ब्रूसीलोसिस संक्रमण से होने वाली समस्याएं

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30th March, 2016

Brucellosis se Sambandhit Rog | ब्रूसीलोसिस से संबंधित रोग | Disease Accociated with Brucellosisब्रूसीलोसिस बैक्टीरिया जनित एक संक्रामक रोग है। यह जानवरों से इंसानो के सीधे संपर्क, संक्रमित एयरोसोल वाली हवा में सांस लेने से और जानवरो से मिले उत्पादों के सेवन या इस्तेमाल से फैलता है। कुछ मामलों में यह पीड़ित व्यक्ति से अन्य व्यक्ति में फ़ैल सकता है। ब्रूसीलोसिस पीड़ित के शरीर के लगभग किसी भी अंग को हानि पहुंचा सकता है। जिसमें प्रजनन अंग, लिवर, हृदय और तंत्रिका तंत्र शामिल हैं। क्रोनिक ब्रूसीलोसिस किसी एक अंग में या पूरे शरीर में विकार कर सकता है।

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इस संक्रमण से पीड़ित इंसान को निम्न समस्याएं होने की संभावना बढ़ जाती है।

  • हृदय की आंतरिक परत में संक्रमण (एंडोकार्डियाटिस) – यह ब्रूसीलोसिस संक्रमण से होने वाली सबसे गंभीर समस्या है। एंडोकार्डियाटिस का अगर इलाज न हो तो यह हार्ट वाल्व को नष्ट कर सकता है। इस संक्रमण से होने वाली सर्वाधिक मृत्यु का कारण एंडोकार्डियाटिस है।
  • अर्थराइटिस (गठिया) – जोड़ों में दर्द, कड़ापन और सूजन जोड़ों के संक्रमण के लक्षण होते हैं। यह लक्षण घुटने, कूल्हे, टखने, कलाइयां और रीढ़ की हड्डी में प्रबल दिखते हैं। कुछ मामलों में रीढ़ की हड्डी या रीढ़ के साथ शरीर के निचले हिस्से की हड्डियों के बीच में जोड़ सूज जाते हैं। जिसे स्पोंडोलाइटिस कहा जाता है। स्पोंडोलाइटिस का इलाज जटिल और उस से होने वाला नुक्सान स्थाई हो सकता है।
  • अंडकोष में सूजन और संक्रमण (एपिडिडायमो-ओरचाइटिस) – ब्रूसीलोसिस फैलाने वाला जीवाणु एपिडिडायमिस को संक्रमित कर सकता है, वह नली जो वास डेफेरेंस और अंडकोष (टेस्टिकल) को जोड़ती है, वहां से संक्रमण अंडकोष में फैलकर तीव्र सूजन और दर्द पैदा कर सकता है।
  • लिवर और स्प्लीन में सूजन और दर्द – ब्रूसीलोसिस से तिल्ली (स्प्लीन) और यकृत (लिवर) के कार्य पर असर पड़ता है। जिससे यह अंग अपने सामान्य आकार से काफी बड़े हो जाते है।
  • केंद्रीय तंत्रिका तंत्र संक्रमण – इन संक्रमणों से मेनिन्जाइटिस (मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड को ढकने वाली मेम्ब्रेन का सूज जाना) और एंसीफलाइटिस (मस्तिष्क में सूजन) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

फ्लू जैसे लक्षण होने के कारण शुरुआती चरण में संक्रमण की पहचान मुश्किल होती है। किसी आशंका होने की स्थिति में डॉक्टरी जांच से संक्रमण का जल्दी इलाज होना ज़रूरी है।



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