पेट में दर्द? कहीं पैन्क्रियेटाइटिस या अग्नाशयशोथ तो नहीं?

भाषा चयन करे

26th June, 2017

पैन्क्रियेटाइटिस या अग्नाशयशोथ को कैसे पहचानें? | Pancreatitis ya Agnashya Shoth ko kaise pahchane? | How to Recognize Pancreatitis or Agnashya shoth?पेट दर्द एक आम समस्या है और आये दिन किसी न किसी को होती ही रहती है। ज्यादातर पेट की परेशानी, छोटी-मोटी समस्याओं, जैसे अपच या बदहजमी, गैस, फ़ूड पॉइजनिंग, कब्ज या दस्त के कारण होती है। इस तरह की समस्याएं, प्राथमिकी उपचार के बाद ठीक हो जाती हैं। लेकिन कई बार, ऐसा भी हो सकता है कि पेट दर्द के पीछे इन छोटी-मोटी समस्याओं से अलग कोई बड़ी परेशानी होती है। ऐसी ही एक परेशानी है, पैन्क्रियेटाइटिस या अग्नाशयशोथ।

Image Source

अग्नाश्यशोथ, अग्नाश्य में होने वाली सूजन को कहा जाता है और किसी व्यक्ति में, अग्नाश्य शोथ की समस्या तब उत्पन्न होती है, जब उसके अग्नाश्य में बनने वाला पाचक रस, आहार को तोड़ने के बजाय उसके अग्नाश्य पर ही आक्रमण करना शुरू कर देता है। इससे अग्नाश्य में घाव बनने लगते हैं और उसमें सूजन आ जाती है। साथ ही अग्नाश्यशोथ भी दो तरह का होता है, एक तो वह जिसमें, अग्नाश्य बेहद धीरे-धीरे प्रभवित होता है और दूसरा, जिसमें अग्नाश्य पर अचानक से सूजन आ जाती है। जब अग्नाश्य में सूजन धीरे-धीरे आती है, तो इसे क्रोनिक (पुरानी या धीरे-धीरे बढ़ने वाला) अग्नाश्य शोथ कहा जाता है और जब यह अचानक से आ जाती है तो इसे एक्यूट (तीव्र) अग्नाश्य शोथ कहा जाता है।

यदि कोई व्यक्ति एक्यूट (तीव्र) अग्नाश्यशोथ से प्रभावित होता है तो उसे कुछ इस तरह के लक्षण नजर आते हैं-

  • पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द
  • कमर के ऊपरी और बीच के हिस्से में दर्द
  • खाना खाने के बाद अचानक से दर्द होने लगना खास तौर पर, चिकनाई, मांशाहार या अन्य आसानी से न पचने वाले आहार का सेवन करने के बाद
  • पसलियों के ठीक नीचे और बीच से थोड़ा बांयी तरफ दर्द के साथ सूजन भी दिखना
  • जी मिचलाना और उल्टी होना
  • बुखार और दिल की धड़कन तेज हो जाना

एक्यूट पैन्क्रियेटाइटिस, आम भी हो सकता है और घातक भी। यदि यह हल्की-फुल्की समस्या होती है तो प्रारंभिक उपचार के बाद ठीक हो जाती है। लेकिन यदि अग्नाश्य को नुक्सान बहुत ज्यादा हो चुका हो तो, इससे रक्तस्त्राव, उत्तकों का नष्ट हो जाना, गंभीर संक्रमण फ़ैल जाना, और सिस्ट बन जाना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, अग्नाश्य की इतनी खराब हालत के बाद इसका असर, रोगी के गुर्दों, फेंफड़ों, हृदय और फेंफड़ों पर भी पड सकता है। यह रोगी के जानलेवा भी हो सकता है।

क्रोनिक पैन्क्रियेटाइटिस बेहद धीरे-धीरे पनपता है और यदि इसे शुरुआत में ही न रोका जाए और इससे अग्नाश्य ज्यादा क्षतिग्रस्त हो जाए तो इसका पूरी तरह से इलाज नही किया जा सकता। वहीं यदि इसकी जाँच शुरुआत में ही हो जाए तो इसे रोक जा सकता है।

क्रोनिक पैन्क्रियेटाइटिस के लक्षण भी एक्यूट के जैसे ही होते हैं। फर्क इतना है कि यह बेहद धीरे-धीरे नजर आते हैं और उसमें अचानक से उभर कर सामने आते हैं। वहीँ यदि इसकी जाँच कर इसका इलाज शुरू न किया जाए तो रोगी को पेट में दर्द रहने, उल्टी और मतली के साथ-साथ उसका वजन भी घटने लगता है। इसके अलावा, एक और बिमारी डायबिटीज के होने की आशंका भी एक्यूट पैन्क्रियेटाइटिस के मरीजों में बढ़ जाती है।



अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे !





अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे !