एडिनोवायरस संक्रमण से होने वाली बीमारियाँ

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6th April, 2016

Adenovirus sankraman se hone vali beemariyan kaun si hain? | एडिनोवायरस संक्रमण से होने वाली बीमारियाँ कौन सी हैं? | Which are the Disease caused by Adenovirus Infection?एडिनोवायरस अनेकों बिमारियों का कारक है। सामान्यतः इस वायरस के कारण बच्चों, कमजोर लोगों (जिनका रोग प्रतिरोधी तंत्र पर्याप्त शक्तिशाली नहीं होता है) और गर्भवती महिलाओं में बीमारियाँ आसानी से हो जाती हैं, परन्तु ऐसा नहीं है कि एडिनोवायरस का संक्रमण केवल बच्चों या कमजोर लोगों को ही हो सकता है। यह संक्रमण किसी भी व्यक्ति और पशुओं को भी हो  सकता है। हालाँकि स्वस्थ वयस्क व्यक्तियों में यह  ज्यादा गम्भीर समस्या नहीं उत्पन्न कर पाता है और लगभग एक सप्ताह में ठीक हो जाता है। जिन लोगों में इसके  कारण ज्यादा परेशानियाँ होती है उन्हें अनेक बीमारियाँ हो सकती है।

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एडिनोवायरस संक्रमण से होने वाली बीमारियाँ:

एडिनोवायरस संक्रमण के कारण निम्नलिखित बीमारियाँ हो सकती हैं –

  • ऊपरी श्वाँस नली के संक्रमण- जिसमें गले में ख़राश, खाँसी, साँस में परेशानी आदि होती है।   
  • नेत्रश्लेष्मलाशोथ (Conjunctivitis) – एडिनोवायरस के संक्रमण  के कारण बच्चों में अक्सर कंजंक्टिवाइटिस हो जाती है, जिसे आम भाषा में आँखें आना कहते हैं।
  • गलगुटिकाशोथ (tonsillitis) – जिसे गला खराब होना या टॉन्सिल फूलना भी कहते हैं और टॉन्सिल्स में दर्द भी होता है।
  • कंठ रोग – गले के रोग    
  • कान में संक्रमण
  • 40 और 41 टाइप के  एडिनोवायरस से आंत्रशोथ (Gastroenteritis) हो सकता है।
  • नेत्रश्लेष्मलाशोथ (आँखें आना)  और गलगुटिकाशोथ (टॉन्सिल फूलना) ये दोनों समस्याएं एक साथ हो सकती हैं।
  • कुछ बच्चों में विशेषकर छोटे बच्चों में एडिनोवायरस संक्रमण से श्वासनलिकाशोथ जिसे अंग्रेजी में ब्रोंकाइटिस कहते हैं या निमोनिया हो सकता है। ये दोनों के गंभीर हो सकती है।
  • बहुत छोटे बच्चों विशेषकर शिशुओं में एडिनो वायरस की वजह से खाँसी का दौरा आता है लगभग काली खांसी की तरह।
  • एडिनोवायरस संक्रमण के कारण मस्तिष्कावरण शोथ (वायरल मैनिंजाइटिस) या दिमागी बुखार हो सकता है।
  • कभी-कभी एडीनोवायरस संक्रमण से रक्तस्रावी मूत्राशयशोध ( hemorrhagic cystitis) हो जाता है। यह एक प्रकार का मूत्र-नली संक्रमण है इससे मूत्र में रक्त आने लगता है।

अधिकांश लोग एडिनोवायरस संक्रमण से स्वयं ठीक हो जाते हैं, लेकिन जिन लोगों में रोग प्रति रोधक क्षमता कम होती है, वे इससे ठीक नहीं हो पाते हैं और इस संक्रमण से कई बार मृत्यु हो जाती है। ये भी होता है कि किसी स्वस्थ व्यक्ति को एडिनोवायरस का संक्रमण हो जाता है जिससे यदि स्थिति गम्भीर होती है तो व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है।  



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