एडिनॉयडिटिस या कंठशूल सूजन के कारक

भाषा चयन करे

7th June, 2016

Kaise hoti hai Adenoiditis ya kanthshul mein sujan? | कैसे होती है एडिनॉयडिटिस या कंठशूल में सूजन? | How Adenoiditis Swelling is caused?एडिनॉयडिटिस या कंठशूल की सूजन सामान्यतः बच्चों के गले में होने वाली एक समस्या है। मानव शरीर में, बहुत सी ग्रन्थियां होती हैं, इनमें से दो ग्रंथियाँ जिन्हें, एडिनॉयड या कंठशूल ग्रंथियाँ कहा जाता है, मुँह के अंदर नाक और तालू के पीछे लसीका ऊतकों के समूह से निर्मित गिल्टियों के रूप में होती हैं। यह ग्रंथियां टॉन्सिल की तरह होती हैं। ख़ास बात यह होती है कि यह ग्रंथियाँ, बच्चों में होती हैं और जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, आमतौर पर, 5 से 6 उम्र में यह छोटी होने लगती हैं और किशोरावस्था तक लगभग खत्म हो जाती हैं। चूँकि, इस उम्र तक, मानव शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र का काफी विकसित हो चुका होता है, इसलिए   जब यह ग्रन्थियां संक्रमित होती हैं, तो इनमें सूजन आ जाती है। सूजन के कारण इनका आकार बढ़ जाता है। कुछ विशेष प्रकार के कीटाणु हैं जो इनके संक्रमण कारक हैं।

Image Source

एडिनॉयडिटिस या कंठशूल सूजन के कारक

वैसे तो एडिनॉयड या कंठशूल ग्रंथियाँ व्यक्ति को स्वस्थ रखने में सहायक है। इनका मुख्य कार्य नाक और मुँह के द्वारा, शरीर में प्रवेश करने वाले कीटाणुओं को रोकना या फिल्टर करना होता है, परन्तु कभी-कभी, यदि व्यक्ति अत्यधिक कीटाणु एवं विषाणु प्रभावित क्षेत्र में रहे, तो यह ग्रंथियाँ स्वयं संक्रमित हो जाती हैं। इसके परिणाम स्वरूप, उसके एडिनॉयड या कण्ठशूल सूज जाते हैं और बड़े हो जाते हैं।

एडिनॉयडिटिस का संक्रमण दो प्रकार से हो सकता है-

  • एडीनॉयडिटिस सामान्यतः कीटाणु संक्रमण से होता है। इसके लिए आमतौर पर स्ट्रेप्टोकोकस (Streptococcus) नामक कीटाणु जिम्मेदार होता है। लेकिन अन्य कीटाणु भी एडीनॉयडिटिस के कारक होते हैं। विशेषकर यदि कीटाणु एडिनॉयड की नियंत्रण क्षमता से अधिक  हो जाते हैं तो एडीनॉयडिटिस होने के सम्भावना बढ़ जाती है।
  • एडीनॉयडिटिस या कण्ठशूल सूजन की समस्या, विषाणु अर्थात वायरस से भी हो सकती है। इसके लिए कई सारे विषाणु जिम्मेदार होते हैं। इनमे से कुछ एप्सटीन- बर्र वायरस (Epstein- Barr virus), एडिनोवायरस (adenovirus) और रायनोवायरस (rhinovirus) हैं।

जब एडीनॉयडिटिस की समस्या बैक्टीरियल इन्फेक्शन (कीटाणु संक्रमण) की वजह से होती है तो इसका उपचार एंटीबॉयटिक के द्वारा किया जाता है। जबकि वायरल इन्फेक्शन (वायरस संक्रमण) से होने वाली एडीनॉयडिटिस की समस्या 2 से 3 सप्ताह में खुद-ब-खुद ठीक होती है।



अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे !





अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे !