कान में संक्रमण को बढ़ावा देने वाले कारक

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8th April, 2016

Kaan mein Sankraman ko Badhava dene vale karak | कान में संक्रमण को बढ़ावा देने वाले कारक | Risk factors to increase Ear Infectionकान के मध्य भाग में, संक्रमण के बहुत से कारण हो सकते हैं, लेकिन इसके सबसे मुख्य कारकों में, नाक या श्वसन तंत्रों से पहुंचने वाली गंदगी है। जिसके कारण कान का पर्दा प्रभावित होता है और संक्रमित होकर परेशानी का सबब बन जाता है।

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इसके कुछ अन्य कारक निम्न हो सकते हैं-

  • उम्र- 3 साल के बच्चों में कान के संक्रमण होने का खतरा ज्यादा रहता है। इसके अलावा, छोटे बच्चों में सर्दी और फेफड़ो का संक्रमण अधिक देखने को मिलता है। 7 साल के अधिकांश बच्चों में कम से कम एक बार कानों में संक्रमण हो ही जाता है।
  • जन्म दोष या अन्य चिकत्सकीय कारक- जिन बच्चों में तालु या डाउन सिंड्रोम (cleft palate or Down syndrome) जैसी समस्याएं होती हैं, उनमें कान के संक्रमण होने की संभावनाएं बहुत ज्यादा होती हैं।
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली- स्वस्थ बच्चों की तुलना में, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले बच्चे में कान के संक्रमण की संभावनाएं बहुत ज्यादा होती हैं।
  • पारिवारिक इतिहास ऐसे बच्चे, जिनके परिवार में से किसी को भी पहले यह समस्या रही हो, तो उनमें भी यह समस्या होने की संभावना ज्यादा रहती है।
  • एलर्जी- लम्बे समय तक रहने वाली एलर्जी नाक को कठोर बना देती है, और इस से दोनों यूस्टेशीयन (eustachian) ट्यूब ब्लॉक हो जाती है, जो कानों के मध्य से नाक पीठ और गले को को जोड़ती है। इससे, कानों के मध्य, तरल पदार्थ जमा हो जाता है, और ब्लॉकेज की समस्या उत्पन्न हो जाती है।

कान में संक्रमण का खतरा बढ़ाने वाले कुछ अन्य कारक-

  • जुकाम और फेफड़े के ऊपरी भाग में दुबारा संक्रमण- अधिकांश कानों में संक्रमण बिमारियों से विकसित होता है।
  • सिगरेट के धुएं के संपर्क में रहने से- उन बच्चों को कान में संक्रमण होने की संभावना अधिक रहती है, जो सिगरेट के धुएं के आसपास रहते हैं।
  • बोतल से दूध पिलाना- बोतल से दूध पीने वाले बच्चों में माँ का स्तनपान करने की अपेक्षा ज्यादा संक्रमण होते देखा गया है। वह भी शुरुआत के एक साल में। इसके अलावा बच्चों को लेटा कर दूध पिलाना, भी संक्रमण को बुलावा देना है।
  • चाइल्ड केयर सेंटर- चाइल्ड केयर सेंटर में एक साथ कई बच्चे आपस में घिरे रहते हैं, ऐसे में एक को इंफेक्शन होने की वजह से दूसरे बच्चों में भी होने का खतरा बना रहता है।
  • पेसिफायर का प्रयोग- जो बच्चे इस तरह की निप्पल का प्रयोग करते हैं, उनमें भी कान में संक्रमण का खतरा रहता है।
  • कम उम्र में कान में संक्रमण- वैसे बच्चे जिन्हे 6 महीने के उम्र से पहले एक कान में संक्रमण हो गया हो तो ऐसे में दूसरे में भी होने की संभावना रहती है।
  • कान में लगातार तरल पदार्थ का बनना- कान के पर्दों के पीछे कुछ हफ्ते से लगातार तरल पदार्थ बन रहा हो, तो ऐसे में कान में संक्रमण होना आम बात है।
  • शुरुआती संक्रमण- वैसे बच्चे जिन्हे पिछले 3 महीने के भीतर एक कान में संक्रमण हुआ हो, ऐसे में दूसरे कानों में भी संक्रमण फ़ैलने का खतरा बढ़ जाता है, विशेष रूप से तब जब संक्रमण का इलाज़ एंटीबायोटिक दवाओं के साथ किया गया हो।



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