खसरे की प्राकर्तिक देखभाल और उपचार

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4th October, 2016

Khasre ka gharelu upchar | खसरे का घरेलू उपचार | Home Remedies for khasraखसरा यानी मीजल्स जो एक विषाणु से फैलता है, एक संक्रामक रोग है। इसलिए इसका उपचार भी इसकी संक्रामकता को ध्यान में रखते हुए ही करना चाहिए। सबसे पहली बात तो जिसे भी खसरा हो उसे और उसके परिवार वालों को घबराना नहीं चाहिए। क्योंकि घबराहट किसी भी समस्या को और बढ़ा देती है, कम नहीं करती। दूसरी बात इस बिमारी से बचने और उबरने दोनों के लिए ही व्यक्ति को इसकी जानकारी होना आवश्यक है। वह जानकारी का अभाव ही होता है जिसके कारण कोई भी बिमारी, व्यक्ति के शरीर में अपनी जड़े जमा पाती है।

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  • परिवार में से किसी को भी खसरा होने पर रोगी और उसके परिवारजनों को सहज रहना चाहिए, हड़बड़ा नहीं जाना चाहिए
  • रोगी खूब आराम करे और इधर-उधर ना घूमे और न ही कोई काम करे
  • किसी न किसी पोष्टिक पेय पदार्थ जैसे, जूस, हर्बल टी और सूप का सेवन करता रहे
  • थोड़ी-थोड़ी देर में पानी की एक-एक घूट भरता रहे
  • मस्तिष्क को भी आराम दें कुछ न कुछ सोचते ना रहें और रिलेक्स रहें, विश्वास रखें की यह रोग जल्द ही आपके शरीर से निकल जाएगा

खसरा होने पर क्या-क्या आहार लें?

  • फलों का रस, निम्बू पानी,
  • हल्का और तरल आहार जैसे दलिया, सूप,  
  • मिर्च-मसाला, बासी भोजन, मिठाइयां न लें
  • नमक का सेवन कम से कम करें
  • हरी सब्जियां खाएं

खसरे के लिए अन्य घरेलू उपचार

  • रोगी के कमरे को अच्छे से साफ़ रखें वहां गंदगी बिलकुल नहीं होनी चाहिए
  • रोगी का कमरा खुला और हवादार होना चाहिए वहां उचित रौशनी और सूर्य की किरणें आती हों,
  • पूरे कमरे में नीम की टहनियां जरूरी होनी चाहिए
  • रोगी के सिरहाने और पैरों की तरफ भी नीम की पत्तियां रखें
  • रोगी के हाथ पैर नीम के पानी से धोएं
  • उसके पेट और छाती पर गीली मिट्टी की पट्टी रखें
  • नीम के पानी से नहलाएं  
  • रोगी की आँखों को टी बैग से सेकें
  • रोगी के शरीर में गर्मी बनाए रखने के लिए उसके पास गुनगुने पानी की बोतल रखें

नीम खसरे में बहुत फायदेमंद होता है और यह इस रोग के विषाणुओं का दुश्मन है जो उन्हें बहुत जल्दी खत्म कर देता है।

कुछ घरेलू औषधियां जो खसरे में लाभप्रद हैं

  • मुलेठी पाउडर को शहद में मिला कर रख लें और थोड़े-थोड़े अंतराल पर रोगी को चटाते रहें
  • लौंग को पीसकर शहद के मिला कर रखें और इसे भी रोगी को दिन में 3-4 बार चटाएं
  • रात को सोने से पहले हल्दी और शहद चटाएं



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