मधुमेह रोगियों का नेत्र परीक्षण

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2nd October, 2015

Diabetes ke marijon main aankhon ki samasyaon ke liye mahatvpoorn janch | मधुमेह के मरीजों में आँखों की समस्याओं के लिए महत्वपूर्ण जाँच | Important Tests for Eye Problems in Diabetes मधुमेह रोगियों के लिए यह बेहद आवश्यक है कि वह साल में ​एक बार ​​किसी नेत्र-विशेषज्ञ से अपनी आँखों ​की जाँच जरूर करवाएं। समय पर करा ली गई इस जाँच में आँखों के रेटिनोपैथी से प्रभावित होने का पता शुरू में ही लगाया जा सकता है। जब आप नेत्र-विशेषज्ञ के पास इस परीक्षण के लिए जाते हैं तो ​उन्हें अपने मधुमेह के पूरे इतिहास और इसके चलते नेत्र-दृष्टि में आए पूरे बदलावों के बारे में बताएं। आपके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर आपकी दृस्टि का पता लगाने के लिए आपको एक चार्ट पढ़ने के लिए दिया जाएगा। ​चार्ट के बाद ​डॉक्टर आपकी आँखों के रेटिना की जांच नेत्र दर्शक (ओफ्थाल्मोस्कोप) द्वारा करेगा।

हालाँकि ​यह आवश्यक नहीं है कि मधुमेह रेटिनोपैथी की पूरी जानकारी इस सामान्य जाँच में लग जाए। और अगर ऐसा नहीं होता है तो डॉक्टर इसके लिए एक और विशेष परीक्षण भी कर सकता है। ​इस परीक्षण में सबसे पहले आँखों को अंदर से साफ़ तौर पर देखने के लिए एक विशेष प्रकार की आई ड्रॉप का प्रयोग किया जाता है, इस ड्रॉप की मदद से आँखों की पुतलियाँ फ़ैल जाती हैं जिस से एक लेंस और विशेष प्रकाश (स्लिट लैंप​) ​की मदद से रेटिना को बेहद साफ़ तौर पर देखा जा सकता है।

​रेटिना की पूरी जाँच के लिए एक और परीक्षण होता है जिसे फ्लुओरे​सीन एंजियोग्राफी ​ कहा जाता है, जिसके द्वारा रेटिना के रक्त ​वाहिकाओं को भी साफ़-साफ देखा जा सकता है। ​​इस जाँच परीक्षण द्वारा आँखों में मधुमेह के कारण आए बदलावों को आसानी से पता लगाया जा सकता है। इस परीक्षण के लिए एक हाथ की नस में फ्लोरोसेंट ​ पिली डाई​ ​का ​इंजेक्शन दिया जाता है और इसके बाद रेटिना का एक चित्र लिया जाता है, इस चित्र में रक्त वाहिकाओं में पीले रंग की रेखा नजर आ जाती है।



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