ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी से होने वाली बीमारियाँ

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23rd December, 2015

Omega-3 Fatty Acids ki Kami se hone wali Bimariyan | ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी से होने वाली बीमारियाँ | Omega-3 Fatty Acids Deficiency Diseasesओमेगा-3 फैटी एसिड, अकेला ऐसा फैट है, जो शरीर के हार्मोन्स में बदलाव कर भूख को कम कर देता है,  और डाइटिंग करने में भी मददगार होता है। ऐसे दो मुख्य ओमेगा 3 फैट्स, EPA (इकोसापैनटोइनिक एसिड) और DHA (डोकोसैक्सिनोइक एसिड) हैं, जो कुछ प्रकार की मछलियों में पाये जाते हैं। ALA (अल्फा-लिनोलेनिक एसिड), एक और प्रकार का ओमेगा 3 फैट्स है, जो पौधों जैसे- बादाम इत्यादि में पाया जाता है। शाकाहारी लोगों के लिए अलसी ओमेगा-3 एसिड का सबसे अच्छा स्रोत होता है, जबकि मांसाहारियों को यह मछली के सेवन से मिल जाता है।

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ओमेगा-3 फैटी एसिड लेने से आपको निम्नलिखित बीमारियों में राहत मिलती हैं-

हृदय रोग-  ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन हार्ट अटैक के जोखिम को कम करता है। यह धमनियों के फैलने में सहायता करता है, जिससे उनमें रक्त प्रवाह ठीक ढंग से हो पाता है और एन्जाइम्स फैट को आसानी से शरीर में घुलने में सहायता करते हैं और उनका मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है। इससे जरूरत से अधिक चर्बी शरीर में जमा नहीं हो पाती।

उच्च ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर- ट्राइग्लिसराइड्स, रक्त में पायी जाने वाली वसा है। रक्त में इसकी अधिक मात्रा होने से, आपमें हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए मछलियों में पाया जाने वाला ओमेगा 3 फैटी एसिड लेने से, रक्त में ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम किया जा सकता है।  

रयूमेटायड आर्थराइटिस – EPA और DHA, ऐसे दो  ओमेगा 3 फैट्स हैं, जिन्हें लेने से हड्डियों की कठोरता और दर्द में राहत मिलती है।

डिप्रेशन- कुछ अध्यनों से यह पता चला है कि ओमेगा 3 फैट्स युक्त खाद्य पदार्थों को लेने से अवसाद या डिप्रेशन को कम किया जा सकता है। इनको  लेने से  डिप्रेशन की दवाइयाँ और अच्छे से काम करती है।

अस्थमा – अस्थमा के होने का मुख्य  कारण सूजन है। ऐसे खाद्य पदार्थ, जिनमे ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, उनको लेने से सूजन को कम किया जा सकता है।  

ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता विकार (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर- ADHD) – किसी चीज पर ध्यान न लगा पाना (ध्यानाभाव) एवं अतिसक्रियता विकार (ADHD), एक मानसिक विकार है, जो लाखों बच्चों को प्रभावित करती है, और अक्सर यह स्थिति व्यक्ति के वयस्क होने तक बनी रह सकती है। विश्व मे लगभग 3 से 5% बच्चे इससे पीड़ित पाये जाते हैं। ADHD के लक्षण, ध्यान की कमी या ध्यान ना देना, आवेगी व्यवहार, असावधानी और अतिसक्रियता हैं। अक्सर ADHD से ग्रस्त बच्चे हीन भावना, स्कूल में खराब प्रदर्शन, जैसी समस्याओं से जूझते रहते हैं। माना जाता है कि ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता विकार अनुवांशिक रूप से व्यक्ति मे आता है, लेकिन कुछ अध्ययनों से यह पता चला है कि ऐसे बच्चों को ओमेगा 3 फैट्स युक्त खाद्य पदार्थों को खिलाने से उसके दिमाग की स्थिति में सुधार आता है। उनकी सोचने याद रखने और पढ़ने की क्षमता में सुधार आता है, लेकिन अभी इस क्षेत्र में और अधिक रिसर्च की जरुरत है।  

अल्जाइमर रोग-  कुछ अध्ययनों से यह पता चला है कि ओमेगा 3 फैट्स युक्त खाद्य पदार्थों को लेने से अल्जाइमर रोग भी ठीक हो सकता है। यहाँ तक कि उम्र बढ़ने के साथ याद्दाश्त कम होने जैसी समस्या भी, ओमेगा 3 फैटी एसिड लेने से ठीक हो जाती है।

यहाँ तक कि बच्चों के सही विकास के लिए भी ओमेगा 3 फैटी एसिड बहुत जरुरी है। यदि बच्चों को ओमेगा 3 फैट्स युक्त खाद्य पदार्थों को दिया जाये तो उनमें दृष्टि और तंत्रिका संबंधी विकास बहुत अच्छे से होता है।

 



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