डायबिटीज शॉक और इंसुलिन रिएक्शन क्या है?

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3rd September, 2015

Gambhir Diabetic Hypoglycemia ke Lakshan aur Upchar | गंभीर डायबिटीज हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण और उपचार | Severe Diabetic Hypoglycemia Symptoms and Treatmentसीवियर हाइपोग्लाइसीमिया या डायबिटीज शॉक, डायबिटीज के रोगी के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है। इसे इन्सुलिन रिएक्शन भी कहा जाता है। यह शरीर में बहुत अधिक इंसुलिन के कारण होता है। यह कभी भी, आपके सिस्टम में असंतुलन होने से, चाहे वह इंसुलिन के बीच हो, आप जो भोजन की मात्रा लेते है उसके कारण, या आपके शारीरिक गतिविधि के स्तर, के कारण होता है। यह इस कारण भी होता है कि आप ऐसा सोच कर यह सब करते है कि आप इसके द्वारा अपना डायबिटीज मैनेज कर रहे है।

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डायबिटीज शॉक के लक्षण शुरुआत में बहुत सामान्य से होते है। लेकिन इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अगर इनका जल्द उपचार नहीं किया जाये तो हाइपोग्लाइसीमिया एक गंभीर समस्या उत्पन कर सकती है। इसके कारण आप बेहोश हो सकते है और आपको तुरंत आपात्कालीन चिकित्सा की जरुरत पड़ सकती है। डायबिटीज शॉक से आप कोमा में भी जा सकते है और इससे मौत भी हो सकती है। इसलिए यह बात बहुत महत्त्वपूर्ण है कि हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण को केवल आप ही नहीं, आपके परिवार और आस पास के लोगो को भी इसे पहंचानना आना चाहिए और यह भी पता होना चाहिए की इस समय क्या करें। जिससे आपका जीवन बचाया जा सकें।

हाइपोग्लाइसीमिया क्या है ?

हाइपोग्लाइसीमिया में आपका ब्लड शुगर का स्तर कम हो जाता है। हमारे शरीर की कोशिकायें, ऊर्जा के लिए, कार्बोहाइड्रेट से शुगर का प्रयोग करती हैं। यह काम अग्न्याशय में पाया जाने वाला हॉर्मोन, इन्सुलिन करता है। इन्सुलिन, इस शुगर को तोड़कर हमारी कोशिकाओं तक लेकर जाता है। यह ब्लड शुगर को बहुत ज्यादा बढ़ने से रोकता है।

वहीं रक्त में शर्करा के स्तर को सामान्य बना कर रखना बहुत जरुरी होता है। जब शरीर में शर्करा का स्तर ज्यादा हो जाता है तो, इसके कारण घातक रूप से पानी की कमी हो जाती है। समय के साथ-साथ शरीर में शुगर की ज्यादा मात्रा, शरीर के अंगों जैसे आँखों, हृदय और तंत्रिका तंत्र को हानि पहुंचा सकती है।

सामान्य रूप से, इन्सुलिन हमारे शरीर में, बनता रहता है, और यह प्राकर्तिक इन्सुलिन हमारे ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। यदि आपका शरीर इन्सुलिन को प्राकर्तिक तौर पर नहीं बना पाता, या फिर शरीर इसे पूरे तरीके से प्रयोग नहीं कर पाता, तो ऐसे में हमें बाहर से इन्सुलिन लेने की जरूरत होती है। इसके लिए हम दवाइयों या इंजैक्शन का प्रयोग करतें हैं। इसीलिए यदि आपके शरीर में पर्याप्त इन्सुलिन नहीं बन पा रहा है तो ऐसे में यह आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप नियमति तौर पर इन्सुलिन लें।

इन्सुलिन को कब और कैसे लेना है और कितनी मात्रा में लेना है, यह आपके खान-पान पर भी निर्भर करता है। इसके अलावा आपका व्यायाम करना और शारीरिक तौर पर सक्रीय रहने पर भी इन्सुलिन का लिया जाना निर्भर करता है। हाइपोग्लाइसीमिया मुख्य रूप से, शारीरिक क्रिया में, बहुत अधिक इंसुलिन के लिए एक प्रतिक्रिया है। इन्सुलिन बेहद तेजी से ब्लड ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करता है। वहीं जब आप खाना नहीं खातें हैं, और व्यायाम करतें हैं, तो आपका शरीर बेहद तेजी से शुगर को प्रयोग करना शुरू कर देता है। इसी कारण ब्लड शुगर का स्तर बेहद तेजी से कम हो जाता है।

हाइपोग्लाइसीमिया के कारण

हाइपोग्लाइसीमिया और ब्लड शुगर कम होने के कई कारण हो सकते हैं:

  • शारीरिक तौर पर, सामान्य से ज्यादा एक्टिव होना।
  • भोजन छोड़ देना।
  • अपनी सामान्य खाने-पीने की आदतों में अचानक से बदलाव कर देना।
  • इन्सुलिन और दवाई का बताए गए समय के अनुसार न लेना।
  • बिना कुछ खाए, बहुत ज्यादा एल्कोहल लेना।

क्या हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण, हो सकतें हैं डायबिटिक शॉक के संकेत?

हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षणों को सामान्य, मध्यम, और गंभीर रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

हाइपोग्लाइसीमिया के सामान्य लक्षण

  • चक्कर आना
  • चिड़चिड़ापन
  • व्यवहार में अचानक से परिवर्तन आना
  • भूख
  • अस्थिरता
  • पसीना
  • दिल की तेज़ धड़कन

कुछ अन्य लक्षण

  • भ्रम की स्थिति
  • सिरदर्द
  • सामंजस्य न बिठा पाना

गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण

  • बेहोशी और अचेतन होना
  • मस्तिष्क पर नियंत्रण न होना
  • कोमा

हाइपोग्लाइसीमिया, रात में सोते समय भी हो सकता है। जिसके लक्षण निम्न है

  • नींद में रोना
  • बुरे सपने
  • पसीने से कपड़ें और चादर का भीग जाना
  • चलने में थकान, चिड़चिड़ापन या भ्रमित होना

यदि आपको हाइपोग्लाइसीमिया के संभावित लक्षण नज़र आते है, तो आपको तुरंत अपने ब्लड शुगर के स्तर की जाँच करनी चाहिए, ताकि वह बहुत कम ना हो। अगर आपका ब्लड शुगर का स्तर बहुत कम है तो ऐसे में आपको जल्द से जल्द इमरजेंसी ट्रीटमेंट का सहारा लेना चाहिए। यदि आपको महसूस हो रहा है कि आपका ब्लड शुगर बहुत कम हो गया है, और आप घर पर इसकी जांच नहीं कर पा रहे हैं, तो बिना अपना वक्त गवाएं , इमरजेंसी ट्रीटमेंट का सहारा लें।

हाइपोग्लाइसीमिया का उपचार

यदि आपका हाइपोग्लाइसीमिया, सामान्य या माध्यम स्तर का है, तो इसका सबसे सरल उपाए कि आप तुरंत शुगर ड्रिंक या खाना खा लें। आप दुकान पर उपलब्ध ग्लूकोस के टेबलेट का भी सेवन कर सकते है, और अगर आप चाहें तो आधा कप फलों का जूस या छः कैंडी भी ले सकते है।

शुगर लेवल को बढ़ाने में लाभदायक कुछ स्नैक्स

  • एक कप रेगुलर सोडा (डाइट सोड़ा नहीं)
  • एक कप दूध
  • 1 चम्मच चीनी
  • 1 चम्मच शहद
  • एक-चौथाई कप किशमिश
  • 2 बड़े पानी में घुले, शुगर क्यूब्स

यदि आपका ब्लड शुगर लेवल कम हो गया है, तो आप अपने डॉक्टर या किसी आहार विशेषज्ञ से मिलकर कुछ ऐसे खाद्य-पदार्थों की जानकारी ले सकते हैं, जिस से आपका शुगर लेवल तेजी से सामान्य हो जाए। वहीं यदि आपका शुगर लेवल ज्यादा है, तो भी आपके लिए यह निर्णय बेहद फायदेमंद रहेगा।

यदि आपने स्नैक ले लिया है, तो इसके 15 मिनट के बाद अपना ब्लड शुगर का लेवल एक बार फिर से चेक करें। यदि यह अभी भी कम है तो एक बार फिर से कोई अन्य स्नैक खा लें। इसके बाद दोबारा से ब्लड शुगर चेक करें। आपको ऐसा तब तक करना है, जब तक कि आपका ब्लड शुगर का स्तर सामान्य रेंज में न आ जाए।

यदि आपको, डायबिटीज में बेहोशी जैसी परेशानी भी हो रही है, तो ऐसे में बिलकुल भी लापरवाही न बरतें और इसके लिए तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। वहीं जिन लोगों के साथ आप रह रहें हैं, या काम कर रहें हैं, यह जरूरी है कि उन लोगों को भी आपकी इस स्थिति की जानकारी होनी चाहिए। फिर चाहे वह आपके अपने परिवार वालें हों या फिर दोस्त और रिश्तेदार। यदि उन्हें आपकी डायबिटिक शॉक की जानकारी होगी तो वह उचित कदम उठा सकेंगे।

बेहतर होगा कि यदि आप अपने डॉक्टर से ग्लूकागन बचाव किट के बारे में पूछ लें। अपने साथ-साथ अपने सगे- संबंधियों और परिवार वालों को भी इसके प्रयोग की जानकरी दें। ग्लूकागन एक प्राकर्तिक हार्मोन है, जो आपके शरीर में तेजी से बढ़ने वाली शुगर का कारण बनता है। यदि आप बेहोश हैं, तो इमरजेंसी में जाने से पहले, कोई भी आपको ग्लूकागन का इंजैक्शन दे सकता है। इस से इमरजेंसी में पहुंचने से पहले आपकी स्थिति को संभाला जा सकता है।

क्या रोका जा सकता है डायबिटिक शॉक?

कुछ ऐसी चीजें हैं, जिनके द्वारा आप डायबिटिक शोक या हाइपोग्लाइसीमिया के खतरे को कम कर सकतें हैं। इसमें सबसे जरूरी चीज है आपको बताई गई दवाइयों के प्रयोग को समझना, फिर चाहे वह इन्सुलिन हो या फिर दवाएं।

अपने डॉक्टर से यह भी जानकारी लें ले कि आपको दवाइयाँ कब और कैसे लेनी है। हमेशा बताए गए समय पर बताई गई डोज़ ही लें। वहीं अपने डॉक्टर से अपनी दवाइयों के बदलाव के बारे में भी जानकारी लें। इनकी डोज़ और समय, या दवाई में कब बदलाव करनें हैं।

इसके अलावा अपने खान-पान पर भी नजर रखें, आपको कब और कितनी मात्रा में खाना है इसकी जानकारी भी आपको होनी चाहिए। इसके अलावा कभी भी अपने खान-पान और स्नैक्स में कटौती न करें। खासकर यदि आप सोने जा रहें हैं, या फिर व्यायाम करने जा रहें हैं। अपने आहार-विशेषज्ञ से उन स्नैक्स के बारे में जानकारी लें ले जो हाइपोग्लाइसीमिया की समस्या में फायदेमंद हो सकतें हैं। वहीं यदि आप बहुत ज्यादा शारीरिक कार्य कर रहें हैं, तो उचित मात्रा में कार्बोहाइड्रेट लेना न भूलें।

साथ ही अपना ब्लड शुगर लेवल बार-बार चेक करते रहें। इसे व्यायाम शुरू करने से पहले भी चेक करें और बाद में भी। कुछ खाने के बाद भी चेक करें और पहले भी।

यदि आप एल्कोहल लेतें हैं, तो इसके बारे में अपने डॉक्टर से जरूर बात करें। ऐसा करने पर आपका डॉक्टर आपको उचित मात्रा में और सुरक्षित तरीके से एल्कोहल के सेवन की सलाह दे सकता है। ऐसा करने से आप अपने हाइपोग्लाइसीमिया के ख़तरे को कम कर सकतें हैं।

डायबिटीज में हाइपोग्लाइसीमिया के लिए जरुरीं ख़ास सावधानियां?

डायबिटीज के रोगी को कभी भी हाइपोग्लाइसीमिया जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि आप हमेशा अपने पास कुछ स्नैक्स रखे ताकि जैसे ही आपको लगे कि आपका शुगर लेवल कम हो गया है तो आप इनका सेवन कर सकें।

यदि आपको हाइपोग्लाइसीमिया है, या होने की सम्भावना है, तो कार ड्राइव ना करें। क्योकि ऐसे में डायबिटीज शॉक के कारण, आप बेहोश हो सकतें हैं और आपका एसिडेंट हो सकता है। यदि आप ड्राइविंग कर रहे है तो तुरंत रुक कर अपना ब्लड शुगर लेवल की जाँच करें। यदि आपका शुगर लेवल कम है तो कुछ स्नैक्स लें ले और तब तक ड्राइविंग ना करें, जब तक की आपका शुगर लेवल सामान्य ना हो जाएँ। I

हमेशा अपने साथ मेडिकल ID कार्ड रखे, जिससे आपके आस पास के लोगो को यह पता चल जाये कि आपको डायबिटीज है। उस कार्ड में इस बात का उल्लेख होना भी बहुत जरुरी है कि अगर आप बेहोश हो जाये, तो तुरंत आपको क्या ट्रीटमेंट दिया जाये ताकि आपकी अवस्था ज्यादा बिगडें नहीं।

इस बात का ध्यान रखें कि आपके परिवार को हाइपोग्लाइसीमिया की जानकारी होनी चाहिए, ताकि उन्हें पता हो कि यदि आपको यह शॉक लगता है तो उन्हें क्या करना है, और क्या नहीं करना है। उन्हें आपके इन्सुलिन की जगह की भी जानकारी होनी चाहिए। ऐसे में यदि आप बेहोश हो जातें हैं, तो उन्हें यह किस तरह से प्रयोग करना है, इसकी भी जानकारी उन्हें होनी चाहिए। इस तरह की परेशानी से लड़ने का सबसे बेहतर तरीका यही है कि आप अपने डॉक्टर के बताएं अनुसार, स्वास्थ्य से जुड़ी सभी योजनाओं का नियमित तौर पर पालन करें। इस से न सिर्फ आपके हाइपोग्लाइसीमिया का ख़तरा कम हो जाएगा, बल्कि इस से लम्बे समय से चली आ रही दूसरी परेशानियां भी नियंत्रित रहेंगी और भविष्य में सामने आने वाली परेशानियों से भी बच जाएंगे।



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