कान में संक्रमण का अवलोकन

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19th April, 2016

Kaise Hota hai Kaan mein Sankraman? | कैसे होता है कान में संक्रमण? | How does Ear Infection Occur?कान के बीच का हिस्सा, जो कान का एक छोटा सा भाग होता है, इसे ईयरड्रम यानी कान का परदा कहा जाता है। यदि इस हिस्से में, कान, गले या नाक के रास्ते कोई भी संक्रमणकारी तत्व (वायरस) पहुंच जाता है, तो कान का यही हिस्स संक्रमित हो जाता है।

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हमारे कान, और गले के बीच में एक छोटी सी टूयब होती है, जो हमारे कान और गले को जोड़ती है। इस ट्यूब को, यूस्टेशीयून की टूयब (eustachian tube) कहा जाता है। लेकिन, कभी-कभी जुकाम की वजह से इस ट्यूबों में सूजन भी आ जाती है, और इसी वजह से इस ट्यूब का रास्ता बंद हो जाता है। इसी के कारण, कान के अंदर बनने वाला तरल वहीं इकट्ठा होने लगता है। इसी कारण इस स्थान पर कीटाणु भी इकट्ठे हो जाते हैं।

कान का संक्रमण बड़े बच्चों में ज्यादा पाया जाता है। क्योँकि उनके ट्यूब छोटे होते हैं, और आसानी से रुक जाते हैं। जिसका मुख्य लक्षण कानों में दर्द होता है। जो कम भी हो सकता है और गंभीर भी। इस समस्या से ग्रसित बच्चे बहुत परेशान होते हैं। इसका प्रभाव छोटे बच्चों पर भी देखने को मिल सकता है, क्योंकि कभी-कभी वह अपना कान खुद भी खींच देते हैं। इससे उन्हें न सिर्फ सोने में परेशानी होती है, बल्कि कभी-कभी बुखार भी आ जाता है।

कानों से पीले रंग के तरल पदार्थ का निकलना, शुरू हो जाता है। ऐसा ईयरड्रम में संक्रमण या उसके फटने की वजह से होता है। हालाँकि यह ज्यादा गंभीर समस्या नहीं है, और कुछ समय बाद खुद-ब-खुद ठीक भी हो जाती है। लेकिन दर्द की वजह से आपको डॉक्टर के पास जाना पड़ सकता है।

उस स्थिति में, जब तरल पदार्थ का निर्माण तो होता है, लेकिन संक्रमण नहीं होता, तो इस स्थिति में बच्चों को कान, बंद-बंद महसूस होता है। ऐसे में उन्हें सुनने में दिक्क्त आ जाती है, लेकिन जब यह तरल बनना बंद हो जाता है, तो सुनने की समस्या खुद-ब-खुद ठीक हो जाती है। इस तरल के खत्म होने में हफ्ते तक का समय भी लग सकता है। लेकिन इसे ठीक होने में एक हफ्ते तक का समय भी लग सकता है।

आपका डॉक्टर, कान की परेशानी का पता लगाने के लिए सबसे पहले लक्षणों के बारे में पूछेगा। इसके बाद डॉक्टर बच्चे की कान की बारीकी से जाँच करेगा। डॉक्टर किसी उपकरण और लाइट की सहायता से कान के परदे की जाँच करता है। हालाँकि यह जाँच इतनी तकलीफ देह नहीं होती, लेकिन कभी-कभी, किसी-किस बच्चे को इस से समसस्य भी हो जाती है।

आपका डॉक्टर आपसे आपके बच्चे के कारण पूछ सकते हैं। और सबसे पहले आपके बच्चे का कान देखेंगे। वो भी एक खास तरह के प्रकाशीय उपकरण के जरिये की कंही कान में तरल पदार्थ तो जमा नहीं है। यह जाँच दर्द रहित होता है।

बच्चों में इसके जोखिम बढ़ जाते हैं ऐसे में डॉक्टर 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए एंटीबायोटिक दवाओं की सलाह दे सकता है। आप एसिटामिनोफेन एक ओवर -द-काउंटर दर्द रिलीवर के साथ घर पर अपने बच्चे का इलाज कर सकते हैं। और याद रहे 20 से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को एस्पिरिन न दें। आपका डॉक्टर आपके बच्चे के कान दर्द को कम करने के लिए एयरड्रॉप और एंटीबायोटिक दे सकता है। लेकिन कानों का इंफेक्शन बिना दवाओं के बेहतर प्रभाव देता है। अपने डॉक्टर से इस बारे में जरूर बात करें। क्योंकि आपके बच्चे का इंफेक्शन इस बात पर निर्भर करता है की संक्रमण कितना पुराना और बड़ा है।

हालाँकि इस समस्या में, ज्यादातर, दवाइयों या किसी खास इलाज की जरूरत नही होती, लेकिन कभी-कभी डॉक्टर एंटीबायोटिक्स भी दे देते हैं। हालाँकि इस तरह का ट्रीटमेंट बच्चों की उम्र और उनके संक्रमण की घातकता पर निर्भर करता है। एंटीबायोटिक्स की सलाह, दो साल से कम उम्र के बच्चों और उन बच्चों को दी जाती है, जिनका संक्रमण काफी ज्यादा हो चुका होता है।

कान के संक्रमण और सुनने में परेशानी के लिए, एक मामूली सर्जरी के द्वारा भी इसका इलाज कर सकते हैं। इस इसमें एक पतली ट्यूब को कान में डालकर कान को साफ किया जाता है।

कभी-कभी संक्रमण के बाद कुछ देर के लिए बच्चों को अच्छे से सुनाई नहीं देता, और अगर ये समस्या 3 से 4 महीने रहती है, तो अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

कान में संक्रमण की रोकथाम के लिए जरुरी है ध्यान रखना-

  • धूम्रपान ना करें। सिगरेट का धुआं कान के संक्रमण को बढ़ाता है। बच्चों के आस-पास तो सिगरेट बिलकुल भी न पियें। यदि यह समस्या 3-4 महीने लगातार होती रहती है, तो डॉकटर से परामर्श लें
  • बच्चों को बार-बार ठीक से हाथ धोने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • अपने बच्चे को स्तन-पान कराएं।
  • अपने बच्चे की रोग-प्रति रोधक क्षमता को बनाएं रखें।
  • इस बात को सुनिश्चित कर लें कि बच्चा बोतल मुंह में लेकर सो न जाए।
  • जितना हो सके अपने बच्चों की खुद देखभाल करें, किसी ग्रुप के पास उसे न छोड़ें।



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