साइनस की समस्या

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22nd May, 2017

Sinus ke liye gharelu dekbhal | साइनस के लिए घरेलू देखभाल | Care at home for sinusसाइनसिसिस, जिसे साइनस संक्रमण के नाम से भी जाना जाता है, एक ऐसी समस्या है, जिसमें, नाक के भीतरी आस-पास के छिद्रों में संक्रमण के कारण सूजन आ जाती है। आम तौर पर, नाक के भीतरी आस-पास के हिस्सों में जो छोटे-छोटे छिद्र होते हैं, जिन्हें साइनस गुहा कहा जाता है, हवा से भरे होते हैं; लेकिन यदि इन छिद्रों में हवा के बजाय, तरल और संक्रामक तत्वों से भर जाए तो यह ब्लॉक हो जाते हैं और उस स्थान पर संक्रमण फ़ैल जाता है।

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आम तौर पर, देखा  जाता है कि कुछ लोगों को सर्दी-जुकाम की समस्या (एलर्जी) आये दिन होती रहती है। ऐसे व्यक्तियों में, साइनस की समस्या की आशंका सबसे ज्यादा होती है। बल्कि यूँ कहिये कि यह समस्या उन्हें ही होती है।

साइनस की समस्या में, रोगी के माथे, आँखों, नाक और नाक के आस-पास के हिस्से (चेहरे) पर दबाव बना रहता है और वहां दर्द रहता है। साइनस के रोगी को, किसी चीज को ध्यान से देखने, आगे झुकने, लेटने और चेहरे या नाक पर किसी प्रकार का दबाव पड़ने से और भी ज्यादा तकलीफ़ होती है। कभी-कभी यह समस्या इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि इसके कारण, ऊपरी दांत में भी दर्द होने लगता है। साइनस की समस्या में रोगी को सांस लेने में भी तकलीफ होती है।

साइनस के प्रकार

साइनस दौ प्रकार का होता है- एक्यूट और क्रोनिक। एक्यूट साइनस की शुरुआत, बंद और बहती नाक, यानी सर्दी लगने से होती है। यह समस्या चार से 12 हफ़्तों तक रह सकती है। वहीं दूसरी और क्रोनिक साइनस की समस्या भी इसी तरह से शुरू होती है लेकिन यह 12 हफ़्तों से ज्यादा तक रहती है।

किन लोगों में ज्यादा होती है साइनस होने की आशंका?

  • जिन व्यक्तियों को अक्सर जुकाम की समस्या रहती हो,
  • जिनकी जल निकासी नलिकाओं में रूकावट हो,
  • नाक की भीतरी बनावट में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी हो, जिसके कारण नाक की ग्रंथियां रुक रहीं हों,
  • जिन्हें नाक में पोलिप्स की समस्या हो,
  • जिनकी शरीर से रोगों से लड़ने की क्षमता खराब हो या दवाई के कारण रोगों से लड़ने की क्षमता पर दबाव पड़ रहा हो।

बच्चों में साइनस के कारण

  • बच्चों को आये दिन एलर्जी की समस्या रहना,
  • डे केयर से लगी किसी संक्रामक बिमारी के कारण,
  • पेसिफ़ियर का प्रयोग भी बच्चों में साइनस का कारण बन सकता है,
  • कमर के बल लेट कर बोतल से दूध पीना,
  • यदि बच्चों के आस-पास धूम्रपान किया जाए।



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