कान का संक्रमण- एंटीबायोटिक दवाओं से बेहतर है घरेलू उपचार

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19th April, 2016

Antibiotic- Pratirodhi Bacteria ke liye Jokhim | एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया के लिए जोखिम | Risk of Exposure to Antibiotic-Resistant Bacteria

कान का संक्रमण- एंटीबायोटिक दवाओं से बेहतर है घरेलू उपचार बैक्टीरिया के कारण, कान में हुए संक्रमण का इलाज एंटीबायोटिक्स के जरिए भी किया जा सकता है, परन्तु इस तरह के संक्रमण में, अधिकतर माता-पिता अपने बच्चों का इलाज उनके घरेलू उपचारों के द्वारा घर पर ही कर लेते हैं। यदि बच्चे को परेशानी ज्यादा आ रही हो, तो इन दवाओं का प्रयोग भी किया जा सकता है।

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एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में और इन तथ्यों को ध्यान मेँ रखकर किया जाना चाहिए-

1- यदि कोई बच्चा कान के संक्रमण की वजह से बहुत अधिक बीमार हो। यदि बच्चा 2 साल से छोटा हो, और उसके दोनों कानों में संक्रमण या हल्के दर्द के साथ बुखार हो। आपके बच्चे को संक्रमण से गंभीर जटिलताओं का खतरा हो।

2- यदि कानों में हुए संक्रमण के इलाज के लिए बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाया जाता है, तो वह कुछ दिनों तक इसके खुद ठीक होने का इंतजार करते हैं। लेकिन यदि ऐसा नही होता, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह देते हैं। ज्यादातर मामलों में डॉक्टर अमोक्सिसिलिन लेने की सलाह देते हैं, क्योंकि यह अच्छी तरह से काम करती है, और अन्य ब्रांडों की तुलना में कम लागत पर भी मिल जाती है।

3- यदि किसी बच्चे को कान में संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग किया जाता है, तो यह बहुत महत्वपूर्ण होता है कि दवा प्रयोग दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही हो। एक साथ दूसरी बीमारी के इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग न करें, क्योंकि एंटीबायोटिक दवाओं का दुरूपयोग दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया को पैदा कर सकता है।

कैसे चुने एंटीबायोटिक दवाएं?

कुछ मामलों में, डॉक्टर कान में होने वाले सभी प्रकार के संक्रमणों के इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का ही प्रयोग करते हैं, जबकि कान के कुछ संक्रमण खुद-ब-खुद ख़त्म हो जाते हैं। आप अपने बच्चे को एंटीबायोटिक दवाएं देने से पहले कुछ बातों पर विचार जरूर करें-

एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया का जोखिम-

कान में संक्रमण के इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग करने के साथ ही सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं के प्रभाव से खत्म नहीं हो पाता, और ऐसे में बैक्टीरिया के बनने की पूरी संभावना होती है। ऐसे में एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग तभी करें, जब इनकी बहुत ज्यादा जरूरत हो। कई बार एंटीबायोटिक दवाए लगातार देने से उस एंटीबायोटिक दवा का हमारे शरीर पर कोई प्रभाव नही रह जाता फिर हमें दूसरी दवा लेनी पड़ती हो सकता है वो दवा हमारे शरीर पर हमेशा के प्रभावहीन हो जाए। ऐसी स्थिति से बचने के लिए बहुत आवश्यक होने पर ही एंटीबायोटिक का प्रयोग किया जाना चाहिए।

एंटीबायोटिक दवाओं के साइड इफेक्ट  हर एक दवा का कोई-न-कोई साइड इफ़ेक्ट जरूर होता है। ऐसे में एंटीबायोटिक्स का भी कुछ दुष्प्रभाव देखने को मिलता है, जैसे- दस्त आना, दाने या किसी प्रकार के चकत्ते पड़ना आदि। हलाँकि, इसके गंभीर साइड इफेक्ट बहुत कम ही देखने को मिलते हैं।

मूल्य- दवाएं कोई भी सस्ती नहीं होती हैं, खासकर सारी एंटीबायोटिक दवाएं महंगी होती हैं। ऐसे में एंटीबायोटिक दवाओं पर पैसा ख़र्च करने से बेहतर है कि कानों के संक्रमण को घरेलू उपचार के जरिए ठीक किया जाए। क्योंकि कान के संक्रमण बिना एंटीबायोटिक के भी ठीक किया जा सकता है। आपको बता दें कि एंटीबायोटिक्स दवाएं दर्द और बुखार को कम करने में ही कारगर होती हैं।



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