कान के पर्दे में संक्रमण

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13th April, 2016

Kaan ke Madhya mein Taral Padarth ka Banna | कान के पर्दे में तरल पदार्थ का बनना | Kaan ke Parde mein Taral Padarth ka Bannaकान के मध्य में संक्रमण आमतौर पर एक ऊपरी श्वसन संक्रमण ( यूआरआई ) के साथ होता है जैसे की ठंड के रूप में। इसमें द्रव पदार्थ कान के मध्य भाग में बनता है। कान में संक्रमण फ़ैलाने के लिए बैक्टीरिया या वायरस की अहम भूमिका होती है।

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कान के भीतर पीले और गाढ़े रंग का मवाद जमा हो जाता है, जो कान के संक्रमण का कारण बनता। इतना ही नहीं ये तरल पदार्थ अधिक मात्रा में इकठ्ठा होकर कान के पर्दों को भी धकेल देता है। इसके कारण सुनने और, और कान में दर्द जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। जिसके चलते बुखार की समस्या भी सामने आती है। बुखार आमतौर पर कुछ दिनों तक रहता है, लेकिन दर्द कुछ घंटो बाद चला जाता है। लेकिन कुछ बच्चों में दर्द कई दिनों तक रहता है।

एंटीबायोटिक दवाओं के उपचार से इसके लक्षण काफी हद तक, कम हो जातें हैं। लेकिन हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इस प्रकार के संक्रमण से लड़ने में सफलत रहती है और यह संक्रमण कुछ समय के बाद खुद ही ठीक हो जाता है। लेकिन कभी-कभी, यदि तरल पदार्थ बहुत ज्यादा बन जाता है, तो यह कान के पर्दों पर दबाव बना कर बाहर निकलना भी शुरू हो जाता है। ऐसे में बुखार और दर्द खुद-ब-खुद चला जाता है, और संक्रमण साफ हो जाता है। साथ ही कान की चदरों का छेद अपने-आप भरता चला जाता है।

कान के मध्य में तरल पदार्थ का बनना

अधिकांश बच्चे जिन्हें, कान का संक्रमण है, और कान के पर्दे के पीछे कुछ तरल पदार्थ जमा हो तो, कुछ ही हफ्तों के बाद ये संक्रमण ख़त्म हो जाता है। कुछ बच्चों में ये तरल पदार्थ एक महीने बाद साफ होता है, तो कुछ में महीनों बाद भी रहता है। कान में बहने वाले इस तरल पदार्थ को ओटिटिस मीडिया कहा जाता है। ये तरल पदार्थ कान के मध्य कार्य को प्रभावित करता है जिससे की सुनने जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है।

बेहद कम मामलों में, कान के मध्य में संक्रमण या तरल पदार्थ जटिलताओं को उत्पन्न कर सकते हैं। जैसे सुनने की समस्या और कान के परदे में छेद के तौर पर।



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