कैसे की जाती है सिस्टोस्कॉपी?

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30th November, 2015

Kaise ki jati hai Cystoscopy Janch? | कैसे की जाती है सिस्टोस्कॉपी जाँच? | How is a Cystoscopy done?सिस्टोस्कॉपी, जाँच यूरोलोजिस्ट (urologist) के द्वारा की जाती है। इस दौरान यूरोलोजिस्ट के साथ एक या दो असिटस्टेंट (सहायक) भी हो सकते हैं। यह जाँच, अस्पताल या डॉक्टर के ऑफिस में भी की जा सकती है।

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इस दौरान आपको अपने कपड़े उतारने पड़ेंगे, और आपको ढकने के लिए अस्पताल की तरफ से कपड़ा दिया जाएगा।

जांच के एक घंटे पहले, आपको सीडेटिव दिया जाएगा इससे आप सहज महसूस करेंगे। इसके बाद आपकी बांह की नस में, एक सुईं को ड़ाला जाएगा, और इसके जरिये आपको कुछ दवाइयाँ और तरल दिए जाएंगे। आपको एक टेबल पर, घुटने मोड़ कर पीठ के बल लेटा दिया जाएगा। आपके पैरों को एक रकाब (stirrups) में रख दिया जाएगा। इसके बाद जनन अंग को एंटीसेप्टिक सोल्युशन के द्वारा साफ़ किया जाएगा। आपके पेट और जंघाओं को एक कपड़े से ढक दिया जाएगा।

जाँच प्रक्रिया शुरू करने से पहले आपको कोई एक एनेस्थेसिया दिया जाएगा-

  • लोकल एनेस्थेसिया- इस प्रकार के एनेस्थेटिक को मूत्रमार्ग में प्रवेश कराया जाता है।
  • जनरल एनेस्थेटिक- इसमें, या तो आपको नस के द्वारा दवाई दी जाती है, या फिर गैस को एक मास्क के जरिये आपको सुंघाया जाता है। कभी-कभी इन दोनों तरह के प्रकारों की भी जरूरत पड़ जाती है।
  • स्पाइनल एनेस्थेटिक- इसमें डॉक्टर सबसे पहले, आपकी कमर के एक हिस्से को सुन्न करता है, और उसके बाद वहां सुईं को प्रवेश कराया जाता है। यह सुईं रीढ़ की हड्डी में से डाली जाती है और इसके द्वारा एनेस्थेटिक को इंजेक्ट कराया जाता है। इस दौरान आप अपनी टाँगें हिला-डुला नहीं पाएंगे। क्योंकि दवाई के द्वारा आपकी टांगों को सुन्न कर दिया जाता है।

जब आपके ऊपर, एनेस्थेटिक का प्रभाव हो जाता है, तो साइटोस्कॉप ट्यूब को मूत्रमार्ग में धीरे-धीरे प्रवेश कराया जाता है, और उसे धीरे-धीरे ब्लैडर, यानी मूत्राशय में पहुंचाया जाता है। यदि इस दौरान आपका मूत्रमार्ग बहुत संकीर्ण पाया जाता है, तो इस ट्यूब से पहले एक अन्य छोटे टूल को प्रवेश कराया जाता है। इस से उस जगह पर ज्यादा स्थान बन जाता है।

इसके बाद डॉक्टर, या तो स्टेराइल पानी या नमक के पानी को डालते हैं, इससे उस जगह पर काफी जगह भी बन जाती हैं, और उस स्थान को और भी ज्यादा साफ़ तरीके से देखा जा सकता है। इस के लिए डॉक्टर अंदर दवाई इंजेक्ट करा कर संक्रमण के ख़तरे को भी कम करते हैं।

इसके अलावा, जरूरत पड़ती है तो डॉक्टर एक छोटे से टूल को अंदर प्रवेश करा कर बायोप्सी के लिए उत्तकों का नमूना (सैम्पल) भी निकाल सकते हैं। इसके बाद इस सैम्पल को जाँच के लिए लैब में भेज दिया जाता है। इस ट्यूब को ब्लैडर में, 2 से 10 मिनट तक रखा जाता है। लेकिन यदि इस दौरान, एक्स रे जाँच भी की जाए तो, इसमें 45 मिनट का समय भी लग सकता है।

यदि इस दौरान आपको लोकल एनेस्थेटिक दिया जाता है, तो आप जाँच के तुरंत बाद उठ सकते हैं। लेकिन यदि आपको जनरल एनेस्थेटिक दिया जाता है, तो आपके होश में आने तक आपको रिकवरी रूम में रखा जाता है। इसमें कम से कम एक घंटे तक का समय लग सकता है। जैसे ही आप होश में आते हैं, आप खाना-पीना शुरू कर सकते हैं। इस दौरान आपको खाने-पिने में, कोई परेशानी नहीं होती। वहीं यदि आपको, स्पाइनल एनेस्थेटिक दिया गया था तो, जब तक आप टांगों को हिलाना-डुलाना शुरू नही कर देते आपको रिकवरी रूम में रखा जाएगा। इसमें भी एक घंटे तक का समय लग जाता है।

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