क्या हो सकते हैं अग्नाश्य प्रत्यारोपण के नतीजे?

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9th July, 2017

Agnashya pratyaropan ke natije | अग्नाश्य प्रत्यारोपण के नतीजे | results of pancreas Transplantएक बार आपके अग्नाश्य के सफल प्रत्यारोपण के बाद, आपका नया अग्नाश्य शरीर के लिए जरुरी इन्सुलिन का निर्माण करना शुरू कर दे तो इसके बाद आपको अलग से इन्सुलिन थेरेपी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन साथ ही प्रत्यारोपण के बाद आपके शरीर को, दान किये गए अग्नाश्य के साथ सामंजस्य बिठाने में भी वक्त लगेगा। या फिर हो सकता है कि आपकी रोग प्रति-रोधक क्षमता आपके नए अग्नाश्य को स्वीकार ही न करें।

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आपका शरीर नए (किसी और के शरीर से निकाले) अग्नाश्य को अस्वीकार न करें इसके लिए आपको, लगातार दवाइयों का प्रयोग कारण पड़ेगा। हो सकता है कि आपको इसके लिए पूरी जिदंगी ही दवाइयाँ खानी पड़ें। यह भी हो सकता है कि इन दवाइयों से आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित हो और वह कमजोर हो जाए। इससे शरीर में संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। यदि किसी व्यक्ति में इस तरह की स्थिति पैदा होने की आशंका होती है तो, डॉक्टर रोगी को एण्टीबैक्टिरियल, एंटी-फंगल और एंटीवायरल दवाइयाँ देते हैं।

अग्न्याशय प्रत्यारोपण के बाद जीवन

अंग प्रत्यारोपण खरीद और ट्रांसप्लांटेशन नेटवर्क, के अनुसार अग्नाश्य और किडनी प्रत्यारोपण के बाद जीवित रहने की आशंकाएं कुछ इस प्रकार होतीं हैं-

  • अग्नाश्य-गुर्दा प्रत्यारोपण- लगभग 85% लोगों में, जिन्होंने अग्नाश्य और गुर्दों दोनों को एक ही समय पर एक के बाद एक कर के ट्रांसप्लांट करवाया है, और उनमें एक साल तक अग्नाश्य ठीक से काम करता है और इसके पांच साल बाद इसकी कार्य क्षमता घट कर 73% रह जाती है।
  • गुर्दों के बाद अग्न्याशय प्रत्यारोपण- लगभग 82% लोगों में, जिन्होंने गुर्दों के बाद अग्नाश्य को प्रत्यारोपित करवाया है, यदि एक साल तक उनका अग्नाश्य कार्य करता है तो, अगले पांच सालों में, यह दर 65 तक रह जाएगी।
  • केवल अग्नाश्य प्रत्यारोपण- 76% लोगों में, जिन्होंने सिर्फ अग्नाश्य ही प्रत्यारोपित करवाया है, और इनमें एक साल के बाद भी यह ठीक से कार्य कर रहा है तो, पांच सालों के बाद यह कार्य क्षमता 53% रह जायेगी।

हालाँकि, अभी तक इस बात की जानकारी नहीं मिल सकी है कि यदि अग्नाश्य और गुर्दों को एक साथ प्रत्यारोपित कराया जाता है तो, यह ज्यादा समय तक कार्य कैसे करता है। लेकिन कुछ खोजकर्ताओं का मानना है कि यह शायद इस वजह से हो सकता है कि सिर्फ अग्नाश्य की अस्वकृति का पता लगा पाना, अग्नाशय-गुर्दों से ज्यादा मुश्किल होता है।

यदि आपका नया अग्नाश्य शरीर की कार्यशीलता में सामंजस्य नहीं बिठा पाता, तो आपको इन्सुलिन लेना फिर से शुरू करना पड़ता है और अग्नाश्य भी फिर से प्रत्यारोपित करवाना पड़ता है। हालाँकि इसका निर्णय आपके वर्तमान स्वास्थ्य को देखते हुए ही लिया जाता है।



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