स्वाइन फ़्लू- एक महामारी

भाषा चयन करे

3rd October, 2015

Kya hai Swine Flu ke Tathya aur Mithak? | क्या हैं स्वाइन फ्लू के तथ्य और मिथक? | What are the Facts and Myths of Swine Flu?H1N1 फ्लू जिसे स्वाइन फ्लू के नाम से भी जाना जाता है। इस बिमारी के ऐसे नाम इसके सुअर से आने के कारण रखे गये हैं। स्वाइन फ़्लू की शुरुआत उन लोगों से हुई है, जो सूअरों के सीधे संपर्क में रहे थे। लेकिन कुछ वर्षों पहले इसी तरह का एक नया वायरस भी उभर कर सामने आया, और मुख्य बात यह है कि यह उन लोगों के बीच भी फैल गया जो सुअरों के संपर्क में नहीं थे।

Image Source

2009 में, जब स्वाइन फ्लू दुनिया भर में तेजी से फ़ैल गया तो, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे महामारी का नाम दे दिया। भले ही इस बिमारी से आज भी अधिकतर लोग पीड़ित न हों, लेकिन इस जानलेवा बिमारी का डर लोगों के मन में बैठ गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बिमारी ने अचानक से दुनिया भर के लोगों की जान ले ली है। इस बिमारी से बचने के लिए इसकी उचित जानकारी होना बेहद आवश्यक है। इस महामारी के बारे में जितने ज्यादा लोग जागरूक होंगे उतना ही इस से बचा जा सकेगा।

आंकड़े बतातें है कि भारत में अब तक स्वाइन फ्लू के 29,599 लोगों की जाँच के नतीजे पॉजिटिव पाये गएँ हैं, और लगभग 2024 लोगों की मौत हो चुकी है। इस महामारी के ऐसे प्रकोप को देखते हुए ही वैश्विक संस्थाओं ने वैज्ञानिकों के साथ मिलकर इसे गंभीरता से लेते हुए, इस संक्रमण से बचाव के लिए टीकों की खोज भी कर ली है।

दरअसल फ्लू या इन्फ्लुएंजा एक संक्रामक रोग है, जो सुअरों से मनुष्यों में और एक मनुष्य से दूसरे में भी फैलता है। वहीं इन्फ्लुएंजा भी तीन प्रकार का होता है, जिसमें से ‘ए’ और ‘बी’ को बेहद घातक माना जाता है। तीसरे यानी ‘सी’ प्रकार का इन्फ्लुएंजा इतना घातक नहीं होता।

जब स्वाइन फ्लू ने शुरुआत की थी तो यह बेहद घातक रूप में सामने आया था, और इसने बहुत सी जिंदगियां निगल ली थी। हालाँकि इस बार इसका असर इतना ज्यादा नहीं है। इसका कारण है कि उस वक्त इस बिमारी के अचानक से पनपने के कारण इसे समझना और इसका इलाज मुश्किल हो रहा था। हालाँकि अब इस बिमारी को लेकर दुनिया भर के स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टर्स जागरूक हो गयें हैं।

स्वाइन फ्लू से जुड़े कुछ मिथक और तथ्य

तथ्य

  • फ्लू की सबसे गंभीर जटिलता निमोनिया के रूप में सामने आती है।
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग ज्यादा शिकार होतें हैं ।
  • एच1एन1 वायरस स्टील, प्लास्टिक में 24 से 48 घंटे, कपड़े और पेपर में 8 से 12 घंटे, टिश्यू पेपर में 15 मिनट और हाथों में 30 मिनट तक एक्टिव रह सकता है।
  • संक्रमण से ग्रसित होने के 1 से 7 दिनों में इसके लक्षण सामने आतें हैं।
  • स्वाइन फ्लू को यदि समय रहते ट्रीटमेंट मिल जाए तो यह इतनी बड़ी समस्या नही होती। लेकिन यदि इसका इलाज समय पर न हो तो यह जानलेवा बन जाती है।
  • स्वाइन फ्लू का वायरस ठंड में ज्यादा प्रभावी होता है। गर्मी में इसका असर इतना नही रहता।

मिथक

  • स्वाइन फ्लू का इलाज नहीं है।
  • भारत में स्वाइन फ्लू का उचित इलाज उपलब्ध नहीं है।
  • सुअर का मांस (पोर्क) खाने से स्वाइन फ्लू होता है।
  • स्वाइन फ्लू के वायरस में बदलाव आया है।
  • यदि एक बार स्वाइन फ्लू हो गया तो यह दोबारा से नहीं हो सकता।



अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे !





अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे !