कैसे फैलता है हैजा या कॉलेरा?

भाषा चयन करे

20th May, 2016

Kya mausam ki pahli baarish nuksan dayak hai? | क्या पहली बारिश नुक्सानदायक है? | Is first rain harmful?हैजा अथवा कॉलेरा एक ख़तरनाक एवं जान लेवा रोग है। इसमें व्यक्ति को पानी जैसी उल्टियाँ एवं दस्त  होने लगते हैं। इस रोग में व्यक्ति के शरीर में उल्टी और दस्त ज्यादा होने पर शरीर में गम्भीर रूप से पानी की कमी हो जाती है और यह जीवन के लिए खतरा पैदा कर सकती है। आम तौर पर, पानी की कमी होने पर व्यक्ति की नाड़ी गति अर्थात रक्त संचार  धीमा हो जाता है, पेट में तेज दर्द और हृदय गति बढ़ जाती है, त्वचा का लचीलापन कम हो जाता है अर्थात चमड़ी खींचने पर वह वापस अपनी सामान्य स्थिति में नहीं पाती है, ऑंखें सूख जाती हैं, रोगी निढाल, थका-थका सा कमजोर व शक्तिहीन हो जाता है, उसे प्यास ज्यादा लगती है, पेशाब कम आता है व बेहोशी आने लगती है।

Image Source

क्यों होता है हैजा?

हैजा अथवा कॉलेरा, विब्रियो कोलेरी (Vibrio cholera) नामक बैक्टीरिया से होता है। यह बैक्टीरिया कॉलेरा से प्रभावित व्यक्ति के पेट (मल या उल्टी) में पाया जाता है।

यह संक्रमण निम्न प्रकार से फैलता है-

  • यदि कोई रोगी खुले में उल्टी या मल त्याग करता है, तो मक्खियाँ उस पर बैठती हैं जिससे बैक्टीरिया उनके पैरों में चिपक जाते हैं। जब ये मक्खियाँ खाने-पीने वाले पदार्थों पर बैठती हैं, तो बैक्टीरिया उन पर छूट जाता है। इससे ये खाद्य या पेय पदार्थ संक्रमित हो जाते हैं और इनका उपयोग करने से व्यक्ति कॉलरा से पीड़ित हो जाता है।  
  • कई जगहों पर सीवेज पाइप्स सीधे कुछ पानी के स्रोतों में छोड़ दिए जाते हैं। जिससे वह पानी संक्रमित हो जाता है। इस प्रकार का पानी यदि किसी क्षेत्र में सप्लाई किया जाता है तो उस क्षेत्र में लोगों के द्वारा इस पानी का इस्तेमाल जाता है। इससे वहाँ भी हैजा फैल जाता है।
  • इस बैक्टीरिया का संक्रमण, नगर पालिकाओं आदि द्वारा सप्लाई किया जाने वाले पानी, कोल्ड स्टोरेज की बर्फ या बाजार की इस प्रकार के पानी से बनाई जाने वाली बर्फ, फेरी लगाकर गलियों अथवा सड़कों पर खाद्य या पेय पदार्थ बेचने वालों की सामानों में, गंदे पानी में पैदा की गई सब्जियों में, गंदे पानी में पैदा हुई मछलियों को कच्चा या अध-कच्चा खाने से भी हो सकता है।

जब व्यक्ति के द्वारा इस इस रोगाणु से दूषित खाद्य अथवा पेय पदार्थ उपयोग किये जाते हैं, तो यह रोगाणु आँत में जाकर एक प्रकार का विषैला पदार्थ छोड़ता है। यह विषैला पदार्थ पेट की श्लेष्मिक झिल्ली को नुकसान पहुंचाता है। इससे गम्भीर उल्टी और दश्त होने लगते हैं।



अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे !





अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे !