सिटी स्कैन से संबंधित कुछ महत्त्वपूर्ण जानकारियां

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23rd June, 2016

CT Scan se sambandhit tathya | सिटी स्कैन से संबंधित तथ्य | facts related to CT Scansकभी-कभी सिटी स्कैन का परिणाम, अन्य एक्स-रे टेस्ट जैसे- मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) और अल्ट्रासाउंड स्कैन के परिणाम से अलग आता है। ऐसा इसलिए होता है क्योकि सिटी स्कैन, स्कैनर के माध्यम से अलग-अलग कोणों से शरीर के विभिन्न हिस्सों की तस्वीर लेता है, इसे कंप्यूटर बाद में एक साथ जोड़ कर दिखाता है।  

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आम तौर पर, सिटी स्कैन में प्रयोग होने वाली एक्स-रे का स्वास्थ्य पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि एक्स-रे का स्वास्थ पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है, विशेषकर बच्चों, किशोरों और बार- बार जांच करवाने वाले व्यक्तियों पर। इसलिए इस बारे में रोगी को अपने डॉक्टर से जानकारी ले लेनी चाहिए। यदि संभव हो तो डॉक्टर से अल्ट्रासाउंड टेस्ट के बारे में भी जानकारी ले लें, क्योकि इससे, सिटी स्कैन की तुलना में रोगी को कम रेडिएशन एक्सपोज़र होता है और परिणाम भी सिटी स्कैन जैसे ही आते हैं।

छोटे बच्चों के सिटी स्कैन के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना होता है। जैसे- जाँच के दौरान कैसे अपनी साँस पर नियंत्रण रखना है या स्कैनर के अंदर जाते समय बच्चा डरे नहीं। कभी-कभी डॉक्टर बच्चें को नींद आने वाली दवाइयाँ भी दे देते हैं। इसलिए यदि किसी बच्चें का सिटी स्कैन होना है तो डॉक्टर से पूरी जानकारी ले लें।

कुछ डॉक्टर कोरोनरी धमनी रोग और कैंसर का पता लगाने के लिए, पुरे शरीर का सिटी स्कैन करवाते हैं। लेकिन बहुत से विशेषज्ञों का यह मानना है कि कोरोनरी धमनी रोग और कैंसर का पता लगाने के लिए, पुरे शरीर का सिटी स्कैन करने की कोई जरुरत नहीं होती। इससे कुछ लाभ नहीं है, क्योकि पुरे शरीर का सिटी स्कैन करवाना बहुत मँहगा होता है और इससे शरीर का अनावश्यक ही परीक्षण या सर्जरी करनी पड़ती है। यहाँ तक कि बहुत ज्यादा रेडिएशन एक्सपोज़र के कारण, रोगी में कैंसर होने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। इसलिए बहुत से डॉक्टर बिना किसी वजह के पुरे शरीर का सिटी स्कैन नहीं करवाते, जब तक कि इसकी आवश्यकता न हो।



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