हैजा या कॉलेरा के लक्षण एवं संकेत

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20th May, 2016

Kaise karen Haija ya Cholera ki pahchan? | कैसे करें हैजा या कॉलेरा की पहचान? | How to identify cholera?

हैजा (Cholera) एक तेजी से बढ़ने वाला संक्रामक रोग है। यह रोग विब्रियो कोलेरी (Vibrio cholera) नामक जीवाणु से दूषित, जल, भोजन तथा अन्य खाद्य या पेय पदार्थों के सेवन से होता है| यह जीवाणु संक्रमित व्यक्ति के मल एवं उल्टी में पाया जाता है। इस जीवाणु का विकास दूषित जल, दूध एवं दूध के उत्पाद, सड़े गले फल एवं सब्जियों, बासी भोजन तथा गंदी नालियों व अस्वच्छ वातावरण में अधिक होता है। यह रोग किसी भी उम्र के स्त्री या पुरुष को हो सकता है। गर्भवती महिलाओं तथा बच्चे जिनकी प्रतिरक्षात्मक क्षमता कम होती है, वे शीघ्र ही इस रोग के शिकार होते हैं।

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यह एक बेहद घातक बिमारी है, इसलिए इसका इलाज जितनी जल्दी सम्भव हो करना चाहिए। इसके लिए रोग का पता होना जरूरी है, इस रोग का पता इसके लक्षणों के आधार पर किया जाता है।

हैजा या कॉलरा के लक्षण

हैजा से पीड़ित व्यक्ति में  निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं-

  • दस्त के साथ-साथ उल्टी होने लगती है। दस्त अत्यंत पतले पानी जैसे होते हैं, जो देखने में चावल के माँड जैसे लगते हैं।
  • शुरू में रोगी को दिन में 35-40 बार दस्त हो सकती है।
  • शरीर से अत्यधिक मात्रा में पानी के साथ-साथ आवश्यक लवण (साल्ट्स) जैसे- सोडियम, पोटेशियम इत्यादि भी निकल जाते हैं। यदि यह स्थिति ज्यादा गम्भीर हो जाती है तो ख़तरनाक होता है। इसे निर्जलीकरण (शरीर में पानी की कमी होना) कहते हैं।
  • कई बार उल्टी नहीं भी होती है और जी मिचलाता है व उल्टी होने जैसा प्रतीत होता है।
  • पेट में तेज दर्द भी हो सकता है।

हैजे का सामान्य लक्षण बार-बार उल्टी और दस्त ही है, परन्तु इसमें होने वाले जान लेवा लक्षण उल्टी-दस्त के कारण होने वाली पानी की कमी से होते हैं-

  • उल्टी, दस्त एवं उससे होने वाली निर्जलीकरण के कारण रोगी के हाथ-पैरों की माँसपेशियों में तीव्र ऐंठन होने लगती है।
  • रोगी को अत्यधिक प्यास लगती है।
  • पेशाब आना कम हो जाता है।
  • शरीर में निर्जलीकरण हो जाने से रक्त अम्लीय हो जाता है। इससे रोगी की मृत्यु हो सकती है।
  • व्यक्ति की हृदय गति तेज हो जाती है।
  • रक्त संचार और नाड़ी गति धीमी होता है।
  • त्वचा का लचीलापन कम हो जाता है, जिससे चमड़ी खींचने पर वह वापस अपनी सामान्य स्थिति में नहीं पाती है।
  • ऑंखें सूख जाती हैं।
  • मुँह, गला, नाक और आँखों की पलकें की श्लेष्मिक (watery) झिल्ली सूख जाती है।
  • रोगी निढाल, थका-थका सा कमजोर व शक्तिहीन हो जाता है।

हैजा होने की स्थिति में समय पर उपचार द्वारा व्यक्ति को मौत के मुँह में जाने से रोका जा सकता है। इसका उपचार एंटीबॉयोटिक दवाओं एवं नसों के माध्यम से सलाइन वाटर (लवण युक्त पानी) के द्वारा किया जाता है ।

 

 



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