डायबिटीज बढ़ा देती है हृदय रोगों की संभावनाएं

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4th October, 2015

Madhumeh aur Hridaya Rog ke Bich Connection | मधुमेह और हृदय रोग के बीच कनेक्शन | Diabetes and Heart Disease Connectionहृदय रोगों को और घातक बना देती है डायबिटीज

जिन लोगों को डायबिटीज होती है, उनमें हृदय से जुड़े रोगों का पनपना भी बहुत सामान्य होता है। यही कारण है कि जिन लोगों को डायबिटीज होती है, उनमें से हृदय से जुड़े रोग भी होतें ही हैं। यह समस्या टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में बेहद आम है। फ्रेमिंघम में हुई एक खोज के शुरुआती चरणों में यह बात सामने आई है, कि जिन लोगों में डायबिटीज होती है, वह सामान्य लोगों की अपेक्षा हृदय रोगों के शिकार ज्यादा होतें हैं।

फ्रेमिंघम में हुए इस शोध को लोगों की कई पीढ़ियों पर किया गया था, जिसमें डायबिटीज से पीड़ित लोग भी शामिल थे। इस शोध का मुख्य उद्देश्य, हृदय रोगों के कारकों का पता लगाना था। इस दौरान पाया गया कि हृदय रोगों के कई कारक हैं, और इनमें से डायबिटीज भी मुख्य है। डायबिटीज के अलावा, हाई कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रैशर, धूम्रपान और पारिवारिक इतिहास को हृदय रोगों का सबसे बड़ा कारण पाया गया।

जिन लोगों में हृदय रोगों के जितने ज्यादा कारक मौजूद होतें है, उनमें हृदय रोगों और यहाँ तक कि मृत्यु तक होने का खतरा उतना ही ज्यादा होता है। वहीं जिन लोगों में डायबिटीज के साथ-साथ हृदय रोगों के कारक भी मौजूद होतें हैं, उनमें भी हृदय रोगों से मरने के खतरें ज्यादा होतें हैं। वहीं, जिन लोगों में डायबिटीज होता है, उनमें दूसरों के मुकाबले हृदय रोगों से मरने की संभावना और ज्यादा होती है। यदि किसी व्यक्ति में हृदय रोग का सिर्फ एक कारक जैसे कोलेस्ट्रॉल ही मौजूद है, तो उसमें मृत्यु की संभावनाएं इतनी ज्यादा नहीं होती। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल दोनों ही हैं तो उसमें मृत्यु की संभावना दोगुनी यहाँ तक कि चौगुनी भी हो जाती है।

डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में ह्रदय रोगों के कारण

किसी भी डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति में हृदय रोग के होने का मुख्य कारण, उसकी धमनियों का कठोर हो जाना (Atherosclerosis) होता है। हृदय को पोषक तत्वों और ऑक्सीजन से भरपूर रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में कठोरता रक्त वाहिकाओं में कोलेस्ट्रॉल के जमा होने से होती है।

हालाँकि यह जरूरी नहीं है कि किसी टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति में, उसके ब्लड शुगर के बढ़ने के बाद ही उसमें कोलेस्ट्रॉल बढ़े। ऐसा ब्लड शुगर के स्तर के बढ़ने के पहले भी हो सकता है।

जब रक्त वाहिकाओं में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत बढ़ जाता है, तो यह कोलेस्ट्रॉल प्लॉग टुकड़ों में टूटकर उस जगह रक्त का थक्का बना देते हैं, और यही ब्लड क्लॉट यानी रक्त का थक्का उस जगह पर खून के बहाव को रोक देता है। इसी कारण व्यक्ति को हार्ट अटैक आ जाता है। वहीं जब यह कोलेस्ट्रॉल प्लॉग शरीर की ज्यादातर रक्त वाहिकाओं में फैलने लगता है, तो इस से मस्तिष्क में रक्त पहुंचने वाली वाहिका भी ब्लॉक हो जाती है। जिस से मस्तिष्क में रक्त और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और इसका नतीजा स्ट्रोक के तौर पर सामने आता है। वहीं इस से हाथों और पैरों में भी खून का प्रवाह रुक जाता है।

वैसे हृदय रोगों का कारण सिर्फ डायबिटीज ही नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर हृदय से भी जुड़ा हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति का हृदय ठीक से रक्त पम्प नहीं कर पाता, तो यह भी हृदय की गंभीर समस्याओं का कारण हो सकता है। हृदय के ठीक से पम्प न कर पाने के कारण, फेंफड़ों में तरल इकट्ठा होना और फिर इसका शरीर के दूसरे हिस्सों में पहुंचना खास तौर पर टांगों में सूजन का कारण बन जाता है।

हार्ट अटैक के लक्षण

  • सांसो की तकलीफ़
  • बेहोशी जैसा महसूस होना
  • चक्कर आना
  • बिना वजह बहुत ज्यादा पसीना आना
  • कंधो, जबड़ो, बाई भुजा में दर्द
  • सीने में दर्द और दबाव (खासकर कुछ कार्य करते समय)
  • मतली

लेकिन यह जरुरी भी नहीं है कि इस तरह के लक्षण और परेशानियां हर एक व्यक्ति में ही नजर आएंगी। यह चीजें अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग हो सकती हैं। यह बात खास तौर पर महिलाओं पर लागू होती है।

यदि आपको कुछ इस तरह के लक्षण नजर आ रहें हैं, तो आप तुरंत या तो अपने डॉक्टर से या इमरजेंसी में चले जाएं:-

पेरीफेरल वैस्कुलर डिजीज के लक्षण कुछ इस तरह से नजर आतें हैं:-

  • चलते समय टांगों या कूल्हों में दर्द (Intermittent Claudication)
  • पैर ठंडे हो जाना
  • पैरों और टांगों में नब्ज़ धीमी पड़ना
  • टांगों के नीचले हिस्से में, त्वचा के नीचे वसा की कमी.
  • टांगों के नीचले हिस्से में बालों का झड़ जाना.



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