हेपेटाइटिस A और B से कैसे अलग है हेपेटाइटिस C?

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5th January, 2016

Hepatitis A, B aur C ke bich Anter | हेपेटाइटिस ए, बी और सी के बीच अंतर | Difference Between Hepatitis A, B and Cहेपेटाइटिस मुख्य रूप से लिवर में होने वाली बिमारी है और यह वायरस के द्वारा फैलती है। इस वायरस के कारण, लिवर की कोशिकाएं कमजोर होने लगती हैं, और धीरे धीरे उसमें सूजन भी आने लगती है। इससे हमारे शरीर में आहार के पाचन और पोषक तत्वों के अवशोषण में समस्या आनी शुरू हो जाती है।  

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हेपेटाइटिस कई प्रकार के होते हैं। इनमें हेपेटाइटिस C, हेपेटाइटिस A और B से अलग होता है। क्योकि हेपेटाइटिस A एवं B से बचाव के लिए वैक्सिन (टीका) उपलब्ध है। लेकिन हेपेटाइटिस C के लिए, कोई टीका उपलब्ध नहीं है।

हैपेटाइटिस A, आमतौर पर ख़राब पानी, एल्कोहल, दूषित आहार, के सेवन से फैलता है। अक्सर यह अपने आप ही ठीक हो जाता है। एक बार यह बिमारी होने के बाद, शरीर में इस वायरस के लिए एंटीबॉडी बन जाती है और भविष्य में आपको फिर से यह बिमारी होने का खतरा नहीं होता।

इसी तरह हेपेटाइटिस B मुख्य रूप से, ब्लड या शरीर के अन्य फ्लूइड जैसे- वीर्य और योनि स्राव, किसी अन्य स्वस्थ व्यक्ति के रक्त के सम्पर्क मे आने से फैलता है। उदाहरण के तौर पर, हेपेटाइटिस B से संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन सम्बन्ध के कारण और प्रसव के समय मां से बच्चे को फैल सकता है। यह बिमारी बडी असानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है। हेपेटाइटिस B में भी, हैपेटाइटिस-A की तरह ही, अपने आप खत्म होने की क्षमता होती है और उनके शरीर में इस वायरस के लिए एंटीबॉडी भी बन जाती है। लेकिन कुछ लोगों में यह संक्रमण स्थायी (क्रोनिक) रुप में भी रह सकता है। लेकिन सही से इलाज होने पर इस वायरस के प्रभाव से बचा जा सकता है। आप हेपेटाइटिस – A एवं B दोनों से, टिकाकरण द्वारा बच सकते हैं। लेकिन अभी तक हेपेटाइटिस- C का टिका उपलब्ध नहीं है।

क्योकि:-

  • हेपेटाइटिस C का वायरस अपना रूप बार-बार बदल लेता है। शुरुआत में इसके छह आनुवंशिक रूप से अलग-अलग रूप (जीनोटाइप) थे। अब इसके लगभग 50 सबटाइप हैं। यह जगह के अनुरूप अपना रूप बदल लेता है। जैसे:- हेपेटाइटिस C टाइप 1, मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में पाये जाते हैं। भारत में टाइप 3 पाया जाता है।  
  • अक्सर हेपेटाइटिस C की पहचान करने में काफी साल लग जाते हैं। यहाँ तक कि जब रोगी  किसी और बिमारी के लिए अपनी जाँच करते है, तब आपको पता चलता है कि आप इस बिमारी से पीड़ित है। इस बिमारी के लिए कोई मार्कर नहीं है, जिस कारण इसका टीका नहीं बन पाया।



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