मैक्यूलर डिजेनरेशन के लिए की जाने वाली जाँच

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24th December, 2017

(मैक्यूलर डिजेनरेशन) आँखों की जाँच नेत्ररोग विशेषज्ञ या ऑप्टोमेट्रिस्ट द्वारा की जाती है। इसमें रेटिना के बीच के उस हिस्से की जाँच की जाती है, जो बीच की दृष्टि को नियंत्रित करता है। इसके लिए डॉक्टर सबसे पहले बीमारी की बाहरी जाँच करते हैं। रोगी से दृष्टि और आँखों से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। अन्य अनुवांशिक बीमारियों की तरह ही डॉक्टर इसके भी इतिहस की जानकारी लेते हैं। यदि इन सभी प्रारंभिक जाँचों में व्यक्ति को मैक्यूलर डिजेनरेशन होने की आशंका मिलती है, इसके बाद डॉक्टर आँख की अंदरूनी जाँच करते हैं। अंदरूनी जांच के तौर पर रेटिना के पीछे की स्थिति का पता लगाया जाता है।

मैक्यूलर डिजेनरेशन के लिए की जाने वाली जाँच-

  • आँखों की अंदरूनी जाँच- इसके लिए डॉक्टर आँखों के पीछे की जाँच करने के लिए पहले आँखों में एक दवा डाल कर जाँच करते हैं। इस दवा के जरिये आँख की संरचना फ़ैल जाती है और एक विशेष उपकरण के द्वारा आँखों के पिछले हिस्से की जाँच करते हैं। इस जाँच में रेटिना के नीचे इकट्ठे हुए पीले रंग के द्रव के कारण आँखों को हुए नुकसान की जाँच की जाती है।
  • देखने की क्षमता में कमी की जाँच- यह जाँच एएमएसलर ग्रिड के द्वारा की जाती है। क्योंकि मैक्यूलर डिजेनरेशन में व्यक्ति को सीधी लाइनें भी धुन्धली, टूटी और टेढ़ी-मेढ़ी नज़र आने लगती है।
  • फ्लोरेससेन एंजियोग्राफी (Fluorescein angiography)- इस जाँच में डॉक्टर रोगी की बांह में रंगीन डाई का इंजेक्शन लगाते हैं। यह डाई बांह की नस के द्वारा आँखों की रक्त वाहिकों तक पहुँचती है। इसके बाद एक खास प्रकार के कैमरे से इन रंगयुक्त रक्त वाहिकाओं की तस्वरी खींची जाती है। इन तस्वीरों के द्वारा रेटिना में आए बदलाव और विकृत रक्त वाहिकाओं की जाँच की जाती है।
  • इंडोकेनिन हरी एंजियोग्राफी (Indocyanine Green Angiography)- इस जाँच में भी रोगी की बांह में रंग भर कर इंजेक्शन लगाया जा सकता है। यह जाँच मैक्यूलर डिजेनरेशन के प्रकार का पता लगाने के लिए की जाती है।
  • ऑप्टिकल कोहरेन्स टोमोग्राफी (Optical Coherence Tomography)- यह एक  नोनइन्सैसिव इमेजिंग टेस्ट (जिसमें कोई उपकरण शरीर के भीतर प्रविष्ट नहीं कराया जाता) होता है और इसमें रेटिना की अलग-अलग तरीकों से तस्वीरें ली जाती हैं। इसके बाद रेटिना पर किसी प्रकार की सूजन या पतलापन तो नहीं है यह देखा जाता है। क्योंकि मैक्यूलर डिजेनरेशन में रक्त वाहिकों में क्षति के कारण तरल रक्त वाहिकाओं से निकल कर रेटिना के नीचे इकट्ठा हो जाता है।

 

जाँच में आँखों की स्थिति के आधार पर ही रोगी को उपचार की सलाह दी जाती है।



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