जेस्टेशनल डायबिटीज की जाँच

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19th April, 2016

Gestational Diabetes ke Liye Samanya Janch | जेस्टेशनल डायबिटीज के उपचार के लिए सामान्य जाँच | Common Tests for Gestational Diabetesजिन महिलाओं ने प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज की जाँच नहीं करवाई है, उन्हें यह जाँच 24 से 28 हफ़्तों के बीच में करवा लेनी चाहिए। जाँच का तरीका कोई भी हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लिए चाहे कोई भी टेस्ट किया जाए, डायबिटीज की पुष्टि के लिए पर्याप्त होता है।

इसके पहले विधि को दो चरणों में किया जा सकता है पहले चरण में आपको खाना- पीना छोड़ने की जरुरत नहीं होती। पहले चरण में आपको 50 ग्राम शुगर ड्रिंक पीने के लिए दिया जाता है इसके एक घंटे के बाद आपका ब्लड सैंपल लिया जाता है यदि आप की रक्त में ज्यादा शर्करा नहीं है तो इसका सीधा सा अर्थ है कि आपको जेस्टेशनल डायबिटीज नहीं है, लेकिन यदि आपके रक्त में शर्करा की मात्रा ज्यादा है तो इसके बाद आपका एक और टेस्ट इसे ओरल ग्लूकोज टोरेंट टेस्ट (OGTT) कहा जाता है वह लिया जाएगा।

OGTT टेस्ट के दौरान आप 8 घंटे पहले तक कुछ खा- पी नहीं सकते। टेस्ट के दौरान आपको सौ ग्राम शुगर वाला तरल पीने के लिए दिया जाएगा, इसके तीन घंटे के बाद आपकी रक्त में शर्करा की जाँच की जाएगी। यदि आपकी रक्त में शर्करा की मात्रा ज्यादा नहीं है इसका मतलब है आप को डायबिटीज नहीं है। यदि आपके रक्त में शर्करा की मात्रा ज्यादा है तो इसका मतलब है कि आपको जेस्टेशनल डायबिटीज है।

कुछ विशेषज्ञ इसके लिए टू स्टेप मेथड का प्रयोग नहीं करते, बल्कि टेस्ट का दूसरा वर्जन प्रयोग करते हैं। आपको टेस्ट से पहले 8 घंटे का उपवास रखना पड़ता है। इसके बाद आपको 75 ग्राम ग्लूकोज़ तरल पीने के लिए दिया जाएगा, उसके बाद पहले एक घंटे में और दूसरा दूसरे घंटे में आपकी दो ब्लड टेस्ट लिए जाएंगे। फिर देखा जाएगा की आपके रक्त में शुगर की मात्रा कितनी है, यदि टेस्ट के दौरान आपके रक्त में ग्लूकोज़ की मात्रा अधिक पाई जाती है तो आपको जेस्टेशनल डायबिटीज है, और यदि शक्कर की मात्रा कम है तो आपको जेस्टेशनल डायबिटीज नहीं है।

प्रेग्नेंसी के दौरान जाँच

डायबिटीज है तो आप का डॉक्टर आपकी हर एक विजिट के साथ आपका ब्लड प्रेशर अभी चेक करेगा इसके अलावा आपको अपनी पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान अपने बच्चे की के स्वास्थ्य की जानकारी के लिए बहुत से अन्य टेस्ट भी करवाने होंगे।

जैसे कि –

  • होम ब्लड शुगर मॉनिटर:- इस टेस्ट से आपको घर पर रहकर ही इस बात की जानकारी मिल जाती है कि आपका ब्लड शुगर नियंत्रण में है या नहीँ।
  • फेटल अल्ट्रासाउंड:- टेस्ट से आपके बच्चे के वजन और स्वास्थ्य की जानकारी मिलती है।इसके अलावा इस अल्ट्रासाउंड टेस्ट के द्वारा आपके बच्चे की आकार और पेट की भी जांच हो सकती है। इसके द्वारा मिली जानकारी के आधार पर ही आपका डॉक्टर आपके स्वास्थ्य के लिए जरुरी देखभाल निर्धारित करता है।
  • नॉन स्ट्रेस टेस्ट:- इस टेस्ट के द्वारा बच्चे की धड़कन और उसके हिलने डुलने की जानकारी मिलती है।

डॉक्टर आपकी प्रेग्नेंसी के दौरान हेमोग्लोबिन या हेमोग्लोबिन से मिलते-जुलते दूसरे टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं। इमरजेंसी टेस्ट के द्वारा पहले दो से तीन महीने में आपके औसत प्लेट शुगर लेवल की जाँच की जाती है।

लेबर और डिलिवरी के दौरान की जाने वाली जाँच

आपकी डिलीवरी के दौरान डॉक्टर आपके बच्चे और आप की जाँच को बेहद सावधानी और बारीकी से करते हैं।

जैसे कि –

  • आपके प्रसव के दौरान सेटल हॉट मॉर्निंग टेस्ट के द्वारा आपके बच्चे कि बारीकी से जाँच की जाती है।
  • इसके अलावा आपका ब्लड शुगर टेस्ट किया जाता है जिससे कि यह जानकारी रहे कि आपका ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में है।

डिलिवरी के बाद टेस्ट

आपके बच्चे के जन्म के बाद कई बार आपके ब्लड शुगर लेवल की जाँच की जाती है यहाँ तक कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद भी कई घंटे तक आपके ब्लड शुगर लेवल पर नियमित तौर पर नजर रखी जाती है।

फॉलो अप

बच्चे के जन्म के बाद आपकी जेस्टेशनल डायबिटीज खुद ही नियंत्रित हो जाती है। लेकिन इसके बाद आप में दूसरी प्रेग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज के दोबारा होने और टाइप टू डायबिटीज के होने की संभावनाएँ भी बढ़ जाती है, हो सकता है बच्चे के जन्म के बाद 6 से 12 हफ्तों के बीच आपको लगातार ग्लूकोज टेस्ट करवाना पड़े या फिर जब आप बच्चे को अपना दूध पिलाना बंद कर दें तो, तो आपको यह जाँच करवानी पड़े।

यदि इन जाँच की रिपोर्ट सामान्य आती है तो आपका डॉक्टर आपको हर तीन साल में एक बार टाइप टू डायबिटीज के लिए जाँच करवाने की सलाह दे सकते हैं। उस समय आपके ब्लड शुगर का लेवल सामान्य हो लेकिन भविष्य में अपने डायबिटीज के होने की संभावनाएँ ज्यादा होती है इसके अलावा यदि आप नियमित तौर पर व्यायाम करती हैं। और उचित खानपान लेती हैं तो इस से टाइप टू डायबिटीज के होने की संभावनाएँ कम की जा सकती हैं।

यदि आप दोबारा से दूसरे बच्चे की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए बेहतर होगा कि आप प्रेग्नेंसी से पहले प्रेगनेंसी के बाद डायबिटीज की जाँच करवाएँ।



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