इयर ट्यूब प्लेसमेंट सर्जरी

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19th April, 2016

Bachon ke liye Ear Tubes ka Chunaw kaise karen? | बच्चों के लिए इअर ट्यूब का चुनाब कैसे करें? | How to choose Ear Tubes for Children?

ईयर ट्यूब प्लेसमेंट (कान के मध्य संक्रमण के लिए) बच्चों में होने वाली सबसे आम सर्जरी होती है। इसमें, ईयरड्रम (कान के पर्दे) में ड्रेनेज ट्यूब (जल निकासी ट्यूब) को बदल दिया जाता है। कभी-कभी यह सिर्फ एक ही कान के लिए की जाती है, लेकिन यदि यह समस्या दूसरे कान में भी हो, या होने की सम्भावना हो तो, दोनों ही कानों में यह ट्यूब बदल जाती है। मध्य कान में संक्रमण, या तरल पदार्थ बनने की स्थिति में इस सर्जरी को किया जाता है।

इस सर्जरी से निम्न लक्षणों में राहत मिल सकती है,

सुनने की समस्याओं को दूर करने में। कान के मध्य में दबाव और तरल पदार्थ को बनने से रोकने में। कान के मध्य से तरल पदार्थ को बाहर निकलने में भी ये ऑपरेशन मदद करता है। वेंटीलेट्स के बाद तरल पदार्थ कान के मध्य से चला जाता है और कान में दुबारा संक्रमण को होने से रोकता है।

सर्जरी के दौरान डॉक्टर, बच्चे को सामान्य एनेस्थीसिया (जनरल एनेस्थियस) देकर बच्चे के कान को सुन्न कर देते हैं, और इसके बाद, कान की चादरों में, छोटा सा छेद किया जाता है। छेद किये जाने के बाद, बाद एक छोटी सी, प्लास्टिक की ट्यूब को उसके अंदर डाल दिया जाता है। यह ट्यूब लगभग 6 से 12 महीनों तक यहीँ रहती है, और इसके बाद खुद-ब-खुद बाहर गिर जाती है। ट्यूब के बाहर निकल जाने के बाद, चादरों में हुए छेद आमतौर पर 3 से 4 सप्ताह में खुद ही बंद हो जाते हैं। हलाँकि, कुछ बच्चों में ट्यूब वापस दोबारा से कानों में डालने की जरूरत होती है, क्योंकि कान की चादरों में फिर से तरल पदार्थ जमा होने का खतरा बना रहता है।

किन बच्चों में यह ट्यूब डाले जाने की जरूरत होती है?

डॉक्टर उन बच्चों के कानों में इस ट्यूब को डालते हैं, जिनमें में दोबारा से यह संक्रमण होने का खतरा होता है, अथवा जिनके कान की चादरों में, फिर से तरल पदार्थ जमा होने लगता है। यद्यपि इस बिमारी में, यह सर्जरी बहुत फायदेमंद होती है, लेकिन हर एक मेडिकल ट्रीटमेंट की तरह इसके भी कुछ दुष्प्रभाव होते हैं। इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले, सर्जरी के बारे में पूरी जानकारी जरूर ले लें।

ट्यूब डालने के बाद कानों की देखभाल

बच्चों के कानों में ट्यूब डालने के बाद उसकी देखभाल बहुत अच्छे तरीके से की जानी चाहिए। क्योंकि ज्यादातर बच्चे नहाने या तैराकी के दौरान अपने कानों का ध्यान नहीं रखते हैं। ऐसे में, अपने डॉक्टर से इस बात की पुष्टि कर लें कि क्या बच्चे को स्नान या तैराकी करते समय कान को पानी से बचाने या देखभाल की जरूरत है। इसके लिए डॉक्टर बच्चे को इयरप्लग पहनने की सलाह भी दे सकते हैं। साथ ही आप कान में संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक, इयरड्रॉप का प्रयोग भी किया जा सकता है।

फटे हुए कान के परदे (Ruptured eardrum)

सर्जन कान के परदे का ऑपरेशन उस अवस्था में करते हैं, जब कान के परदे 3 से 6 महीने बाद भी नहीं भरते। हालाँकि यह ट्रीटमेंट बेहद कम मामलों में दिया जाता है। आमतौर पर कान के परदे कुछ ही हफ्तों के भीतर अपने आप ही भर जाते हैं।

कान संक्रमण के अन्य उपचार

किसी भी, बच्चे के लिए उसके कानों में हुई एलर्जी के इलाज की सलाह डॉक्टर तब तक नहीं देते जब तक कि उनमें इसके लक्षण मौजूद न हों। वहीं इसके लिए कुछ लोग हर्बल उपचार का प्रयोग भी करते हैं। जैसे इचिनेसा ( Echinacea) और लहसुन का तेल। हालाँकि इन उपचारों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। लेकिन भारतीय परम्परा में यह उपचार सदियों से चले आ रहें हैं। यद्यपि आप बच्चे पर कोई भी प्रयोग करने से पहले एक बार डॉक्टर से बच्चे के कान की जाँच जरूर करवा लें।



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