टाइप 1 मधुमेह की जाँच और परीक्षण

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19th February, 2016

Type 1 Madhumeha ko Rokne ke Liye Vibhinna Tarike | टाइप 1 मधुमेह को रोकने के लिए विभिन्न तरीकों | Different Ways to Prevent Type 1 Diabetes यदि आपके डॉक्टर को लगता है कि आपको मधुमेह हो सकता है, तो वह तुरंत इसकी जाँच के लिए ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह देगा। जैसे – ब्लड ग्लूकोज टेस्ट और HbA1c

आपके शारीरिक लक्षणों और ब्लड टेस्ट के आधार पर ही आपका डॉक्टर किसी नतीजे पर पहुँचेगा ।

मधुमेह की जाँच के अलावा एक सी-पेप्टाइड टेस्ट (C-peptide test) भी होता है, जिस से टाइप 1 और टाइप 2 प्रकार की मधुमेह का पता किया जाता है।

कुछ अन्य टेस्ट जो आपके स्वास्थ्य की जाँच के लिए किये जाते हैं:

यदि जाँच के दौरान आपमें मधुमेह की पुष्टि हो जाती है तो आपको उपचार के दौरान हर 3 से 6 महीने में अपने डॉक्टर के पास जाना होगा।

इसके अलावा आपको निम्न चीजों का ध्यान भी रखना होगा:

  • अपने ब्लड शुगर के लेवल पर निरंतर नजर रखें, और उसे अपनी टारगेट रेंज के अंदर ही रखें।
  • अपना ब्लड प्रेशर लगातार चेक करें। उसके अनुसार अपने उपचार पर भी नजर रखें। अपनी सेहत पर निरंतर नजर रखें, क्योंकि इसमें लापरवाही आपकी तंत्रिकाओं और रक्त वाहिकाओं को नष्ट कर सकती है। जिसके कारण आपको ब्लड प्रेशर, हृदय से जुडी समस्याएं और स्ट्रोक जैसी परेशानी भी हो सकती है। इसलिए अपने ब्लड प्रैशर पर भी लगातार नजर रखें।
  • अपने पैरों पर लगातार नजर रखें। खास तौर पर यदि आपको मधुमेह की समस्या कई सालों से चली आ रही है तो। आपकी चेतना में हानि होने से हो सकता है कि आपको पैरों में चोट या जख्म महसूस ना हो। जब भी डॉक्टर के पास जाएं अपने जूते और जुराबें उतार कर अपने पैरों का भी निरीक्षण कराएं। कम से कम साल में एक बार आपके डॉक्टर द्वारा आपके पैरों की भी जाँच जरुरी है।
  • हीमोग्लोबिन A1c टेस्ट भी कराएं। इस जाँच के द्वारा पता चल सकता है कि कैसे समय के साथ आपकी ब्लड शुगर का लेवल बढ़ा है।

अपने शरीर पर निरंतर नजर रखें :-

  • लगातार अपने डॉक्टर के पास जाएं और नियमित तौर पर अपना चेक अप कराएं।

अपने खान-पान पर नजर रखें :-

  • खान-पान की एक लिस्ट बनाएं। आपके खान-पान पर आपका शुगर लेवल बहुत हद तक निर्भर करता है।

अपनी शारीरिक कार्यविधियों पर भी रखें नजर :-

  • शारीरिक गतिविधि लॉग

अपनी मानसिक स्थिति पर नजर रखें :-

  • मधुमेह के बारे में अपनी भावनाओं पर नजर रखें।
  • कैसे आप तनाव पर नियंत्रण करेंगे।

अपने ब्लड शुगर का रिकॉर्ड बनाएं :-

  • ब्लड शुगर के टेस्ट के समय फॉर्म भरना न भूलें।
  • ब्लड शुगर रिकॉर्ड दर्ज करने के लिए एक डायरी बनाएं।

अपनी दवाइयों पर लगातार नजर रखें :-

  • अपनी दवाईयों की एक लिस्ट बनाएं।

ज्यादा परेशानी न बढ़ें इसके लिए स्क्रीन टेस्ट कराएं :-

यदि आपकी टाइप 1 मधुमेह को 3 से 5 साल तक का समय हो गया है, तो आपका डॉक्टर आपको यह टेस्ट भी बता सकता है।

किसी नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologist) या ऑप्टोमेट्रिस्ट (Optometrist) से अपनी आँखों की पूरी तरह से जाँच कराना। क्योंकि ब्लड शुगर का बढ़ा हुआ स्तर आँखों को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन इस जाँच के द्वारा शुरुआत में ही समस्या को पहचाना जा सकता है। यदि आपमें मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथी के लक्षण मौजूद नहीं है तो आपका डॉक्टर आपको थोड़े-थोड़े अंतराल पर टेस्ट करवाने के लिए कह सकता है। उदाहरण के तौर पर हो सकता है कि आपको हर साल कम से कम 2 बार यह जाँच करवानी पड़े।

  • मधुमेही न्यूरोपैथी के लिए पैरों की जाँच, आप जितनी बार भी जाँच के लिए जाएंगे डॉक्टर आपके पैरों की जाँच करेगा कि कहीं उनमें कोई घाव या घट्टा तो नहीं बना हुआ है। यदि आपके पैरों में एक या इस से ज्यादा कोई भी समस्या नजर आती है तो हो सकता है कि आपको एक साल में एक से अधिक बार अपने पैरों की जाँच करवानी पडे। एक ऐसा बच्चा जिसे मधुमेह है हो सकता है कि उसे युवा होने तक अपने पैरों की जाँच न करवानी पड़े।
  • कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का परीक्षण, इस जाँच में आपके LDL कोलेस्ट्रोल स्तर की जाँच की जाती है। इस जाँच के नतीजे के बाद ही आपका डॉक्टर आपके आगे के इलाज की योजना बनाता है। यदि आप वयस्क हैं और आपकी जाँच समान्य है, हो सकता है कि आपको यह जाँच 2 सालों में एक बार करवानी पड़े। यदि आपके बच्चे का स्तर सामान्य है तो आपको उसकी जाँच हर 5 सालों में कई बार करवानी पड़ेगी।
  • प्रोटीन की जाँच के लिए यूरिन टेस्ट, यदि जाँच के दौरान आपमें प्रोटीन की मात्रा अधिक पाई गई है तो, आपको इसके बाद सही इलाज के लिए और भी जाँच करवानी पड़ेंगी। यूरिन में प्रोटीन की मात्रा का मतलब किडनी ख़राब होना (Diabetic Nephropathy) भी हो सकता है।
  • क्रिएटिनिन के लिए रक्त परीक्षण और ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (GFR) के द्वारा किडनी की बिमारियों की जाँच की जाती है।
  • लिवर फंक्शन टेस्ट, इस टेस्ट को लिवर को हुए नुकसान की जाँच के लिए किया जाता है।
  • थायरॉयड उत्तेजक हार्मोन परीक्षण, इस टेस्ट के द्वारा, थायरॉइड की समस्याओं की जाँच की जाती है। यह वह परेशानियां होती हैं जो डायबिटीज के लोगों में समान्य तौर पर पनपती ही रहती हैं। जिन लोगों में यह जाँच सामान्य होती है उन्हें 1 से 2 साल में दोबारा से यह जाँच करवाने के लिए कहा जा सकता है।

अपनी मधुमेह पर उचित नजर रखने के लिए इसकी जांच किये जाने वाले टेस्टों की भी जानकारी रखें।

दांतों की जाँच

दांतों की चिकित्सा में आपका डॉक्टर एक साल में दो बार जाँच करता है। इसमें डॉक्टर आपके दांतो में कोई बीमारी होने के अलावा उनकी सफाई भी करता है। यदि आपमें मधुमेह की समस्या है तो आप निरंतर रूप से अपनी जाँच करवाएं।

प्रेग्नेंसी के दौरान आँखों की चिकित्सा

यदि आप मधुमेह से पीड़ित हैं और गर्भवती हैं तो आपको अपनी आँखों की जाँच करवानी पड़ेगी। आपको यह जाँच पहले तीन महीनों में करवानी होती है। इसके अलावा आपको अपने पूरे स्वास्थ्य की जाँच बारीकी से करवानी होती है। इसके अलावा डिलवरी के एक साल बाद भी आपको अपनी जाँच करवानी होती है। प्रेग्नेंसी भी आपमें प्रेग्नेंसी रेटिनोपैथी की संभावनाएं बढ़ा देती है। यदि आपमें पहले से ही आँखों की समस्या है और आप प्रेग्नेंट हैं तो आपकी आँखों की समस्या और ज्यादा भयंकर रूप ले सकती हैं।



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