मधुमेह के कारण आँखों में होने वाले गंभीर रोग

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25th August, 2017

Madhumeh ke karan hone wali ankhon ki samasyayen | मधुमेह के कारण होने वाली आँखों की समस्याएं | Eye disease in Diabetes मधुमेह एक ऐसी समस्या है, जिसमें रक्त में शर्करा या ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। जैसे-जैसे रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ता जाता है, यही शर्करा रक्त वाहिकाओं द्वारा शरीर के प्रत्येक हिस्से समेत आँखों तक भी पहुँच जाती है। रक्त में मिश्रित यही शर्करा आँखों की नाजुक कोशिकाओं तक पहुँच कर उन्हें पोषण रहित, कमजोर और फिर मृत बना देती हैं। इसका सीधा सा परिणाम आँखों की रौशनी घटने के रूप में सामने आता है।

यदि शरीर में रक्त शर्करा का स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहे तो इसके कारण, मधुमेह रेटिनोपैथी, मधुमेह मेक्यूलर एडिमा (डीएमई) और मोतियाबिंद जैसी समस्याएं पनप जाती हैं और यह सभी समस्याएं, आँखों की रौशनी पर बहुत तेज़ी से नकारात्मक असर डालती हैं। यहाँ तक कि इससे व्यक्ति की आँखों की रौशनी हमेशा के लिए भी जा सकती है। इसीलिए मधुमेह के रोगियों के लिए यह बहुत आवश्यक होता है कि वह शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित रखे और आँखों की नियमित जाँच कराता रहे। Image Source

मधुमेह के मरीजों में निम्न बीमारियां होने की आशंका रहती है-

  • मधुमेह रेटिनोपैथी- यह एक ऐसी समस्या है, जिसमें आँखों के पिछ्ले हिस्से, जिसे रेटिना कहा जाता है, को नुकसान पहुँचता है। रेटिना के उत्तक बेहद संवेदनशील होते हैं, और यह रक्त शर्करा के कारण नष्ट होने लगते हैं। इसके कारण व्यक्ति को धुंधला दिखाई देने लगता है और आँखें भी जा सकती हैं।
  • मधुमेह मेक्युलर एडिमा (डीएमई)- इस समस्या में, रेटिना और उसके आस-पास के हिस्सों में सूजन आ जाती है।
  • जाला (कैटरेक्ट)- इस समस्या में, आँखों के लेंस पर सफ़ेद धुंए जैसा जाला बन जाता है। यह समस्या मधुमेह के रोगियों में, सामान्य व्यक्तियों के मुकाबले कहीं अधिक होती है। साथ ही यह समस्या मधुमेह के शुरुआत में भी हो सकती है।
  • ग्लूकोमा- यह कई सारी समस्याओं का एक समूह होता है, जो एक साथ मिल कर आँख की ऑप्टिक तंत्रिका को नष्ट कर देती हैं। ऑप्टिक तंत्रिका, उन स्नायु तंत्रों का समूह होती है, जो आँखों और मस्तिष्क के बीच संपर्क स्थापित करती हैं। यदि व्यक्ति वयस्क है और उसे डायबिटीज़ है तो उसमें अन्य कम उम्र के लोगों के बजाय ग्लूकोमा होने की आशंका दौगुनी बढ़ जाती है।

जाँच में, मधुमेह की पुष्टि होने के बाद, रक्त में शर्करा को नियंत्रित रखने के साथ-साथ इसकी नियमित जाँच से आँखों को पहुँचने वाली भारी क्षति को रोका जा सकता है।  



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