मधुमेह के प्रकार

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14th April, 2016

Madhumeh ke Teen Mukhya Prakaar | मधुमेह के तीन मुख्य प्रकार | Three Main Types of Diabetesमधुमेह के तीन मुख्य प्रकार होते हैं।

  • टाइप 1 डायबिटीज़
  • टाइप 2 डायबिटीज
  • जेस्टेशनल (गर्भावधि) डायबिटीज

टाइप 1 डायबिटीज
टाइप 1 प्रकार का मधुमेह एक स्व-प्रतिरक्षित (Autoimmune Disease) रोग है। यह रोग तब उत्पन्न होता है जब शरीर के संक्रमण से लड़ने की क्षमता (प्रतिरक्षा प्रणाली) या तो नष्ट हो जाती है, या कमजोर हो जाती है। जब मधुमेह रोगियों में अग्न्याशय में बीटा कोशिकाओं द्वारा इन्सुलिन का निर्माण किया जाता है, तो उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली उन पर हमला कर उन्हें नष्ट कर देती हैं। इसका नतीजा यह होता है, कि इन्सुलिन या तो बन ही नहीं पाता या बहुत कम बनता है। टाइप 1 या प्रथम प्रकार के मधुमेह के रोगियों को जीवित रहने के लिए खाने-पीने के माध्यम से रोज इंसुलिन लेना चाहिए।

अभी तक, वैज्ञानिक शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा बीटा कोशिकाओं पर हमले का कारण पता नहीं लगा पाये हैं, लेकिन उनका मानना है कि इसके लिए स्व-प्रतिरक्षित, आनुवंशिक, पर्यावरणीय कारक और वायरस जिम्मेदार हैं। सामान्य रुप से यह बीमारी बच्चों और वयस्कों में सबसे अधिक विकसित होता है, लेकिन यह किसी भी उम्र के व्यक्ति में पनप सकती है।

प्रथम प्रकार के मधुमेह के लक्षण आम तौर पर छोटी अवधि में ही विकसित हो जाते हैं। हालांकि बीटा सेल के नष्ट होने में वर्षों लग सकते हैं। प्रथम प्रकार के मधुमेह के लक्षणों में प्यास और पेशाब में वृद्धि, लगातार भूख लगना, वजन घटाना, दूरदृष्टि और अत्यधिक थकान शामिल हैं। यदि समय रहते पहले प्रकार के मधुमेह का निदान और इंसुलिन का इलाज नहीं किया जाए तो इसका नतीजा मृत्यु या कोमा में जाने के रूप में भी सामने सकता है, जिसे केटोएसिडोसिस (Ketoacidosis) भी कहा जाता है।

टाइप 2 डायबिटिज
यह मधुमेह सबसे आम मधुमेह माना जाता है। मधुमेह से पीडित 90 से 95 प्रतिशत लोगों में दूसरे प्रकार का मधुमेह ही होता है। मधुमेह का यह रूप उम्र, मोटापा, मधुमेह का पारिवारिक इतिहास, गर्भावधि मधुमेह का पिछला इतिहास, शारीरिक निष्क्रियता और जातीयता से जुड़ा हुआ है। दूसरे प्रकार के मधुमेह से पीड़ित 80 प्रतिशत रोगी अधिक वजन का शिकार रहे हैं। दूसरे प्रकार का यह मधुमेह बच्चों और किशोरों में सबसे अधिक सामने आ रहा है। दूसरे प्रकार के मधुमेह की जाँच में यह पाया जाता है, कि अग्न्याशय तो आमतौर पर पर्याप्त इंसुलिन बना रहा है, लेकिन कुछ अज्ञात कारणों से शरीर प्रभावी ढंग से इंसुलिन का उपयोग नहीं कर पा रहा। ऐसी स्थिति को इंसुलिन प्रतिरोध कहा जाता है। कुछ वर्षों के बाद यह स्थिति इंसुलिन का उत्पादन भी कम कर देती है। इसका नतीजा भी पहले प्रकार के मधुमेह की ही तरह होता है जिसमें – रक्त में ग्लूकोज तो बनता है लेकिन शरीर इसका ईंधन के तौर पर उचित उपयोग नहीं कर पाती।

जेस्टेशनल डायबिटीज
इस प्रकार का मधुमेह सिर्फ गर्भावस्था के दौरान ही पनपता है। इसकी संभावना ज्यादातर उन महिलाओं में होती है जिनके परिवार में यह पहले भी किसी को रही हो। जिन महिलाओं में गर्भावधि मधुमेह हुआ हो उनमें 5 से 10 साल के भीतर दूसरे प्रकार के मधुमेह होने की भी संभावना 20 से 50 प्रतिशत तक रहती है।

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