कान में संक्रमण के कारण और लक्षण

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19th April, 2016

Kaan ke Sankraman ke Karan aur Lakshan | कान के संक्रमण के कारण और लक्षण | Common Causes and Symptoms of Ear Infectionकान का संक्रमण बैक्टीरिया और वायरस के कारण होता है। इसके कारण, ऊपरी श्वसन में संक्रमण से सूजन या यूस्टेशीयून ट्यूब ब्लॉक हो जाती है, जो कि कान से गले के बीच जुड़ी होती है। ऐसे में हवा मध्य कान तक नहीं पहुंच पाती। यह एक वैक्यूम और सक्शन का निर्माण करता है, जो नाक और कान के मध्य भाग से तरल पदार्थ और कीटाणुओं को खींचता है। ऐसे में सूजी हुई ट्यूब ड्रेनिंग से इस द्रव को रोकता है। कान में संक्रमण को फ़ैलाने और विकसित करने के लिए तरल पदार्थ, बैक्टीरिया और वायरस अहम भूमिका निभाते हैं।

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  • बैक्टीरियल इन्फेक्शन (Bacterial infections)- बैक्टीरिया कान में संक्रमण का सबसे बड़ा कारण होता है। जिनमें, स्ट्रैपटोकोकस निमोनिया (पनेउमोकॉकस, हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा, और मोरक्सेला कटरहालीस) सबसे आम है।
  • वायरल इन्फेक्शन (Viral infections)- वायरस भी कान के संक्रमण के कारण बन सकते हैं। जिसमें श्वसन सैंसीटीएल वायरस (आरएसवी) और फ्लू (इन्फ्लूएंजा) वायरस सबसे आम है।

बिना संक्रमण के भी कान में, सूजन और तरल पदार्थ पैदा का निर्माण हो सकता है, और यही वजह है कि कानों में दर्द होता है, इसे ओटिटिस मीडिया विद इफ्यूजन के रूप में जाना जाता है।

कान संक्रमण के लक्षण

मध्य कान में संक्रमण (तीव्र ओटिटिस मीडिया) के लक्षण अक्सर सर्दी या अन्य ऊपरी श्वसन संक्रमण की शुरुआत के 2 से 7 दिनों के बाद होता है। कान में संक्रमण के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं-

  • कानों में दर्द- कानों में दर्द संक्रमण के आम लक्षण हैं। जो गंभीर और हल्के रूप में हो सकते हैं। खासकर जब बच्चों को दर्द होता है, तो वह अपने कानों को खींचते या खुजलाते हैं।
  • बुखार- बुखार भी कानों के संक्रमण का एक लक्षण है।
  • कानों में ड्रेनेज- कानों में मोटे,पीले या खून के रूप में ड्रेनेज की समस्या दिखाई देती है। इसका मतलब यह होता है कि शायद कान के पर्दे फट गए हों। लेकिन यह छेद हफ्ते भर में खुद-ब-खुद भर जाते हैं।
  • भूख की कमी- भूख, उल्टी, और गुस्सा या व्यवहार में बदलाव जैसी चीज़ें देखने को मिलती हैं।
  • नींद की समस्या- कानों में संक्रमण के दौरान, नींद न आने जैसी भी समस्या उत्पन्न हो जाती है।

कान में, तरल पदार्थों के बनने के लक्षण कुछ इस तरह से हो सकते हैं-

  • पॉपिंग, रिंगिंग या कानों में दवाब के साथ भारीपन जैसा महसूस होना। साथ ही अगर बच्चा छोटा हो, तो वह अपनी इस परेशानी को बता भी नहीं पाता। वह इस दबाव से राहत पाने के लिए अपने कानों को रगड़ते रहतें हैं।
  • सुनने की समस्या उत्पन्न हो जाती है, जिससे कि बच्चों को सुनने में कठिनाई होती है।
  • इसके साथ ही चक्कर आने, जैसी समस्या भी देखने को मिलती हैं।

वहीं, कुछ बच्चों में इस तरह के लक्षण नजर भी नहीं आ पाते। इस तरह के बच्चों में परेशानी का पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है।



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