एड़ी के ऊपरी हिस्से में दर्द को बढ़ावा देने वाले कारक

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12th April, 2016

Edi Ke Upari Hisse Mein Dard Ko Badhava Dene Wale Jokim Kaarak | एड़ी के ऊपरी भाग में दर्द को बढ़ावा देने वाले जोखिम कारक | Risk Factors For Pain In The Upper Part of The Heelस्नायुजाल या अकिलीज़ टेंडन, पैरों के पिछले हस्से में पिंडली की पेशियों को एड़ी की हड्डी से जोड़ने वाला संयोजी ऊतकों का समूह होता है। इसके सामान्य से अधिक उपयोग होने पर और कुछ अन्य कारणों से इसमें कई समस्याएं हो जाती हैं, जिसके परिणाम स्वरूप हल्के से लेकर काफी तेज दर्द हो सकता है। कुछ व्यक्तियों को तो इस समस्या के कारण, पैर नीचे रखना तक मुश्किल हो जाता है। यह समस्याएं, आमतौर स्नायुजाल में माइक्रोटियर्स (अतिसूक्ष्म चोटें), टियर्स या रप्चर (टूट-फुट) के कारण होती हैं। कुछ ऐसे कारक होतें हैं, जो इन समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। यदि हम उन जोखिम कारकों से परिचित हो जाएँ तो स्नायुजाल में होने वाली समस्याओं के खतरे को कम कर सकते हैं।

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स्नायुजाल में होने वाली समस्याओं के लिए जोख़िम कारक :

निम्नलिखित कारणों से अकिलीज़ टेंडन अर्थात स्नायुजाल या एड़ी के ऊपर के हिस्से में परेशानियां हो सकती हैं-

  • स्पोर्ट्स या शारीरिक गतिविधियाँ – स्पोर्ट्स और शारीरिक गतिविधियाँ, जिनमें पैर की एड़ी वाले हिस्से का ज्यादा और बार-बार प्रयोग होता हो, स्नायुजाल में क्षति हो सकती है और वह कमजोर  हो सकते हैं। कंस्ट्रक्शन साइट पर या भारी घरेलू और कृषि कार्य करने वाले लोगों में इसके होने का खतरा ज्यादा होता है।
  • शारीरिक गतिविधि में अचानक परिवर्तन- बिना वार्मअप के अचानक दौड़ने लगने या इस प्रकार की गतिविधि में शामिल हो जाने, पर भी इसका जोखिम बढ़ सकता है। किसी गतिविधि या स्पोर्ट्स ट्रेनिंग इत्यादि के पैटर्न में अचानक बदलाव आने या गतिविधि की सीमा, समय या दूरी  अचानक से बढ़ा देने पर, अथवा अचानक उबड़-खाबड़ जमीन पर दौड़ने पर भी, स्नायुजाल में दर्द होने के खतरा बढ़ जाता है।
  • उम्र – उम्र बढ़ने के साथ-साथ, स्नायुजाल में रक्त के प्रवाह में कमी होने लगती है, इसीलिए अक्सर 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अकिलीज़ टेन्डिनोपैथी की समस्या बढ़ जाती है।
  • लिंग- यह समस्याएं, ज्यादातर पुरुषों में देखने को मिलती है।
  • जूते – अकिलीज़ टेंडन की समस्याएं होने का ख़तरा तब अधिक होता है, जब पुराने घिसे हुए, अनफिट जूते पहने हों या जब जूतों की एड़ी गद्दीदार न हो।

अकिलीज़ टेंडन में दर्द होने के अन्य जोखिम कारक –

  • पहले से चोट – अकिलीज़ टेंडन में पहले से ही चोट होने पर, रप्चर का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।
  • कर्टिकोस्टेरॉइड  (Corticosteroid) इंजेक्शन- यदि अकिलीज़ टेंडन में कर्टिकोस्टेरॉइड  (Corticosteroid) इंजेक्शन लगाया गया हो तो यह टेंडन को कमजोर बना देता है।
  • प्रतिजैविक दवाएं – लम्बे समय तक क्विनॉलोन एंटीबायटिक दवाइयों जैसे: सिप्रोफ्लोक्सासिन और ओफ़्लॉक्सासिन के उपयोग से, इसका जोखिम बढ़ जाता है।
  • कुछ अन्य परेशानियाँ – कुछ परेशानियों जैसे ऑस्टिओआर्थरिटिस, गॉट, रूमटॉइड आर्थराइटिस, सोरायसिस और हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त व्यक्तियों में स्नायुजाल की समस्याओं का जोखिम ज्यादा होता है।

इन सभी के अलावा तम्बाकू या उससे बने उत्पादों का प्रयोग करने से रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती है। जिससे स्नायुजाल में रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है और स्नायुजाल में रप्चर हो सकता है। यदि इन सभी स्थितियों में व्यक्ति के द्वारा कुछ सीमा तक सावधानी बरती जाये तो स्नायुजाल की समस्या से बचा जा सकता है।



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