डायबिटीज इन्सिपिड्स क्या है?

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1st September, 2015

Madhumeha Insipidus ke Baare mein Pata | मधुमेह इन्सिपिड्स के बारे में पता | Know about Diabetes Insipidusक्या है इन्सिपिड्स डायबिटीज?

बहुत से लोगों ने ज्यादातर दो ही प्रकार की डायबिटीज के बारे में सुना ही होगा। लेकिन इनके अलावा भी एक और प्रकार की डायबिटीज होती है इन्सिपिड्स डायबिटीज। इस डायबिटीज का हाई ब्लड शुगर से कोई लेना देना नहीं होता, बल्कि इस बीमारी में अत्यधिक प्यास लगना और यूरिन आना जैसी समस्याएं होती हैं।

इन्सिपिड्स डायबिटीज का शरीर पर प्रभाव?

हमारा शरीर एक पदार्थ, जिसे एंटी- डाइयुरेटिक हार्मोन (ADH) कहते हैं, का निर्माण करता है। यह मस्तिष्क के एक हिस्से में बनता है, जिसे हाइपोथेलेमस कहा जाता है। हाइपोथेलेमस में बनने के बाद यह पीयूष ग्रंथि (Pituitary gland) में इकट्ठा हो जाता है। यही से गुर्दों को पानी को संरक्षित करने का सन्देश मिलता है, और इसी से शरीर यूरिन के प्रति सचेत रहता है।

जब आपको प्यास लगती है, और शरीर में पानी की कमी महसूस होती है, तो आपके ADH का स्तर बढ़ने लगता है। इससे आपकी किडनियां ज्यादा से ज्यादा पानी को अवशोषित करती हैं और उसे यूरिन के रास्ते बाहर निकाल देती हैं। यदि आप खूब सारा पानी पीतें हैं, तो ADH स्तर गिर जाता है और इसका नतीजा साफ़ और पतले यूरिन के रूप में सामने आता है।

जब शरीर उचित मात्रा में ADH का निर्माण नहीं कर पाता, तो इस स्थिति को सेंट्रल डाइबिटीज इन्सिपिड्स (Central Diabetes Insipidus) कहा जाता है। वहीं यदि ADH का निर्माण उचित मात्रा में हो भी रहा हो, लेकिन आपकी किडनियां इसका प्रयोग उचित प्रकार से नहीं कर पा रही हो, तो इसे नेफ्रोगेनिक डायबिटीज इन्सिपिड्स (Nephrogenic Diabetes Insipidus) कहा जाता है।

एक और स्थिति जिसमें यदि शरीर पानी को संरक्षित नही कर पाता, तो भी नतीजा एक ही होता है। जब गुर्दें पानी को संरक्षित नहीं कर पाते, और आपमें पानी की कमी हो जाती है, तो इसमें यूरिन पीला या फिर पतला हो सकता है।

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