क्यों महत्वपूर्ण है अल्ट्रासाउंड टेस्ट?

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24th May, 2017

Ultrasound Test ka Mahatwa | अल्ट्रासाउंड टेस्ट का महत्व | Importance of Ultrasound Testअल्ट्रासाउंड स्कैन के द्वारा, लगभग शरीर के सभी हिस्सों की जाँच की जा सकती है। इस जाँच में, ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है। यह ध्वनि तरंगें मनुष्य को सुनाई नहीं देती, लेकिन अल्ट्रासाउंड मशीन के साथ जुड़ा कंप्यूटर, इन तरगों को स्क्रीन पर तस्वीर के रूप में बदल कर दिखाता है। इस प्रक्रिया के दौरान रोगी को किसी भी तरह का दर्द भी नहीं होता।

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निम्नलिखित अवस्थाओं में अल्ट्रासाउंड स्कैन किया जाता है-

गर्भवस्था- अक्सर गर्भावस्था के दौरान, डॉक्टर अल्ट्रासाउंड करवाते हैं। ऐसा करने के कई कारण हो सकते हैं,  जैसे- प्रसव के समय का अनुमान लगाने के लिए, गर्भ में पल रहे शिशु की स्थिति की जाँच करने के लिए, गर्भ में जुड़वाँ या उससे अधिक शिशुओं की जाँच करने के लिए और अस्थानिक गर्भावस्था के बार में पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है। इसके अलावा यदि गर्भ में पल रहे शिशु में कोई जन्मजात दोष, अपरा सम्बंधित समस्या, ब्रीच स्थिति, या कोई अन्य कोई परेशानी नजर आती है तो भी इसकी जानकारी अल्ट्रासाउंड कर ली जाती है।

जांच- डॉक्टर अल्ट्रासाउंड स्कैन का इस्तेमाल, शरीर के प्रभावित अंगों की जांच के लिए करते हैं, जिसमें दिल, रक्त वाहिका, लिवर, पित्ताशय की थैली, स्प्लीन, अग्न्याशय, गुर्दे, मूत्राशय, गर्भाशय, अंडाशय, आंख, थायराइड, और अंडकोष इत्यादि अंग शामिल होते हैं। लेकिन अल्ट्रासाउंड द्वारा, कुछ अंगों की जाँच नहीं की जा सकती जैसे- शरीर के उस भाग को, जहां पर हवा या गैस होती है (जैसे- आंत)। इसके अलावा ब्रैस्ट में गांठ होने पर, डॉक्टर अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह देते हैं। जिसके माध्यम से गांठ ठोस है या फिर उसमे द्रव भरा हुआ है (जिसे सिस्ट कहा जाता है), जैसी स्थिति के बारे में पता लगाने के लिए किया जाता है। पुरुषों में हर्निया जैसी बीमारियों का पता लगाने के लिए भी अल्ट्रासाउंड किया जाता है।

चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान भी अल्ट्रासाउंड किया जाता है- अक्सर डॉक्टर बायोप्सी के दौरान, सुई को सही जगह ले जाने के लिए भी अल्ट्रासाउंड करते हैं। इसकी सहायता से डॉक्टर शरीर के अंदर से प्रभावित अंग से थोड़ा सा टिश्यू निकालते हैं और फिर प्रयोगशाला में उसकी जाँच करते हैं।

उपचार- कभी-कभी डॉक्टर टिश्यू में लगी चोट की जाँच और उपचार के लिए भी अल्ट्रासाउंड स्कैन करवाते हैं।

अल्ट्रासाउंड स्कैन के द्वारा, लगभग शरीर के सभी हिस्सों की जाँच की जा सकती है। इस जाँच में, ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है। यह ध्वनि तरंगें मनुष्य को सुनाई नहीं देती, लेकिन अल्ट्रासाउंड मशीन के साथ जुड़ा कंप्यूटर, इन तरगों को स्क्रीन पर तस्वीर के रूप में बदल कर दिखाता है। इस प्रक्रिया के दौरान रोगी को किसी भी तरह का दर्द भी नहीं होता।

निम्नलिखित अवस्थाओं में अल्ट्रासाउंड स्कैन किया जाता है-

गर्भवस्था- अक्सर गर्भावस्था के दौरान, डॉक्टर अल्ट्रासाउंड करवाते हैं। ऐसा करने के कई कारण हो सकते हैं,  जैसे- प्रसव के समय का अनुमान लगाने के लिए, गर्भ में पल रहे शिशु की स्थिति की जाँच करने के लिए, गर्भ में जुड़वाँ या उससे अधिक शिशुओं की जाँच करने के लिए और अस्थानिक गर्भावस्था के बार में पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है। इसके अलावा यदि गर्भ में पल रहे शिशु में कोई जन्मजात दोष, अपरा सम्बंधित समस्या, ब्रीच स्थिति, या कोई अन्य कोई परेशानी नजर आती है तो भी इसकी जानकारी अल्ट्रासाउंड कर ली जाती है।

जांच- डॉक्टर अल्ट्रासाउंड स्कैन का इस्तेमाल, शरीर के प्रभावित अंगों की जांच के लिए करते हैं, जिसमें दिल, रक्त वाहिका, लिवर, पित्ताशय की थैली, स्प्लीन, अग्न्याशय, गुर्दे, मूत्राशय, गर्भाशय, अंडाशय, आंख, थायराइड, और अंडकोष इत्यादि अंग शामिल होते हैं। लेकिन अल्ट्रासाउंड द्वारा, कुछ अंगों की जाँच नहीं की जा सकती जैसे- शरीर के उस भाग को, जहां पर हवा या गैस होती है (जैसे- आंत)। इसके अलावा ब्रैस्ट में गांठ होने पर, डॉक्टर अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह देते हैं। जिसके माध्यम से गांठ ठोस है या फिर उसमे द्रव भरा हुआ है (जिसे सिस्ट कहा जाता है), जैसी स्थिति के बारे में पता लगाने के लिए किया जाता है। पुरुषों में हर्निया जैसी बीमारियों का पता लगाने के लिए भी अल्ट्रासाउंड किया जाता है।

चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान भी अल्ट्रासाउंड किया जाता है- अक्सर डॉक्टर बायोप्सी के दौरान, सुई को सही जगह ले जाने के लिए भी अल्ट्रासाउंड करते हैं। इसकी सहायता से डॉक्टर शरीर के अंदर से प्रभावित अंग से थोड़ा सा टिश्यू निकालते हैं और फिर प्रयोगशाला में उसकी जाँच करते हैं।

उपचार- कभी-कभी डॉक्टर टिश्यू में लगी चोट की जाँच और उपचार के लिए भी अल्ट्रासाउंड स्कैन करवाते हैं।



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