क्रिएटिनिन एंड क्रिएटिनिन क्लियरेंस क्या है?

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20th August, 2015

Untitled design (57)क्रिएटिनिन एवं क्रिएटीन क्लियरेंस (Creatinine and Creatinine Clearance) परीक्षण हमारे रक्त एवं पेशाब में क्रिएटिनिन नामक अनुपयोगी पदार्थ के स्तर की जाँच करते हैं। इन दोनों परीक्षणों के द्वारा किडनी (गुर्दे) ठीक प्रकार से कार्य कर रहें हैं या नहीं इसकी जानकारी मिल जाती है।

जब मेटाबोलिज्म (चयापचय) प्रकिया द्वारा भोजन ऊर्जा में बदलता है, तब एक अन्य पदार्थ क्रिएटीन का निर्माण होता है। यह क्रिएटीन टूट कर क्रिएटिनिन में बदल जाता है। इसके बाद गुर्दे इस क्रिएटिनिन को रक्त में छान कर यूरिन के जरिये बाहर निकाल देते हैं। यदि आपकी किडनी ख़राब हो गई हैं और वे ठीक से काम नहीं कर रही हैं, तो क्रिएटिनिन की मात्रा पेशाब में कम और रक्त या खून में ज्यादा हो जाती है।

इसके लिए तीन तरह के टेस्ट (परीक्षण) किये जा सकते हैं:

रक्त क्रिएटिनिन स्तर यह स्तर बताता है, कि आपकी किडनी कितनी अच्छी तरह से कार्य कर रही है। उच्च स्तर का अर्थ है कि आपकी किडनी उस तरह से कार्य नहीं कर रही हैं, जैसे उन्हें करना चाहिए। खून में क्रिएटिनिन की मात्रा आंशिक रूप से आप के शरीर में उपस्थित पेशीय उत्तकों या मसल टिश्यू पर निर्भर करती है। पुरुषों में महिलाओ की तुलना में क्रिएटिनिन स्तर अधिक होते हैं।

क्रिएटिनिन क्लियरेंस: यह परीक्षण इस बात को निर्धारित करता हैं कि आपके खून से क्रिएटिनिन को किडनी से कितनी अच्छी तरह निकाल दिया गया है। यह परीक्षण रक्त क्रिएटिनिन परिक्षण की तुलना में बेहतर परिणाम देता है। यह परीक्षण 24 घंटे के अंदर एकत्रित किये गए खून के नमूने और पेशाब के नमूने से होता है।

रक्त यूरिया नाइट्रोजन और क्रिएटिनिन अनुपात (BUN: Creatinine): BUN परीक्षण आपके रक्त में उपस्थित यूरिया की मात्रा को मापता है। यूरिया एक अनोपयोगी पदार्थ है और आपके शरीर में प्रोटीन के टूटने से बनता है। यूरिया लिवर में बनता है और हमारे शरीर में पेशाब में पहुँच जाता है।
रक्त क्रिएटिनिन एवं रक्त यूरिया नाइट्रोजन के स्तर को BUN का पता लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह अनुपात शरीर की किसी भी तरह की समस्या, जैसे डिहाइड्रेशन, का पता लगाने में उपयोगी होता है। इस प्रकार की परेशानियां BUN एवं क्रिएटिनिन स्तर को असामान्य बना देती हैं।

क्यों जरुरी है यह जाँच?
ये परीक्षण निम्न जानकारियों के लिए करवाये जाते हैं:
1. यह देखने के लिए कि आपकी किडनियां सामान्य रूप से कार्य कर रही हैं या नहीं।
2. यह पता लगाने के लिए कि आपकी किडनी का रोग बदल रहा है या नहीं।
3. यह देखने के लिए कि जो लोग किडनी को नुकसान पहुँचाने वाली दवाइयाँ ले रहे हैं ,उनकी किडनी किस तरह से काम कर रही है।
4. अत्यधिक डिहाइड्रेशन का पता लगाना। डिहाइड्रेशन सामान्यतः बी यू एन स्तर को क्रिएटिनिन स्तर की तुलना में बढ़ा देता है। किडनी रोग अथवा आपकी किडनी से पेशाब का रुका हुआ बहाव BUN एवं क्रिएटिनीन दोनों स्तरों को बढ़ा देता है।

क्रिएटिनिन और क्रिएटिनिन क्लियरेंस: कैसे करें तैयारी?

इस टेस्ट से 2 दिनों (48 घंटों) पहले तक भारी एक्सरसाईज न करें। 8 औंस (227 gm) से ज्यादा मीट न खाएं, खास तौर पर यह गाय का मांस हो तो। इसके अलावा टेस्ट से पहले 24 घंटे तक दूसरे प्रोटीन भी न लें। 24 घंटे यूरिन इकठ्ठा करने के दौरान खूब सारा तरल लें। लेकिन ध्यान रहे कि कॉफी या चाय नहीं पीनी है। यह दोनों मूत्रवर्धक के तौर पर कार्य करती हैं और आपके शरीर से ज्यादा तरल निकाल सकती हैं।

कैसे लिया जाता है यह टेस्ट?

रक्त का नमूना लेना:

  • रक्त नमूना लेने के लिए सबसे पहले भुजा के ऊपरी हाथ पर एक रबर बैंड कसकर बांधा जाता है ताकि रक्त का प्रवाह रुक जाए। इस से भुजा के नीचे की नसें फूल जाती हैं और उनसे रक्त निकलना आसान हो जाता है।
  • सुई की नोक को एल्कोहल की मदद से साफ किया जाता है।
  • सुई को नस के अंदर डालकर रक्त निकाला जाता है। इसके लिए एक से अधिक सुइयों की आवश्यकता भी हो सकती है।
  • इस सुई से एक ट्यूब को जोड़ कर उसमें रक्त भर लिया जाता है।
  • रक्त निकालने के बाद भुजा से रबर बैंड को खोल दिया जाता है।
  • इसके बाद जहाँ से सुई निकाली गई हो उस जगह पर रुई रख दी जाती है।
  • कुछ देर तक रक्त निकालने की जगह पर दबा कर रखा जाता है।

दर्द या असहजता
जब आपकी एक नस में से रक्त निकाला जाता है तो इसके लिए रबर बैंड काफी कसकर बाँधा जा सकता है। हालाँकि इस से दर्द तो नहीं होता लेकिन यह थोड़ा तंग लग सकता है। वहीं सुई के लिए महज एक हलकी सी चुभन होती है।

24-ऑवर यूरिन कलेक्शन
हो सकता है आपका डॉक्टर आपको यूरिन को 24 घंटे रखने के लिए कहे।

  • ज्यादातर यूरिन टेस्ट सुबह के समय लिए जाते हैं। जैसे ही आप उठते हैं सबसे पहले टॉइलट जाकर यूरिन निकाल दें, लेकिन इसे इकट्टा कर के नहीं रखना है। उस समय को लिख कर रख लें जब आपने यूरिन निकाला और इसे कब 24 घंटे पूरे होंगे।
  • अगले 24 घंटे तक जितनी बार भी टॉयलेट जाएं यूरिन एकत्रित कर लें. इसके लिए आपका डॉक्टर आपको 1 गैल (4 एल) का पात्र देगा जिसमें आप यूरिन इकठ्ठा कर सकते हैं। एक छोटी शीशी में यूरिन लीजिये और फिर इसे पात्र में डाल दीजिये। पात्र को अंदर से छुए नहीं।
  • इस पात्र को 24 घंटे तक फ्रिज में रखिये।
  • अंतिम बार 24 घंटे से पहले-पहले यूरिन ले लीजिये। इसे भी पात्र में डाल दीजिये, और अंतिम बार यूरिन इकट्ठे करने का समय भी नोट कर लीजिये।
  • ध्यान रहें कि यूरिन पात्र में कोई भी बाहरी चीज जैसे टॉयलेट पेपर, बाल, मल, या माहवारी रक्त नहीं जाना चाहिए।
  • इस इकट्ठे किये यूरिन को डॉक्टर को सौंप दीजिये।

यूरिन टेस्ट का अनुभव
यूरिन टेस्ट के लिए दिए गए नमूने से किसी व्यक्ति को कोई असहजता या दर्द महसूस नहीं होता।

क्रियेटिनिन एंड क्रियेटिनिन क्लियरेंस टेस्ट से होने वाले खतरे:

रक्त का नमूना लेने में जोखिम

आम तौर पर नसों से खून निकलने में कोई जोखिम नहीं है लेकिन फिर भी कुछ छोटी-मोटी समस्याएँ हैं जो इस दौरान हो सकती हैं जैसे:

  • हो सकता है कि सुई लगने वाली जगह पर खरोच सी बन जाए। लेकिन इसे रोका भी जा सकता है। यदि सुई निकलने के बाद यदि उस जगह कुछ देर तक थोड़ा दबाव डालकर रखा जाए तो इस खरोच से बचा जा सकता है।
  • कई बार ब्लड सैंपल लिए जाने के बाद नस में सूजन भी आ सकती है। इस प्रकार की समस्या को फ्लेबिटिस कहा जाता है लेकिन यह दिन में कई बार की गई गर्म सेक से ठीक हो जाती है।
  • कुछ लोगों में सुई निकालने के बाद रक्त बंद न होने जैसी समस्या भी हो सकती है। इसे रक्तस्राव विकार (ब्लीडिंग डिसऑर्डर) कहा जाता है। यह कई बार रक्त को पतला करने की दवाई लेने की वजह से भी हो सकता है। अगर किसी को रक्तस्त्राव या रक्त के थक्के जैसी समस्या हो और वह इसके लिए दवाई ले रहा हो तो इसकी जानकारी रक्त निकालने से पहले नमूना लेने वाले को जरूर देनी चाहिए।

वहीं इस जांच में यूरिन टेस्ट का कोई जोखिम नहीं है।

नतीजे
क्रिएटिनिन और क्रिएटिनिन क्लियरेंस टेस्ट रक्त और यूरिन में क्रियेटिनिन की जांच करने के लिए किया जाता है। इस टेस्ट के जरिये इस बात की जानकारी मिलती है कि आपकी किडनियां कितने अच्छे से काम कर रहीं हैं। यह क्रिएटिनिन क्लियरेंस वैल्यू रक्त में या खून में क्रियेटिनिन की मात्रा से आंकी जाती है। यह जाँच 24 घंटे के मूत्र से की जाती है। यह दर रक्त की वह मात्रा है जिसे हर एक मिनट में क्रियेटिनिन से क्लियर किया जाता है। इसकी दर शरीर के आकार पर भी निर्भर करती है।

सामान्य नतीजे
यह संख्या महज एक सामान्य गाइड की तरह है। इसकी सामान्य रेंज हर लैब के लिए अलग-अलग होती है। जरुरी नहीं है कि जो रेंज एक लैब में सामान्य हो वह दूसरी लैब में भी सामान्य होगी। इसलिए आपका डॉक्टर जांच के इस नतीजे के साथ-साथ आपके स्वास्थ्य का भी निरीक्षण करता है और इसके बाद ही उपचार शुरू करता है।

ब्लड क्रिएटिनिन एंड क्रिएटिनिन क्लियरेंस  
ब्लड क्रिएटिनिन: पुरुषों में: 0.6–1.2 mg/dL or 53–106 micromoles per liter (mcmol/L)महिलाओं में: 0.5–1.1 mg/dLया 44–97 mcmol/L किशोरों में: 0.5–1.0 mg/dL बच्चों में: 0.3–0.7 mg/dL
क्रिएटिनिन क्लियरेंस: 40 वर्ष से कम की उम्र के पुरुषों में: 107–139 ml/min  या 1.8–2.3 ml/sec , 40 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में: 87–107 ml/min या 1.5–1.8 ml/min क्रिएटिनिन क्लियरेंस दर सामान्य तौर पर उम्र बढ़ने के साथ खुद ब खुद नीचे चली जाती है। इसकी सामान्य दर 20 वर्ष के बाद हर 10 वर्ष में 6.5ml/min तक नीचे चली जाती है।

बी.यू.एनटूक्रिएटिनिन रेशो

वयस्क: 6–25, के साथ 15.5 सबसे अच्छी दर है।

उच्च स्तरीय

उच्च क्रिएटिनिन रक्त स्तर निम्न कारणों से हो सकता है:

  • गंभीर रूप से किडनियों की खराबी या किडनियों की पुरानी बीमारी। किडनियों की यह जीवन के लिए घातक खराबी संक्रमण, मानसिक झटके, कैंसर या किडनियों में रक्त के कम बहाव के कारण हो सकती है।
  • शरीर में पानी की कमी।
  • मांसपेशी की चोट और या ऐसी स्थिति। इसमें क्रश चोट, जलना, मांसपेशीय दुर्विकास, मांशपेशियों में गंभीर चोट (Rhabdomyolysis), पॉलीमायोसिटिस, और अधिकता में किया गया व्यायाम जैसे कारण शामिल हैं।
  • मानसिक तौर पर आघात, रक्त चाप (Blood Pressure) कम होना, घातक रक्त स्त्राव और घातक संक्रमण भी इसके बड़े कारण हैं।

हाई क्रिएटिनिन क्लीयरेंस लेवल्स: यह परेशानी कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता, हाइपोथायरायडिज्म और गर्भवस्था के कारण हो सकती है।

हाई बी.यू.एनटूक्रिएटिनिन रेश्यो: यह परेशानी अचानक से होने वाली (एक्यूट) किडनी विफलता के कारण होती है। इसके अलावा घातक मानसिक आघात और शरीर में पानी की कमी भी इसका कारण होती है। वहीं BUN-टू-क्रिएटिनिन रेश्यो की बहुत अधिक मात्रा पाचन तंत्र में घातक रक्तस्त्राव के कारण भी हो सकती है।

निम्न स्तर

लो ब्लड क्रिएटिनिन लेवल: यह परेशानी मांशपेशियों के समूह की कमी (Muscular Dystrophy) के कारण हो सकती है। उम्र का बढ़ना भी इसका एक कारण हो सकता है। इसके अलावा किडनियों की घातक बीमारी या खान-पान में प्रोटीन की कमी भी इसका एक कारण हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान भी क्रियेटिनिन का स्तर नीचे चला जाता है।
लो क्रिएटिनिन क्लीयरेंस लेवल: यह बीमारी भी गंभीर किडनी की बीमारी के कारण हो सकती है। किडनियों में गंभीर संक्रमण का होना, या उनमें चोट लग जाना, कैंसर या मूत्र का रुक जाना, मानसिक आघात जैसी समस्याएँ इस परेशानी को जन्म देती हैं। इसके अलावा हृदय विफलता और पानी की कमी भी इसके कारण हो सकते हैं।
लो BUN-टूक्रिएटिनिन रेश्यो : यह समस्या खान-पान में प्रोटीन की कम मात्रा, मांशपेशियों में गंभीर चोट (Rhabdomyolysis), गर्भावस्था, सिरैसस, या सिंड्रोम ऑफ़ इनएप्प्रोप्रिएटे एंटीडाईयूरेटिक्स हॉर्मोन सेक्रेटिओन् (SIADH) के कारण हो सकती है। SIADH की समस्या कभी-कभी कैंसर, फेंफड़ों की बीमारी, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की बीमारी या कुछ दवाइयों के कारण भी पनप सकती है।

क्रिएटिनिन एंड क्रिएटिनिन क्लियरेंस टेस्ट को प्रभावित करने वाले कारक

कुछ ऐसे कारक जिनकी वजह से टेस्ट और इसके नतीजों पर प्रभाव पड़ सकता है:

  • कुछ दवाइयों का प्रयोग जैसे:
    एंटी फंगल दवाइयाँ, Amphotericin B, Cimetidine (Tagamet), Phenytoin (Dilantin), Quinine, Quinidine, Procainamide, Methyldopa, Trimethoprim (Proloprim, Trimpex), या विटामिन C (Ascorbic acid)।
    Cephalosporin antibiotics, especially Cefoxitin (Mefoxin), Tetracycline antibiotics, और कुछ अलग मूत्रवर्धक।
  • यदि आप इस टेस्ट से 2 दिन पहले तक कठिन व्यायाम किए हैं ।
  • 8 औंस (227 gm ) से ज्यादा मीट, जाँच होने के 24 घंटों के अंदर खाना।
  • यदि आपने ठीक 24 घंटे के अंदर यूरिन इकठ्ठा करना शुरू नहीं किया तो।

कुछ और महत्वपूर्ण जानकारियां

  • सामान्य तौर पर ब्लड क्रियेटिनिन का उच्च स्तर भी क्रिएटिनिन क्लियरेंस के निम्न स्तर के साथ ही देखा जाता है। ऐसा किडनियों द्वारा रक्त में से क्रिएटिनिन को निकाल दिए जाने के कारण होता है। यदि किडनियां क्रिएटिनिन को रक्त में से निकाल पाने में समर्थ नही हो पाती तो इस से रक्त में क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ जाता है।
  • यदि आप गर्भवती हैं तो आपका डॉक्टर आपके उल्बीय तरल पदार्थ (amniotic fluid) में भी क्रिएटिनिन की मात्रा की जाँच कर सकता है। इस से इस बात की जानकारी मिलती है कि आपके बच्चे की किडनियों का कितना विकास हुआ है। साथ ही इस से इस बात की भी जानकारी मिल सकती है कि कहीं आपकी डिलिवरी समय से पहले तो नहीं होने वाली। जिन बच्चों की किडनियां पूरी तरह से विकसित हो जाती है वह उन बच्चों से ज्यादा क्रियेटिनिन बनाता है जिनमें किडनियों का अभी तक पूरी तरह से विकास नहीं हुआ हो।
  • यदि किसी में क्रिएटिनिन का स्तर सामान्य है तो इस से उसकी किडनियों की बीमारी का पता नहीं चल सकता। किडनियों की खराबी की जानकारी के लिए क्रियेटिनिन क्लियरेंस टेस्ट की भी जरूरत होती है। इसके अलावा किडनियों की जानकारी के लिए कुछ और टेस्ट भी किये जा सकते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए रक्त यूरिया नाइट्रोजन ( Blood Urea Nitrogen) देखें।
  • क्रिएटिनिन का स्तर, ब्लड यूरिया नाइट्रोजन के मुकाबले बेहद धीमी गति से बढ़ता है। इसलिए क्रिएटिनिन के स्तर के बढ़ने का मतलब किडनियों की पुरानी (क्रोनिक ) बीमारी हो सकता है।
  • किडनी की पुरानी बीमारी से पीड़ित लोगों में एक कोशिकागुच्छीय निस्पंदन दर ( glomerular filtration rate) को भी मापा जा सकता है। इस टेस्ट से जानकारी मिलती है कि किडनियां कितने अच्छे से काम कर रही हैं।
  • मधुमेह विशेषज्ञों (Diabetes experts) का मानना है कि मधुमेह के रोगियों में ब्लड क्रियेटिनिन के स्तर की जाँच हर एक साल में के बार जरूर होनी चाहिए। क्रिएटिनिन के स्तर से एक कोशिकागुच्छीय निस्पंदन दर का भी पता लगाया जा सकता है।
  • रक्त में क्रियेटिनिन की मात्रा आंशिक रूप से मांसपेशियों के ऊतकों की राशि (amount of muscle tissue) पर निर्भर करती है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि क्रिएटिनिन का स्तर महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में ज्यादा होता है। इसके अलावा जिन लोगों में (एथलीट) मांशपेशियां बड़ी होती हैं, उनमें ब्लड क्रिएटिनिन का स्तर सामान्य से अधिक पाया जाता है।
  • कभी-कभी यूरिन में क्रिएटिनिन और सोडियम की मात्रा को मापने के लिए यूरिन टेस्ट क्रिएटिनिन और सोडियम ब्लड टेस्ट के साथ भी किया जाता है। इस से सोडियम की आंशिक उत्सर्जन (FENa) की जानकारी में भी सहायता मिलती है। इस से डॉक्टर को यह भी पता चल जाता है कि किडनियों में रक्त प्रवाह में समस्या पानी की कमी, मानसिक आघात या खुद किडनियों की क्षति के कारण तो नहीं है।

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