पोलियो में जरुरी है बचाव की जानकारी

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12th October, 2015

Polio se Bachav ki Jankari hona Avashyak kyun hai? | पोलियो से बचाव की जानकारी होना आवश्यक क्यों है? । Why it is important to have Informationto Cure Polio?बच्चों को पोलियो से बचाने और इस से लड़ने के लिए माता-पिताओं को इसकी उचित जानकारी होनी आवश्यक है। यदि इसकी रोकथाम की जानकारी उनके पास होगी, तो अपने बच्चों को इस बिमारी से दूर रख पाना आसान होगा।

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पोलियो ड्रॉप्स

शुरुआत में डॉक्टर भी इसे पहचान नहीं पाते हैं। बच्‍चों में पोलियों के वायरस से बचने के लिए किसी प्रकार की प्रतिरोधक क्षमता नहीं होती है। इसी कारण यह बच्‍चों के शरीर में जड़ जमाने में कामयाब हो जाता है। इसीलिए पोलियो वायरस से बचने के लिए और इसके विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता उत्‍पन्‍न करने के लिए ‘नियमित टीकाकरण कार्यक्रम’ व ‘पल्‍स पोलियो अभियान के अंतर्गत पोलियों वैक्‍सीन की खुराकें दी जाती है। ये सभी खुराके पांच साल से कम उम्र के सभी बच्‍चों के लिये अत्‍यन्‍त आवश्‍यक हैं।

आज देश के सभी अस्पताल, स्वास्थ्य केन्द्रों और घर-घर जाकर भी पोलियो की खुराक बच्चों को दी जाती है। बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने के 30 मिनट पहले और 30 मिनट बाद तक कुछ नही खिलाना-पिलाना चाहिए। कई बार लोगों का मन में ये सवाल उठता है कि क्यों बार बार पोलियो की खुराक देना आवश्यक है?

इसका उत्तर यह है कि बार-बार और एक साथ खुराक पिलाने से पूरे क्षेत्र के पांच वर्ष तक की आयु के सभी बच्‍चों में इस बीमारी से लडने की छमता एक साथ बढती है, और इससे पोलियो वायरस को किसी भी बच्‍चे के शरीर में पनपने की जगह नहीं मिलती, जिससे पोलियो का खात्‍मा हो सकता है।

इसके आलावा कुछ घरेलू उपचार भी हैं, जो आपके बच्चें को पोलियो से दूर रख सकते है। इन्ही के बारे में आपको नीचें बताया जा रहा है-

लहसुन
अपने बच्चों के आहार में लहसुन को शामिल करने से पोलियो को दूर रखा जा सकता है। लहसुन खाने वालों को पोलियो कभी नहीं होता है। 2 या 4 लहसुन की कच्ची कलियों को पोलियो होने पर सुबह के समय खाली पेट पानी के साथ खाने से पोलियो रोग पास भी नहीं फटकता है।

कलौंजी या निगेल्ला के बीज
पोलियो से ग्रस्तं रोगी को आधा कप गर्म पानी में 1 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट और रात में भोजन के बाद सोते समय दें। इससे आपके बच्चों में प्राकृतिक रूप से पोलियो से लड़ने की छमता पैदा हो जाती है।

पीपल
पोलियों के रोग मे पीपल के 2-2 ताजे पत्तों को इतने ही लिसोढ़े के पत्तों के साथ पीसकर, छान में नमक के साथ रोजाना लेने से जल्दी लाभ होता है।



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