टाइप 2 डायबिटीज से जुड़ी नींद की परेशानियां

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20th April, 2016

Type 2 Madhumeh se Sambandhit Aam Nind ki Samasyayen | टाइप 2 मधुमेह से संबंधित आम नींद की समस्याएं | Common Sleep Problems Related to Type 2 Diabetesडायबिटीज के रोगियों में अनियमित निद्रा होती हैं । इस रोग से पीड़ित लोगों को या तो नींद नहीं आती, और कुछ ऐसे लोग होतें हैं, जो ज्यादातर सोते ही रहतें हैं। कुछ लोगों के लिए सोना बहुत मुश्किल होता है और कुछ के लिए उठना। हालाँकि इन दोनों ही प्रकार की समस्याओं के अलग-अलग कारण हो सकतें हैं। इनमें ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया, दर्द या बेचैनी, रेस्टलेस लेग सिंड्रोम, बार-बार पेशाब जाना और कुछ अन्य समस्याएं।

सोने में समस्या और टाइप 2 डायबिटीज

स्लीप एपनिया, का अर्थ सोते समय बीच-बीच में साँसों का रुकना होता है। नींद में जिस समय सांसे रुकी होती हैं, उस समय को एपनिया कहा जाता है। इसका कारण ऊपरी हिस्से में हवा में रुकावट आना होता है। कभी-कभी एपनिया आपको ज़रा ही महसूस होता है और आपकी नींद हलकी खुलती है । हालाँकि आपको ज्यादातर यह पता भी नहीं चल पाता कि आपको सोते समय ऐसी कोई समस्या भी हुई थी। लेकिन यदि आपकी नींद की जाँच किसी लैब द्वारा की जाए तो, तकनीशियन आपकी इस परेशानी को पकड़ लेगा। साथ ही वह आपके सोने के आपके मस्तिष्क की तरंगों में होने वाले बदलावों को रिकॉर्ड भी कर लेगा, जो जागने का संकेत देते हैं।

यह स्लीप एपनिया, रक्त में ऑक्सीजन की कम मात्रा के कारण होता है, क्योंकि यह रुकावट हवा को फेंफड़ों में जाने से रोकती है। इसके अलावा ऑक्सीजन की कम मात्रा मस्तिष्क और हृदय के कार्यों को भी बाधित करती है। वहीं ऐसे ज्यादातर लोग जिन्हें स्लीप एपनिया होता है, उनका वजन ज्यादातर बहुत अधिक होता है।

स्लीप एपनिया हमारे सोने के समय, और इसके चरणों में भी बदलाव कर देता है। वहीं कुछ अध्ययनों में, सोने के चरणों में होने वाले इस बदलावों का सम्बन्ध एक हार्मोन के विकास में कमी बताया है। यह एक ऐसा हार्मोन होता है, जो शरीर में वसा, मांसपेशियों, और पेट की चर्बी की संरचना में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही अध्ययनकर्ताओं ने, स्लीप एपनिया और मधुमेह के विकास और इंसुलिन प्रतिरोध (इंसुलिन का उपयोग करने के लिए शरीर की अक्षमता) के बीच भी संभावित संबंध की खोज की है।

पेरीफेरल न्युरोपैथी

पेरीफेरल न्यूरोपैथी, का अर्थ होता है, पैरों और टांगों की नसों का नष्ट हो जाना, और इसी के कारण सोने में परेशानी होनी शुरू हो जाती है। इन नसों के नष्ट हो जाने से हमें पैरों में संवेदना होनी बंद हो जाती है। पैरों में संवेदनहीनता के अलावा इसके कुछ और लक्षण जैसे, झुनझुनी, सुन्नता, जलन, और दर्द भी शुरू हो जाता है।

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम

रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम, एक खास नींद विकार है, और इसके कारण पैरों में रोगी को बहुत अलग तरह का अहसास होना शुरू हो जाता है, यहाँ तक कि उसके लिए पैरों को हिलाना भी मुश्किल हो जाता है।

यह नींद विकार (Sleep disorder), ज्यादातर अपने साथ कुछ और अन्य प्रकार की परेशानियों जैसे, टांगों में, झुनझुनी और खिंचाव, दर्द भी लेकर आता है, और इसकी वजह से रोगी को सोने और लेटने में दिक्क्त होती है।

डायबिटीज के रोगियों को सोने में परेशानी, हाइपोग्लाइसीमिया (Low blood sugar) और हाइपरग्लाइसीमिया (High blood sugar) दोनों की ही वजह से हो सकती है। हाइपोग्लाइसीमिया, की परेशानी आपको तब होती है, जब आपने काफी समय से कुछ न खाया हो, उदाहरण के तौर पर रात भर। या फिर यह तब भी हो सकता है, यदि अपने बहुत ज्यादा मात्रा में इन्सुलिन या फिर कोई दवाई ले ली हो। वहीं हाइपरग्लाइसीमिया की परेशानी तब होती है, जब आपका शुगर का लेवल समान्य से उपर पहुंच जाता है। यह बहुत ज्यादा कैलोरी के सेवन या फिर बीमारी के कारण भी हो सकता है। इसके अलावा यदि आप भावनात्मक रूप से तनाव में हैं, तो इस से भी आपके ब्लड शुगर का स्तर भी बढ़ सकता है।

मोटापा

मोटापा, या बहुत ज्यादा चर्बी, खर्राटों, स्लीप एपनिया और सोने में परेशानी को भी जन्म दे सकती है। स्लीप एपनिया के अलावा मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, हार्ट डिजीज, अत्यधिक तनाव, गठिया और स्ट्रोक को भी जन्म दे सकता है।

कैसे की जाती है सोने की बीमारी की जाँच?

आपका डॉक्टर आपसे, आपके सोने के तरीके के बारे में पूछेगा, जैसे आप को नींद ज्यादा आती है, या आप पूरी नींद नहीं ले पातें हैं। सोते समय सांस लेने में तकलीफ, टांगों में दर्द, पैरों को हिलाना या लात मारना।

ऐसे में आपका डॉक्टर आपको, किसी स्लीप स्पेशलिस्ट के पास भी भेज सकता है। स्लीप स्पेशलिस्ट आप की नींद पर एक अध्ययन करेगा, जिसे पॉलीसोमनोग्राम कहा जाता है। इसके द्वारा सोते हुए नींद को मापा जाता है। इस जाँच के द्वारा डॉक्टर आपकी समस्या का उचित और सुरक्षित इलाज ढूंढ सकता है।



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