एडिनोवायरस संक्रमण एक अवलोकन

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18th May, 2016

Adenovirus Sankraman ke Tathye | एडिनोवायरस संक्रमण के तथ्य | Facts about Adenovirus Infectionमनुष्यों में जीवाणुओं से होने वाली बिमारियों के कारक, दो प्रकार के होते हैं। इनमें कीटाणु, जिन्हें विषाणु या वायरस के नाम से जाना जाता है। यह विषाणु अनेकों प्रकार के होते हैं। इन्हें वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न आधारों पर अनेक समूहों में बाँटा गया है। विषाणुओं के अनेक समूहों में से एक है, एडिनोवायरस।   

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एडिनोवायरस

एडिनोवायरस, विषाणुओं का एक ऐसा समूह है, जो श्वसन तंत्र, आंखों, आंतों, मूत्र नली, और तंत्रिका तंत्र की झिल्ली के उत्तकों को नुकसान पहुंचाता है। इस समूह के विषाणुओं की वजह से, 10 % बुखार, सम्बन्धित बिमारियां, बच्चों में श्वसन से सम्बन्धित तीव्र परेशानियाँ और कभी-कभी डायरिया भी हो जाता है।

एडिनोवायरल संक्रमण किसी को भी हो सकते हैं, लेकिन यह वयस्कों की अपेक्षा शिशुओं और छोटे बच्चों को ज्यादा प्रभावित करते हैं। सामान्यतः स्वस्थ वयस्क में संक्रमण हल्का होता है और एक सप्ताह में खुद-ब-खुद ठीक हो जाता है, परन्तु छोटे बच्चों, बुजुर्ग व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं अथवा उन लोगों में जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो, में एडिनोवायरस संक्रमण से गम्भीर समस्याएं हो सकती हैं। आमतौर पर चाइल्ड केयर सेंटर और स्कूलों में बच्चों को श्वसन सम्बन्धी संक्रमण अथवा डायरिया इसी एडिनोवायरस के कारण हो जाता है।

कब होता है संक्रमण?

यद्यपि एडिनोवायरस संक्रमण वर्ष में किसी भी समय में हो सकता है फिर इससे होने वाली कुछ समस्याएं निम्न समय पर अधिक होती हैं –

  • एडिनोवायरस से होने वाली श्वसन तंत्र की समस्या आमतौर पर शर्दियां के अंतिम समय में, बसंत ऋतु में, अथवा गर्मी के शुरुआत में होती है।
  • कंजेक्टिवाइटिस जिसे आँख आना भी कहते हैं या फरयंगोकजंक्टिवल (pharyngoconjunctival) बुखार जोकि बड़े बच्चों को इस विषाणु की वजह से होता है। आमतौर पर गर्मियों में होता है।

एडिनोवायरल संक्रमण सामान्यतः प्रत्येक बच्चे को 10 वर्ष की उम्र तक कम से कम एक बार अवश्य होता है। एडिनोवायरस अनेक प्रकार का होता है, इसलिए बच्चों में इसका संक्रमण बार-बार हो सकता है।



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