ब्रेन नैट्रियूरेटिक पेप्टाइड (BNP) टेस्ट क्या है?

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19th August, 2015

Untitled design (41)ब्रेन नैट्रियूरेटिक पेप्टाइड (BNP) टेस्ट के द्वारा रक्त में BNP हार्मोन की जांच की जाती है। BNP का निर्माण हृदय द्वारा ही किया जाता है और रक्त में इसकी मात्रा से जानकारी मिलती है, कि हृदय किस तरह से काम कर रहा है। सामान्य तौर पर रक्त में बेहद कम मात्रा में BNP पाया जाता है, लेकिन यदि हृदय को काफी लम्बे समय तक काफी दबाव में कार्य करना पड़ा है और हृदयघात जैसी स्थिति बन गई है तो इसका मतलब है कि हृदय ज्यादा मात्रा में BNP निकाल रहा है। जिसके कारण रक्त में इसकी मात्रा बढ़ गई है। लेकिन हृदयघात के उपचार के समय रक्त में BNP की मात्रा घटने लगती है।

क्यों किया जाता है टेस्ट?

  • ब्रेन नैट्रियूरेटिक पेप्टाइड (BNP) टेस्ट निम्न कारणों से किया जाता है-
  • हृदय विफलता की जाँच के लिए, यदि आपको साँस लेने और हाथों-पैरों में सूजन जैसी समस्याएँ आ रहीं हैं तो आपका डॉक्टर सोच सकता है कि आपको हृदय विफलता हो सकता है।
  • पता लगाने के लिए कि हृदय विफलता कितना घातक है।
  • उपचार के प्रभाव का पता लगाने के लिए।

कैसे करें टेस्ट की तैयारी?
हो सकता है कि आपका BNP टेस्ट लेने से पहले आपका डॉक्टर आपको 8-12 घंटे का उपवास रखने के लिए कहे। वहीं हो सकता है कि डॉक्टर टेस्ट से पहले आपकी हृदय विफलता की दवाई भी बंद करवा दे। यदि ऐसा होता है तो आपको अपने डॉक्टर के निर्देश का पालन करना होगा।

कैसे लिया जाता है टेस्ट?

  • इसके लिए पहले डॉक्टर आपकी बाजू को एक रबर बैंड से कसकर बांध देगा। इस से आपका रक्त का प्रवाह रुक जाएगा। इस से रबर बैंड के नीचे की नसें साफ़ दिखाई देने लगेंगी।
  • इसके बाद रक्त का नमूना लेने की जगह से एकलोहल से सफाई की जाएगी।
  • इसके बाद सुईं को नस में डाला जाएगा, हो सकता है कि इसके लिए एक से अधिक सुईंयों की भी जरूरत पड़ जाए।
  • इस सुईं से रक्त निकाल कर एक ट्यूब में भरा जाता है।
  • पर्याप्त मात्रा में रक्त निकालने के बाद सुईं निकाल ली जाती है और उसके बाद बैंड को भी बाजू से खोल दिया जाता है।
  • इसके बाद एक गौज या रबर बॉल को हटाई गई सुईं की जगह पर रख दिया जाता है।
  • यदि आपको कोई और समस्या है या आप डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवाई ले रहें हैं या कोई और बात जो डॉक्टर को बतानी जरुरी हो उसके बारे में अपने डॉक्टर से चर्चा जरुर करें।

कैसा महसूस होता है?
हो सकता है कि रक्त का नमूना देने में आपको ज्यादा समस्या ना हो। या फिर हो सकता है कि सुईं नस में जाने के साथ एक कांटें जैसी चुभन आपको महसूस हो। वहीं कुछ लोगों को इस स्थिति में इस से ज्यादा दर्द भी महसूस हो सकता है। लेकिन ज्यादातर लोगों को दर्द महसूस नहीं होता या फिर थोड़ी सी असहजता महसूस हो जाती है। रक्त का नमूना देने में होने वाला दर्द नमूना लेने वाले प्रोफेशनल या फिर आपके खुद के स्वास्थ्य पर भी निर्भर करता है।

जोखिम
नस से रक्त का नमूना लेने में कोई जोखिम नहीं होता। लेकिन कभी-कभी कुछ छोटी-मोटी समस्याएं आ सकती है। जैसे:

  • हो सकता है कि रक्त निकालने की जगह पर थोड़ी खरोच सी बन जाती। लेकिन उसकी गर्म सिकाई से वह दूर हो जाती है।
  • वहीं कुछ केसों में रक्त लेने के बाद सूजन भी आ जाती है। इस स्थिति को शिरा की दीवार में सूजन कहा जाता है। इस तरह की परिस्थितयों में भी कुछ देर गर्म सिकाई करने के बाद आराम मिल जाता है।
  • वहीं एक समस्या रक्त का लगातार बहना भी हो सकती है। ऐसी समस्या उन लोगों में हो सकती है जो रक्त पतला करने वाली दवाइयों जैसे एस्पिरिन, वारफरीन (कॉमडीन) का प्रयोग कर रहें हैं। यदि आप ऐसी कोई दवाई ले रहें हैं तो इसके बारे में टेस्ट से पहले अपने डॉक्टर को जरूर बताएं।

नतीजे:
ब्रेन

नाइट्रीयूरेटिक पेप्टाइड टेस्ट रक्त में BNP की जाँच के लिए किया जाता है। BNP की मात्रा उम्र के साथ बढ़ती है और यह महिलाओं में पुरषों के मुकाबले ज्यादा होती है।नीचे जो सामान्य स्तर BNP का दिया हुआ है, उसे रेफरेंस रेंज कहा जाता है। इसका प्रयोग सिर्फ एक गाइड के तौर पर किया जाता है। यह रेंज हर एक लैब (प्रयोगशाला) की एक जैसी हो यह जरुरी नहीं। हो सकता है कि एक लैब की सामान्य रेंज दूसरी लैब से ज्यादा हो। इसीलिए आपका डॉक्टर आपके स्वास्थ्य और आपसे जुड़े तत्वों के आधार पर ही एक नतीजे पर पहुंचता है।

एन-टर्मिनल प्रो ब्रेन नेट्रीयूरेटिक पेप्टाइड (NT-proBNP) की जाँच BNP की जगह पर की जा सकती है। हालाँकि NT-proBNP टेस्ट BNP से अलग होता है लेकिन इन दोनों में एक जैसी ही जानकारी मिलती है।

BNP की रक्त में बढ़ी हुई मात्रा मतलब:

  • शरीर में बढ़ी हुई तरल पदार्थ की मात्रा या हृदय के भीतरी भाग पर दबाव।
  • हृदय विफलता की तीव्रता का पता लगाने में मददगार।
  • हृदय विफलता के रोगियों में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण।
  • किडनी डायलसिस करवा रहे लोगों में जल्दी हृदय विफलता होने की सम्भावना।

टेस्ट पर दूसरी बिमारियों के प्रभाव
कुछ बीमारियां जिनके कारण BNP टेस्ट पर असर पड़ सकता है:

  • फेफड़ों की बीमारी, जैसे वातस्फीति या क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) का होना।
  • गुर्दा रोग, किडनी डायलिसिस, या दिल का दौरा।
  • उम्र, बीएनपी बढ़ती उम्र के साथ बढ़ता तो है लेकिन जब तक हृदय विफलता ना हो तब तक इसका पता नहीं चलता।

यह भी जाने

  • हृदय विफलता के उपचार के बाद BNP की रक्त में मात्रा खुद ब खुद प्रभावित हो जाती है। भले ही इसकी मात्रा कम हो जाती हो लेकिन हृदय विफलता से उबरने तक यह सामान्य से अधिक ही रहती है। आपका डॉक्टर आपके हृदय विफलता के उपचार के प्रभाव की जानकारी के साथ-साथ BNP टेस्ट भी करेगा।



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