

यदि गर्भावस्था के दौरान, महिला के शरीर में CMV इंफैक्शन होने की पुष्टि होती है, तो इसके बाद डॉक्टर एक प्रेंटल टेस्ट जिसे एम्निओसेंटेसिस (Amniocentesis) कहा जाता है, की जाती है। इस जाँच के द्वारा यह पता लगाया जाता है कि कहीं बच्चा भी इस वायरस से प्रभावित तो नहीं हो गया है।

वहीं यह जाँच तब भी की जा सकती है, यदि अल्ट्रासाउंड के दौरान, बच्चे में वह लक्षण नज़र आ रहें हैं, जो सीएमवी वायरस के कारण होते हैं। यदि इस जाँच के बाद बच्चे में सीएमवी संक्रमण पाया जाता है, तो जन्म के बाद, तीन हफ़्तों से पहले दोबारा बच्चे की सीएमवी की जाँच की जाती है। यदि इस दौरान, भी बच्चे के शरीर में सीएमवी वायरस मौजूद हो तो फिर बच्चे के महत्वपूर्ण अंगों, जैसे गुर्दों और फेफड़ो की जाँच भी की जाती है।

गर्भवती महिलाओं में, सीएमवी वायरस की पुष्टि होने के बाद, डॉक्टर लगातार महिला की इम्युनिटी पर नज़र रखते हैं। ताकि इम्युनिटी कमज़ोर होने की सूरत में यह वायरस एक्टिव न हो जाए।

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