अग्नाशय प्रत्यारोपण के बाद

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16th November, 2016

Agnashya Prtyaropan ke Baad | अग्नाशय प्रत्यारोपण के बाद | After Pancreatitis Transplant अग्नाश्य प्रत्यारोपण के बाद रोगी के शरीर में, उसके अपने अग्नाश्य को (यदि वह इन्सुलिन के अलावा, अन्य कार्य करने में समर्थ हो तो) वहीं छोड़कर उसके साथ ही, डोनर द्वारा दिए गए अग्नाश्य को लगा दिया जाता है। दाता से लिए गए अग्नाश्य में उसकी छोटी आंत के सबसे पहले भाग (ड्यूडेनम) को भी साथ में निकाला जाता है और इसे रोगी व्यक्ति की आंत और रक्त वाहिकाओं से जोड़ दिया जाता है। इस सर्जरी में कम से कम तीन घंटों का समय लगता है और इसके लिए सर्जन रोगी को लोकल एनेसथेसिया देकर सर्जरी करते हैं।

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अग्नाश्य प्रत्यारोपण के बाद रोगी की स्थिति और देखभाल-

  • आईसीयू (Intensive Care Unit- ICU)- सर्जरी के बाद, कुछ दिनों तक, रोगी को डॉक्टर और नर्सों की गहन चिकित्सकीय देख-रेख में रखा जाता है, ताकि वह आपके नए प्रत्यारोपित किये गए अग्नाश्य और स्वास्थ्य पर बराबर नज़र रख सकें। जहाँ एक और इस बात की निगरानी रखी जाती है कि रोगी का पुराना अग्नाश्य पहले की तरह काम कर रहा है या नहीं, वहीँ दूसरी और यह भी देखा जाता है कि नए अग्नाश्य को शरीर ने स्वीकार किया है या नहीं और वह सक्रीय हो रहा है या नहीं। वहीं यदि किसी रोगी में किडनियों को भी प्रत्यारोपित किया गया है तो, उसका सामान्य तौर पर यूरिन बनाना बहुत जरूरी होता है। कुछ मामलों में यह प्रक्रिया तुरंत भी शुरू हो जाती है और वहीं कुछ मरीजों में इसमें हफ्ते का समय भी लग जाता है।
  • अस्पताल में भर्ती रहने का समय- एक बार यदि रोगी का शरीर आये अंगों को स्वीकार करना शुरू कर देता है तो उसका स्वास्थ्य भी सामान्य अवस्था में आने लगता है। हालाँकि चीरे के स्थान पर दर्द और सूजन ठीक होने में कुछ महीनों का समय लग जाता है।
  • लगातार कराएं चेक अप- एक बार जब रोगी को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है तो रोगी को कम से कम एक महीने लगातार जांच करानी बहुत जरूरी होती है। इसके लिए ट्रांसप्लांट टीम मिलकर एक चेक अप प्लान बनाती है।
  • दवाइयाँ- एक बार यदि किसी व्यक्ति ने अग्नाश्य प्रत्यारोपित करवा लिया, तो इसके बाद उसे पूरी जिंदगी दवाइयों का प्रयोग करना पड़ता है। इन दवाइयों को इम्यूनोस्प्रेसेंटस कहा जाता है, और यह रोगी के शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को, उसके नए अग्नाश्य पर आक्रमण करने से रोकती हैं। साथ ही प्रत्यारोपण के बाद शरीर में संक्रमण का ख़तरा भी होता है, इसके लिए भी मरीज को ताउम्र दवाइयां लेनी पड़ती है।

अग्नाश्य  प्रत्यारोपण के बाद, रोगी का शरीर ठीक से काम करता रहे और नए लगाए अंगों से व्यक्ति की जीवन वृद्धि हो सके इसके लिए उसे पूरी जिंदगी सम्भल कर रखना जरूरी होता है। उसे दवाइयों के साथ-साथ अपने खान-पान का पूरा ध्यान रखना भी बहुत जरूरी होता है।



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