हेपेटाइटिस B होने के कारण  

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4th January, 2016

Hepatitis B Virus ke Sankraman ke Kaaran | हेपेटाइटिस B वायरस के संक्रमण के कारण | Causes and transmission of hepatitis Bहेपेटाइटिस B एक संक्रामक रोग है और यह हेपेटाइटिस B वायरस (HBV) द्वारा फैलता है। यदि यह संक्रमण पुराना हो जाए तो जिगर में सूजन, लिवर फेलियर, और सिरोसिस हो सकती है। हेपेटाइटिस B मुख्य रूप से ब्लड या शरीर के अन्य फ्लूड जैसे- वीर्य और योनि स्राव के संपर्क में आने से फैलता है। यह बिलकुल AIDS (HIV) जैसे ही फैलता है। लेकिन यह AIDS के वायरस जितना जल्दी नहीं फैलता।

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हेपेटाइटिस B वायरस का संक्रमण निम्नलिखित तरीकें से हो सकता है:-

  • हेपेटाइटिस B से संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन सम्बन्ध के कारण,  
  • हेपेटाइटिस B से संक्रमित सुई इस्तेमाल करने पर,
  • टैटू या कान, नाक छिदवाने में ऐसे उपकरणों का प्रयोग करने पर, जिन्हें स्टेरिलाइज़ (कीटाणु रहित) नहीं किया गया हो,
  • हेपेटाइटिस B संक्रमित व्यक्ति की चीजें जैसे- छुरा या टूथब्रश, इत्यादि को इस्तेमाल करने पर,
  • ब्लड ट्रांस्फ्यूज़न या ऑर्गन ट्रांसप्लांट के दौरान ठीक से जाँच ना होने पर, हेपेटाइटिस B का संक्रमण हो सकता है,

हेपेटाइटिस B संक्रमित माता, अपने बच्चें में भी इस बीमारी को स्थानांतरित कर सकती है। इसलिए गर्भावस्था में डॉक्टर, हेपेटाइटिस B की जाँच करने की सलाह देते हैं। ताकि यदि कोई महिला हेपेटाइटिस B वायरस से संक्रमित है, तो इंजेक्शन द्वारा इस वायरस को उसके होने वाले बच्चें में जाने से रोक जा सकें।

यदि किसी को हेपेटाइटिस का संक्रमण हुआ है और तीन महीनों के अंदर ही उसे इस बारे में पता चल गया है, तो वह समय पर अपना इलाज करा सकता है। डॉक्टर रोगी में हो रहे सुधार को देखने के लिए, उसका ब्लड टेस्ट करते हैं। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को हेपेटाइटिस का संक्रमण हुआ है और इसके कोई लक्षण नहीं दिखने की वजह से, इसे छः महीनों से ज्यादा का समय हो गया है तो वह व्यक्ति इस बीमारी का वाहक (carrier) हो जाता है, मतलब वह इस बीमारी को किसी और में भी स्थानांतरित कर सकता है।    .

जब यह बीमारी काफी लम्बे समय तक रहती है और क्रोनिक संक्रमण का रूप में लेती है तो इस अवस्था में यह लिवर पर अपना प्रभाव दिखाने लगती है। इससे लिवर में सूजन, लिवर फेलियर, और सिरोसिस हो सकता है। कुछ लोगों में तो यह लिवर कैंसर होने का कारण भी बन जाती है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति इस बीमारी का वाहक है, तो उसे रक्त, प्लाज्मा, शरीर का कोई अंग या टिश्यू, इत्यादि दान नहीं करना चाहिए।

यहाँ यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि बीमारी साधारण संपर्क जैसे- गले लगने, चुंबन, छींकने, खांसने, या भोजन या पेय पदार्थों को साझा करने से नहीं फैलता।



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