त्वचा पर होने वाले विभिन्न संक्रमण

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9th July, 2017

Twacha Sankrman | त्वचा संक्रमण | Skin Infectionहम अक्सर त्वचा पर अलग-अलग तरह के निशान या चकते उभरते देख सकते हैं। जिसे हम ज्यादातर गंभीरता से नहीं लेते। यदि यह चकते ज्यादा दिन तक त्वचा पर टिके रहें और प्राथमिक उपचारों के बाद इनमें आराम न मिल रहा हो तब जाकर हम इनके लिए डॉक्टर के पास जाते हैं। यहाँ तक कि कई बार तो हमें इन्हें पहचनाना इतना मुश्किल  होता है कि डॉक्टर भी इनकी जांच आसानी से नहीं कर पाते। यह त्वचा पर होने वाली अलग-अलग समस्याएं होती हैं। जिनकी पहचान बहुत जरूरी होती है। नीचे त्वचा से जुड़ी कुछ ऐसी परेशानियां दी हुई हैं, जो किसी को भी हो सकती हैं। यदि आप इन्हें पहचानते हैं, तो इनका इलाज भी आसान हो जाता है।

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त्वचा पर होने वाले विभिन्न संक्रमण-

  • चकते- त्वचा के रंग में धब्बों के रूप में किसी भी प्रकार का बदलाव रैश कहा जाता है। ज्यादातर रैश हानिकारक नही होते और एंटीबायोटिक या इसके कारणों के ठीक हो जाने पर खुद ही ठीक हो जाते हैं। यह एक साधारण त्वचा से जुड़ी समस्या होती है।
  • त्वचा की सूजन (एटॉपिक डर्मेटाइटिस)- यह खुजली (एग्ज़िमा) का सबसे आम रूप होता है। शरीर पर सूजन के लिए इस टर्म का प्रयोग आम तौर पर किया जाता है।
  • खुजली (एग्ज़िमा)- यह शरीर की सूजन होती है, जो खुजली और चकतों के साथ उभरती है। एग्ज़िमा का सबसे आम कारण अति सक्रीय प्रति रक्षा प्रणाली होती है।
  • सोरेसिस- यह एक स्व-प्रतिरक्षित स्थिति है, जिसमें त्वचा पर अलग-अलग प्रकार के चकते हो जाते हैं। इसमें त्वचा पर चांदी जैसे रंग की पपड़ी जम जाती है।
  • रूसी (डेंड्रफ)- यह सिर की त्वचा पर होने वाली बेहद आम समस्या है और ज्यादातर शुष्क (सर्दी) मौसम के उभरती है।
  • मुँहासे (ऐक्नी)- यह भी त्वचा की सबसे आम समस्याओं में से एक है। इस समस्या से दुनिया भर में लगभग 80 प्रतिशत लोग जिंदगी में कभी-न-कभी प्रभावित होते ही हैं।
  • कोशिका शोथ (सेलुलाइटिस)- यह त्वचा की एक परत (डर्मिस) और सबक्यूटेनियस टिस्सु की सूजन होती है। इसका कारण संक्रमण होता है। इसमें त्वचा, लाल, गर्म, चकतेदार हो जाती है और उसमें दर्द होता है।  
  • फोड़े- यह त्वचा के एक ही स्थान पर हुआ संक्रमण होता है। इसकी बाहरी त्वचा के अंदर पीव इकठ्ठा हो जाता है। जहाँ कुछ फोड़े अपने आप ठीक हो जाते हैं, वहीं कुछ को डॉक्टर से निकलवाना पड़ता है।
  • रोसैया (Rosacea)- इसमें त्वचा पर लाल चकते हो जाते हैं। यह मुँहांसों के जैसे लगते हैं लेकिन यह समस्या आसानी से पकड़ में नहीं आती।
  • मस्से (वाटर्स)- यह त्वचा पर वायरस का संक्रमण होता है। इससे त्वचा एक ही स्थान पर अत्यधिक बढ़ जाती है। इन्हें घर पर भी केमिकल्स या डक्ट टेप या फिरइजिंग के द्वारा ठीक किया जा सकता है। या फिर फिजिशियन से निकलवाया भी जा सकता है।
  • मेलानोमा- यह त्वचा का सबसे खतरनाक कैंसर होता है। इसका मुख्य कारण सूर्य से हुए नुक्सान और कुछ अन्य कारण होते हैं। इसकी पहचान बायोप्सी के द्वारा की जाती है।
  • बसल सेल कार्सिनोमा- यह भी त्वचा का सबसे आम कैंसर होता है। यह इतना ज्यादा घातक नहीं होता क्योंकि यह बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है।
  • सेबोररहेस केराटोसिस– यह एक बेहद हल्की सी त्वचीय वृद्धि होती है। यह मस्सों के जैसी दिखती है। इनमें खुजली महसूस होती है। इसे भी फिजिशयन से निकलवाया जा सकता है।
  • एक्टिनिक केराटोसिस- यह त्वचा पर दिखने वाले लाल रंग के बेहद भद्दे उभार होते हैं। यह सूर्य के संपर्क में आने वाले स्थान पर उभरते हैं। यह कभी-कभी कैंसर का रूप भी ले लेते हैं।
  • स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा- यह भी त्वचा के कैंसर का एक प्रकार होता है। इसकी शुरुआत अल्सर की तरह होती है, लेकिन यह ठीक नहीं होता। यह भी सूर्य के संपर्क में आने वाले स्थान पर ही होता है।
  • दाद (हर्प्स)- दाद के दो वायरस HSV-1 और HSV-2 होते हैं। इनके कारण त्वचा पर रह-रह कर फफोले बनते हैं। ज्यादातर जननांगों और होंठों के आस-पास होने वाले हर्प्स में जलन होती है।
  • खराश (Hives)- इसमें त्वचा पर लाल रंग के चक्तेदार उभार बन जाते हैं। यह त्वचा पर अचानक से उभर कर आते हैं। यह स्थिति एलर्जी की प्रतिक्रिया के कारण उत्पन्न होती है।
  • टीनेया वेर्सिकलर- यह एक हल्का त्वचा का फंगल इंफेक्शन होता है। इसमें त्वचा पर पीले या सफ़ेद रंग के चकते बन जाते हैं।
  • वायरल एक्सअन्थेम- यह समस्या ज्यादातर बच्चों में होती है और इसमें कई सारे संक्रमण एक साथ हो जाते हैं। इसमें त्वचा का एक हिस्सा लाल हो जाता है।
  • दाद (हर्पीज जोस्टर)- यह चिकनपॉक्स चेचक के वायरस द्वारा फैलाया जाने वाला संक्रमण है। इसमें शरीर के एक हिस्से में चकते बन जाते हैं और उनमें दर्द होता है।
  • खुजली (स्केबीज)- यह बेहद छोटे-छोटे कण होते हैं। जो शरीर के अंदर गड्ढे जैसा स्थान बना देते हैं। इनमें बहुत ज्यादा खुजली और जलन होती है। यह ज्यादातर उँगलियों, कलाइयों और कूल्हों पर होते हैं।
  • दाद (रिंगवॉर्म)- यह एक कवक संक्रमण (फ़न्गल इंफैक्शन) होता है। इसे टीनिया के नाम से भी जाना जाता है।



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