डायबिटीज और स्ट्रोक के बीच संबंध

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4th October, 2015

stroke aur madhumeh ke bich link|स्ट्रोक और मधुमेह के बीच लिंक|The Link Between Stroke and Diabetesडायबिटीज और स्ट्रोक के बीच संबंध

स्ट्रोक और डायबिटीज के बीच काफी गहरा संबंध है, और वह संबंध यह है कि डायबिटीज एक सामान्य स्ट्रोक को और भी घातक बना सकती है। दरअसल स्ट्रोक का कारण किसी एक रक्त वाहिका के फटने या ब्लॉक हो जाने के कारण मस्तिष्क में रक्त और ऑक्सीजन का न पहुंच पाना है। यदि मस्तिष्क की एक वाहिका ब्लॉक हो जाए तो अन्य रक्त वाहिकाओं से रक्त का प्रवाह होता रहता है। वहीं यदि उस व्यक्ति को डायबिटीज भी है तो उसकी अन्य रक्त वाहिकाएं भी मस्तिष्क को रक्त पहुंचाने में सक्षम नहीं होती, और यह स्थिति किसी भी मरीज के लिए बेहद घातक साबित हो सकती है।

क्या होता है स्ट्रोक?

स्ट्रोक वह स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क में रक्त और ऑक्सीजन पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाओं में से कोई एक वाहिका या तो बंद हो जाती है, या फिर वह फट जाती है। यदि मस्तिष्क के किसी हिस्से में 3 या 4 मिनट से ज्यादा रक्त का प्रवाह न हो पाए तो मस्तिष्क का वह हिस्सा मरना शुरू हो जाता है।

स्ट्रोक दो प्रकार के होतें हैं

  • हिमोरेजिक स्ट्रोक, जो किसी धमनी के नष्ट होने से होता है।
  • इस्कीमिक स्ट्रोक, जो धमनी के ब्लॉक होने के कारण होता है।

यदि किसी व्यक्ति में डायबिटीज का रोग हो, तो उसके शरीर के लिए स्ट्रोक के प्रति प्रतिक्रिया देना भी मुश्किल हो जाता है। यदि किसी एक धमनी के द्वारा रक्त का प्रवाह रुक भी जाता है, तो दूसरी धमनियों के द्वारा वह चलता रहता है। लेकिन यदि उस व्यक्ति को मधुमेह है, तो उसके शरीर की दूसरी धमनियां कठोर और मैल से भरी होती हैं। इस स्थिति को धमनियों का कठोर होना (Atherosclerosis) कहा जाता है, और इसी के कारण दूसरी धमनियों से भी रक्त मस्तिष्क को नहीं पहुंच पाता।

कारण

हाई ब्लड प्रैशर, स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा, धूम्रपान, सिगरेट, LDL (बुरा कोलेस्ट्रोल) यह भी स्ट्रोक को जन्म देने वाले कारक हैं।

लक्षण

स्ट्रोक चाहे डायबिटीज के कारण आया हो, या बिना डायबिटीज के इसके आने के बाद एकमात्र उपचार एमर्जेन्सी ट्रीटमेंट है। इसलिए बेहतर होता है कि आप ऐसा होने से पहले इसके लक्षणों को पहचान कर इसको आने से रोक दें।

  • हाथ, पैर, टांग खासकर शरीर का एक तरफ का हिस्सा सुन्न और संवेदनहीन हो जाना।
  • बोलने, समझने में परेशानी, यहाँ तक कि साधारण सी बात भी न बोल पाना।
  • अचानक से दृष्टि धुंधली हो जाना, या दिखना बंद हो जाना, यह एक आँख या दोनों में भी हो सकता है।
  • कुछ भी न निगल पाना
  • चक्कर आ जाना, खुद पर से नियंत्रण खत्म हो जाना।
  • अचेत हो जाना।
  • अचानक से शरीर का कार्य करना बंद कर देना (paralysis)
  • अचानक से सिर में असहनीय दर्द शुरू हो जाना।

उपचार

इस्कीमिक स्ट्रोक के लिए उपचार, के तौर पर क्लॉट-बस्टर दवा टीपीए दी जाती है। इस दवाई को यह घटना घटने के पहले तीन घंटों के भीतर दिया जाता है। यह तुरंत खून के क्लॉट को घोल देती है, और इस से दोबारा से रक्त वाहिका द्वारा मस्तिष्क में रक्त का बहना शुरू हो जाता है। लेकिन साथ ही यह दवाई हर उस व्यक्ति को भी नहीं दी जा सकती जिसे इस्कीमिक स्ट्रोक हुआ हो। खासकर यदि आप पहले भी (दो हफ्तों के भीतर) कोई बड़ी सर्जरी करवा चुके हो, या फिर आपको सर में कोई चोट आई हो।

वहीं कुछ और ऐसी दवाइयाँ भी चिकित्सा जगत में मौजूद हैं, जिन्हें यदि स्ट्रोक के घटित होने के साथ ही ले लिया जाए तो वह स्ट्रोक के साथ-साथ ब्रेन को डेमेज होने से भी बचा सकती हैं।



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