हैजे का मेडिकल ट्रीटमेंट

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6th June, 2016

Haije ka Medical Treatment kya hai? | हैजे का मेडिकल ट्रीटमेंट क्या है? | What is the Medical Treatment for Cholera?हैजा, जिसे सामान्यतः उसके अंग्रेजी नाम कॉलेरा से भी  जाना जाता है, एक ख़तरनाक संक्रामक बीमारी है। यह बीमारी आमतौर पर गन्दी बस्तियों एवं ऐसे क्षेत्रों में प्रतिवर्ष फ़ैल जाती है, जहाँ पीने के साफ पानी की व्यवस्था नहीं होती। यह बीमारी, विब्रियो कोलेरी नामक रोगाणु (बैक्टीरिया) से होती है। यह रोगाणु व्यक्ति के मल एवं उल्टी में पाया जाता है।

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जब कोई व्यक्ति इस रोगाणु से दूषित खाद्य या पेय पदार्थों का सेवन कर लेता है, तो उसे यह बीमारी हो जाती है। इस स्थिति में, व्यक्ति को पानी जैसी उल्टी एवं दस्त होने लगते हैं। उल्टी और दस्त ज्यादा होने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है। आम तौर पर, पानी की कमी होने पर व्यक्ति की नाड़ी गति अर्थात रक्त संचार धीमा हो जाता है, पेट में तेज दर्द, होने के साथ-साथ, हृदय गति बढ़ जाती है, त्वचा का लचीलापन कम हो जाता है, ऑंखें सूख जाती हैं, रोगी निढाल, थका-थका सा कमजोर व शक्तिहीन हो जाता है, उसे प्यास ज्यादा लगती है, पेशाब कम आता है व बेहोशी आने लगती है। कॉलेरा एक आकस्मिक चिकित्सा की स्थिति होती है इसलिए ये लक्षण दिखाई देने पर या हैजा का संदेह होने पर तुरंत डॉक्टर से उपचार कराना जरूरी होता है।

हैजा अथवा कॉलेरा का डॉक्टरी उपचार

हैजा के उपचार के लिए डॉक्टर के द्वारा यह देखा जाता है कि व्यक्ति की स्थिति क्या है? अर्थात व्यक्ति के शरीर में पानी की ज्यादा कमी तो नहीं हो गई है, क्योंकि कॉलेरा की बीमारी में बैक्टीरिया के कारण होने वाली उल्टी या दस्त उतनी बड़ी समस्या नहीं होती है, जितनी उल्टी दस्त के कारण होने वाली पानी की भयंकर कमी ख़तरनाक होती है।

इन दो स्थितियों के इलाज लिए निम्नलिखित तरीके अपनाए जाते है-

  • यदि व्यक्ति को पानी की ज्यादा कमी नहीं हो पाई है तो, सबसे पहले डॉक्टर के द्वारा उल्टी और दस्त को रोकने के लिए दवा और इंजेक्शन दिया जाना चाहिए। बैक्टीरिया को नष्ट करने के लिए उसे एंटीबॉयोटिक दवा अथवा इंजेक्शन दिया जाता है। इसके साथ ही ओरल इलेक्ट्रोलाइट्स और रिहाइड्रेशन सोलूशन दिया जाना चाहिए ताकि शरीर से हुई हुई पानी और विभिन्न लवणों की पूर्ति की जा सके। यदि रोगी ज्यादा कमजोरी या शिथिलता महसूस कर रहा हो, तो उसे सोने की दवा भी दी जा सकती है।
  • यदि व्यक्ति को पानी की ज्यादा कमी हो गई हो तो, सबसे पहले डॉक्टर के द्वारा उसे आई.वी (नसों में) सलाइन वाटर और उल्टी और दस्त को रोकने के लिए दवा दी जाती है। यह तब तक चलता है जब तक रोगी की स्थिति में कुछ सुधर न आ जाए। व्यक्ति के शरीर एवं होंठों को ठंडे पानी से बार गीला करते रहना चाहिए, यदि सर्दी का मौसम हो तो शरीर को गीला नहीं करना चाहिए। बैक्टीरिया को नष्ट करने के लिए उसे आई.वी एंटीबॉयोटिक दवा दिया जाना चाहिए।

जब तक रोगी पूर्ण रुप से स्वस्थ नहीं हो जाता है तथा जीवाणु से मुक्त नहीं हो जाता तब तक इसका संक्रमण काल समाप्त नहीं होता है। उसका उपचार तब तक चलते रहना चाहिए।

 



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